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History of India
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना और नरम दल-गरम दल काल (1885-1919) के वैचारिक परिप्रेक्ष्य, कार्यप्रणाली तथा प्रमुख घटनाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. कांग्रेस के प्रारंभिक चरण (1885-1905) के नरमपंथी नेताओं का मुख्य विश्वास 'ब्रिटिश न्यायप्रियता' में था, और उन्होंने ब्रिटिश संसद में भारतीय प्रतिनिधित्व की मांग को लेकर वर्ष 1889 में विलियम वेडरबर्न और दाभाई नौरोजी के प्रयासों से लंदन में 'ब्रिटिश कमेटी ऑफ इंडियन नेशनल कांग्रेस' की स्थापना की थी।
- 2. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस के विभाजन के पीछे मुख्य वैचारिक मतभेद यह था कि गरम दल के नेता पूरे देश में स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन का विस्तार करना चाहते थे, जबकि नरमपंथियों का मानना था कि यह आंदोलन केवल बंगाल तक ही सीमित रहना चाहिए और इसे अंग्रेजों के विरुद्ध एक व्यापक प्रत्यक्ष कार्रवाई के रूप में नहीं चलाया जाना चाहिए।
- 3. वर्ष 1916 के लखनऊ अधिवेशन में कांग्रेस के दोनों दलों के पुनर्मिलन और कांग्रेस-लीग समझौते (लखनऊ पैक्ट) में लोकमान्य तिलक और मुहम्मद अली जिन्ना की महत्वपूर्ण भूमिका थी, किंतु इस समझौते की एक बड़ी भूल यह थी कि इसने मुसलमानों के लिए 'पृथक निर्वाचक मंडल' (Separate Electorates) की मांग को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार कर लिया, जिसे भविष्य के सांप्रदायिक विभाजन का मार्गप्रशस्त करने वाला माना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि कांग्रेस के नरमपंथी नेताओं ने अपनी नीतियों के प्रचार-प्रसार के लिए ब्रिटेन में भारतीय पक्ष रखने हेतु वर्ष 1889 में 'ब्रिटिश कमेटी ऑफ इंडियन नेशनल कांग्रेस' की स्थापना की थी। कथन 2 गलत है क्योंकि नरमपंथियों की आपत्ति स्वदेशी आंदोलन के बंगाल से बाहर प्रसार और बहिष्कार की रणनीति पर थी, वे इसे केवल बंगाल तक सीमित रखना चाहते थे, किंतु वे यह भी नहीं चाहते थे कि आंदोलन चरम रूप ले। हालांकि, मुख्य विवाद आंदोलन के प्रसार और अगले अध्यक्ष के चुनाव को लेकर था। कथन 3 सही है क्योंकि 1916 के लखनऊ अधिवेशन में तिलक और जिन्ना के प्रयासों से कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच समझौता हुआ, जिसमें कांग्रेस ने लीग की पृथक निर्वाचक मंडल की मांग को स्वीकार कर लिया, जिसे विकिपीडिया संदर्भ के इतिहास में एक बड़ी राजनीतिक भूल के रूप में देखा जाता है।
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सल्तनत काल के अंत में उत्तर भारत में किस क्षेत्रीय शक्ति का उत्कर्ष हुआ?
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यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और बंगाल में ब्रिटिश सत्ता की स्थापना के प्रारंभिक चरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मुगल सम्राट जहांगीर ने वर्ष 1615 में ब्रिटिश सम्राट जेम्स प्रथम के राजदूत के रूप में भारत आए सर थॉमस रो को मुगल साम्राज्य के सभी भागों में व्यापार करने और कारखाना स्थापित करने का पूर्ण शाही फरमान प्रदान कर दिया था।
2. वर्ष 1717 में मुगल सम्राट फारुकसियर द्वारा ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को जारी किए गए 'सुनहरे फरमान' (Magna Carta) के तहत कंपनी को बंगाल, हैदराबाद और अवध में 3000 रुपये वार्षिक कर के बदले सीमा शुल्क मुक्त व्यापार करने का असीमित अधिकार मिल गया था।
3. फ्रांसिस डे नामक ब्रिटिश अधिकारी ने वर्ष 1639 में चंद्रगिरि के राजा से मद्रास को पट्टे पर प्राप्त किया था और वहाँ 'फोर्ट सेंट जॉर्ज' की नींव रखी, जो आगे चलकर अंग्रेजों का दक्षिण भारत में प्रमुख प्रशासनिक केंद्र बना।
