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History of India
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मौर्योत्तर काल एवं गुप्त साम्राज्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. मौर्योत्तर काल में सातवाहन शासकों ने शीशे (lead) के सिक्कों का बड़े पैमाने पर प्रचलन किया तथा उन्होंने ब्राह्मणों और बौद्ध भिक्षुओं को कर-मुक्त भूमि अनुदान (Land Grants) देने की प्रथा की शुरुआत की, जिसकी पुष्टि नानाघाट और नासिक के अभिलेखों से होती है।
- 2. कुषाण शासक कनिष्क के शासनकाल में पुरुषपुर (पेशावर) में चतुर्थ बौद्ध संगीति का आयोजन किया गया था, जिसकी अध्यक्षता वसुमित्र ने की थी और इसी संगीति में बौद्ध धर्म स्पष्ट रूप से हीनयान और महायान संप्रदायों में विभाजित हो गया था।
- 3. गुप्त वंश के शासक समुद्रगुप्त के प्रयाग प्रशस्ति अभिलेख (जिसे उसके दरबारी कवि हरिषेण ने संस्कृत की चंपू शैली में लिखा है) में आर्यावर्त के 9 और दक्षिणपथ के 12 राजाओं को पराजित करने का विस्तृत उल्लेख मिलता है, जिसके आधार पर इतिहासकार विंसेंट स्मिथ ने उसे 'भारत का नेपोलियन' कहा था।
- 4. गुप्त काल में स्वर्ण सिक्कों को 'दिनार' कहा जाता था, और यद्यपि गुप्तों के प्रारंभिक स्वर्ण सिक्कों में प्रचुर मात्रा में शुद्ध सोना मिलता है, किंतु उनके उत्तरवर्ती शासकों (जैसे स्कंदगुप्त के काल तक) के स्वर्ण सिक्कों में सोने की मात्रा में निरंतर कमी और मिलावट देखने को मिलती है, जो आर्थिक समृद्धि में गिरावट का संकेत देती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए चारों कथन पूर्णतः सत्य हैं। मौर्योत्तर काल में सातवाहन वंश ने शीशे के सिक्के चलाए और भूमि अनुदान प्रथा की शुरुआत की। कनिष्क के समय चतुर्थ बौद्ध संगीति हुई जिसमें बौद्ध धर्म हीनयान और महायान में बंटा। समुद्रगुप्त की उपलब्धियों का वर्णन हरिषेण रचित प्रयाग प्रशस्ति में मिलता है। गुप्त काल में स्वर्ण सिक्कों को 'दिनार' कहा जाता था और उत्तर गुप्त काल में आर्थिक कारणों से सोने के सिक्कों में मिलावट बढ़ने लगी थी।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के उदय से पूर्व ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की आर्थिक, प्रशासनिक और सामाजिक नीतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लॉर्ड डलहौजी की 'व्यपगत का सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति के तहत सतारा, नागपुर और झांसी जैसी रियासतें बिना किसी वैध उत्तराधिकारी के अभाव में ब्रिटिश साम्राज्य में मिला ली गईं, जिससे भारतीय शासकों और उनके आश्रितों में गहरा रोष उत्पन्न हुआ।
2. कंपनी प्रशासन द्वारा भू-राजस्व की कठोर प्रणालियों (जैसे स्थायी बंदोबस्त और रयतवारी व्यवस्था) के माध्यम से अत्यधिक कर उगाही किए जाने के कारण पारंपरिक कृषक वर्ग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह से तबाह हो गई, जो विद्रोह के प्रमुख आर्थिक कारणों में से एक था।
3. वर्ष 1850 में पारित 'धार्मिक अयोग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act) के अंतर्गत यह प्रावधान किया गया कि ईसाई धर्म अपनाने वाले व्यक्ति को अपने पैतृक संपत्ति के अधिकारों से वंचित नहीं किया जाएगा, जिसे रूढ़िवादी भारतीय समाज ने धर्म परिवर्तन को बढ़ावा देने का एक षड्यंत्र माना।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरjis कादिर को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ में ब्रिटिश रेजिडेंसी के खिलाफ हुए विद्रोह का नेतृत्व किया और अंत तक आत्मसमर्पण करने से इंकार करते हुए नेपाल की तराई में शरण ली।
