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History of India
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वैदिक सभ्यता के आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक जीवन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. ऋग्वैदिक काल में संपत्ति का मुख्य आधार गोधन (गाय) था तथा 'दुहितृ' शब्द का प्रयोग उस पुत्री के लिए किया जाता था जो गाय का दूधहिया (दूध निकालने वाली) होती थी, जबकि उत्तर वैदिक काल में लोहे के व्यापक प्रयोग (जिसे 'कृष्ण अयस' कहा गया) ने कृषि अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से रूपांतरित कर दिया।
  2. 2. शतपथ ब्राह्मण में विदेध माधव और गौतम राहुगण की कथा का उल्लेख है, जो उत्तर वैदिक आर्यों के पूर्व की ओर सदािरा (गंडक) नदी घाटी तक भौगोलिक विस्तार और बस्तियों के बसने की प्रक्रिया को दर्शाती है।
  3. 3. ऋग्वैदिक काल में बहुविवाह और नियोग प्रथा का प्रचलन था, लेकिन बाल विवाह और परदा प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियाँ समाज में पूरी तरह से अपनी जड़ें जमा चुकी थीं, जिसका उल्लेख दसवें मंडल में मिलता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: ऋग्वैदिक काल में गाय सबसे महत्वपूर्ण संपत्ति थी और युद्धों का मुख्य कारण गायों की प्राप्ति (गविष्टि) हुआ करता था। उत्तर वैदिक काल में लोहे (कृष्ण अयस) की खोज और उसके व्यापक प्रयोग से जंगलों को साफ करना आसान हुआ, जिससे कृषि मुख्य आजीविका बन गई। कथन 2 सही है: शतपथ ब्राह्मण में वर्णित विदेध माधव की कथा सदािरा (आधुनिक गंडक नदी) तक आर्यों के प्रसार और कृषि बस्तियों के विस्तार का ऐतिहासिक साक्ष्य प्रस्तुत करती है। कथन 3 गलत है: ऋग्वैदिक समाज में बाल विवाह, परदा प्रथा और सती प्रथा जैसी कुरीतियाँ प्रचलित नहीं थीं; स्त्रियाँ उपनयन संस्कार की अधिकारी थीं और वे सभा-समिति की बैठकों में भी भाग लेती थीं। वैदिक काल के सामाजिक और ऐतिहासिक स्वरूप को अधिक गहराई से जानने के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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