4. बंगाल के नवाब अलीवर्दी खान ने यूरोपीय व्यापारियों की तुलना 'मधुमक्खियों' से करते हुए यह चेतावनी दी थी कि यदि उन्हें छेड़ा न जाए तो वे शहद देंगी, और यदि छेड़ा जाए तो वे काट-काट कर मार डालेंगी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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बिहार में 1857 के महान विद्रोह के दौरान वीर कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह के नेतृत्व, सैन्य रणनीतियों तथा संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वीर कुंवर सिंह ने आरा पर अधिकार करने के पश्चात अंग्रेजी सेना के विरुद्ध परंपरागत युद्धशैली का त्याग कर छापामार (गोरिल्ला) युद्ध प्रणाली को अपनाया और गंगा नदी पार करते समय ब्रिटिश सेनापति डगलस की गोलियों का सामना करते हुए अपने बाएं हाथ को काटकर गंगा में अर्पित कर दिया था।
2. अमर सिंह ने वीर कुंवर सिंह की मृत्यु के उपरांत जगदीशपुर के जंगलों, कैमूर की पहाड़ियों और रोहतास के क्षेत्रों से ब्रिटिश सेना के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व जारी रखा और ब्रिटिश सत्ता को चुनौती देते हुए अपनी स्वतंत्र सरकार स्थापित कर ली थी।
3. अमर सिंह द्वारा संचालित इस समानांतर प्रशासन और सैन्य अभियानों का दमन करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने मेजर जनरल डगलस और विंसेंट आयर को विशेष रूप से नियुक्त किया था, जिन्होंने कैमूर की पहाड़ियों में कड़े संघर्ष के बाद इस विद्रोह को पूरी तरह कुचला।
4. वर्ष 1858 के अंत में नेपाल के तराई क्षेत्रों में ब्रिटिश सेना के साथ हुई एक अंतिम झड़प में अमर सिंह वीरगति को प्राप्त हुए थे, जिसके साथ ही बिहार में 1857 के विद्रोह की अंतिम संगठित ज्वाला समाप्त हो गई थी.
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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प्राचीन भारतीय दर्शन और जैन-बौद्ध धर्म के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बौद्ध धर्म के प्रारंभिक ग्रंथों (जैसे अंगुत्तर निकाय) में जहाँ सोलह महाजनपदों का उल्लेख मिलता है, वहीं जैन धर्म के पवित्र ग्रंथ 'भगवती सूत्र' में भी इन महाजनपदों की लगभग समान सूची प्राप्त होती है।
2. जैन धर्म के 'स्याद्वाद' (सप्तभंगी नय) सिद्धांत के अनुसार, किसी भी वस्तु या सत्य के अस्तित्व को एकांगी रूप से पूर्णतः सत्य नहीं माना जा सकता, क्योंकि प्रत्येक वस्तु के अनेक धर्म होते हैं और यह सापेक्षता का सिद्धांत ज्ञान की सीमा को रेखांकित करता है।
3. बौद्ध संघ में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु सीमा 15 वर्ष निर्धारित की गई थी, तथा संघ के नियमों के अनुसार चोर, हत्यारे, ऋणग्रस्त व्यक्ति और राजा के सेवक (सैनिक) भी किसी भी समय बौद्ध भिक्षु बन सकते थे।
4. जैन धर्म के श्वेतांबर संप्रदाय के अनुयायी पूर्ण नग्नता (अचेलक) का कठोरता से पालन करते हैं, जबकि दिगंबर संप्रदाय के भिक्षु श्वेत वस्त्र धारण करने की अनुमति देते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह की असफलता के मुख्य कारणों और इसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विद्रोहियों के पास एक सुसंगत राजनीतिक दृष्टिकोण, एक आधुनिक सामाजिक-आर्थिक कार्यक्रम और संपूर्ण भारत के लिए भविष्य की शासन व्यवस्था का कोई एकीकृत खाका नहीं था, जिसके कारण यह आंदोलन एक अखिल भारतीय वैकल्पिक सत्ता स्थापित करने में विफल रहा।
2. अधिकांश भारतीय रियासतों के शासकों, बड़े जमींदारों और साहूकारों ने या तो अंग्रेजों का सक्रिय समर्थन किया या तटस्थ बने रहे, क्योंकि उन्हें भय था कि यदि विद्रोह सफल हो गया तो पुनः पुरानी सामंती और जागीरदारी व्यवस्था स्थापित हो जाएगी जो उनके स्वार्थों के विरुद्ध थी।
3. विभिन्न क्षेत्रों के विद्रोही नेताओं के बीच आपसी समन्वय, रणनीतिक तालमेल और केंद्रीय नेतृत्व का पूर्ण अभाव था; उदाहरण के लिए, दिल्ली के सम्राट बहादुर शाह जफर के पास प्रतीкаत्मक अधिकार तो था, किंतु उनके पास वास्तविक सैन्य नियंत्रण और अन्य क्षेत्रीय नेताओं को निर्देश देने की क्षमता नहीं थी।
4. आधुनिक सैन्य तकनीक, अनुशासित सेना, संचार के आधुनिक साधनों (जैसे टेलीग्राफ और रेलवे) तथा ब्रिटिश नौसेना के प्रभुत्व के मुकाबले विद्रोही सैनिकों के पास हथियारों और गोला-बारूद की भारी कमी थी, जिससे वे लंबे समय तक टिक नहीं सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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