2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'फैजाबाद के डंडिया ढंका' के नाम से भी जाना जाता है, ने ब्रिटिश सेना के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व किया तथा अंग्रेजों द्वारा उन पर पचास हजार रुपये का भारी इनाम घोषित किया गया था।
3. लखनऊ की रक्षा और ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल के आक्रमण के समय बेगम हजरत महल की सेना का साथ देने के लिए नाना साहब और तात्या टोपे कभी भी अवध क्षेत्र में नहीं आए थे।
4. मौलवी अहमदुल्लाह शाह को अंततः पवयां (रोहिलखंड) के राजा द्वारा ब्रिटिश सेना के साथ विश्वासघात के परिणामस्वरूप धोखे से मार डाला गया और उनके सिर को काटकर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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सुल्तान फिरोज तुगलक ने सिंचाई कर लगाने के लिए उलेमाओं से अनुमति ली थी, इस कर को क्या कहा जाता था?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की गतिविधियों और रणनीतिक निर्णयों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नाना साहब ने कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व करते हुए स्वयं को पेशवा घोषित किया और पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र होने के नाते अंग्रेजों द्वारा उनकी पेंशन और उपाधि रोके जाने के प्रतिशोध में ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध शस्त्र उठाए।
2. अजीमुल्ला खां, जो नाना साहब के मुख्य सलाहकार और निष्ठावान सहयोगी थे, ने कूटनीतिक और वैचारिक पक्ष संभालते हुए लंदन में पेंशन बहाली के लिए पैरवी की थी और बाद में तात्या टोपे के साथ मिलकर कानपुर की सैन्य रणनीति को अमलीजामा पहनाया।
3. तात्या टोपे ने कानपुर के पतन के पश्चात अपनी सैन्य टुकड़ी के साथ ग्वालियर की ओर प्रस्थान किया और वहाँ की सेना को अपने पक्ष में मिलाकर रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर ब्रिटिश सेना को कड़ी चुनौती दी।
4. कानपुर में पराजय के बाद नाना साहब अंग्रेजों के हाथों जीवित पकड़े गए और ब्रिटिश अदालत द्वारा मुकदमा चलाकर उन्हें सार्वजनिक रूप से कानपुर में ही फाँसी पर लटका दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक विकास और संस्थागत परिवर्तनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इल्तुतमिश ने सल्तनत काल में 'चालीसा' (तुर्कान-ए-चहलगानी) नामक तुर्क गुलाम सरदारों के एक प्रभावशाली दल का गठन किया था, जिसे बाद में बलबन ने अपनी केंद्रीय सत्ता को सुदृढ़ करने और आंतरिक विद्रोहों का दमन करने के लिए पूरी तरह समाप्त कर दिया था।
2. अलाउद्दीन खिलजी ने सल्तनत काल में पहली बार सैनिकों को नगद वेतन देने की स्थायी व्यवस्था शुरू की और घोड़ों को दागने (दाग) तथा सैनिकों का हुलिया लिखने की प्रथा को सख्ती से लागू किया, ताकि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सके।
3. मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में मंगोल आक्रमणों से निपटने और राज्य की सैन्य शक्ति को बढ़ाने के लिए सल्तनत की सेना को तीन वर्षों का अग्रिम वेतन नगद रूप में दिया गया था, जिससे शाही राजकोष दिवालिया होने के कगार पर पहुँच गया था।
4. सिकंदर लोदी ने भू-राजस्व के निर्धारण और माप के लिए 'गज-ए-सिकंदरी' का प्रचलन शुरू किया, जिसकी लंबाई 39 अंगुल (लगभग 30 इंच) थी, तथा उसने कृषि और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए अनाज पर लगने वाले जकात (चुंगी कर) को समाप्त कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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