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History of India
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सिंधु घाटी सभ्यता की परिपक्व अवस्था के दौरान विभिन्न पुरातात्विक स्थलों से प्राप्त विशिष्ट अवशेषों, व्यापारिक वस्तुओं और उनकी भौगोलिक अवस्थिति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. चान्हूदो एकमात्र ऐसा हड़प्पाकालीन स्थल था जहाँ किसी भी प्रकार के गढ़ (Citadel या Fortification) के अवशेष नहीं मिले हैं, और यह स्थल मुख्य रूप से मनके बनाने, सीप की कटाई और मुहर निर्माण जैसे शिल्प उद्योगों का एक प्रमुख केंद्र था।
  2. 2. बनावली (हरियाणा) से प्राप्त पुरातात्विक साक्ष्यों में पक्की मिट्टी (Terracotta) से बने हल का एक प्रतिरूप मिला है, तथा इस स्थल की नगर योजना सिंधु घाटी की अन्य बस्तियों के विपरीत 'ग्रिड पद्धति' पर आधारित न होकर अरीय (Radial) और अनियमित विन्यास को दर्शाती है।
  3. 3. सुरकोटडा एकमात्र ऐसा सैंधव स्थल है जहाँ से घोड़े की वास्तविक अस्थियों (Horse remains) के स्पष्ट पुरातात्विक साक्ष्य प्राप्त हुए हैं, जबकि परिपक्व हड़प्पा संस्कृति के सामान्य जनजीवन में घोड़े के व्यापक प्रयोग के साक्ष्य अन्य स्थलों से बहुतायत में मिलते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि चान्हूदो (सिंध, पाकिस्तान) सिंधु घाटी सभ्यता का एकमात्र ऐसा प्रमुख स्थल है जो बिना दुर्ग (Fortification) के बसा हुआ था और यहाँ शिल्प उत्पादन जैसे मनके बनाना, मुहर निर्माण आदि का कार्य बड़े पैमाने पर होता था। कथन 2 सही है क्योंकि हरियाणा के फतेहाबाद जिले में स्थित बनावली से टेराकोटा (पक्की मिट्टी) का हल मिला है और इसकी नगर योजना तथा जल निकासी प्रणाली ग्रिड पैटर्न के बजाय कुछ अनियमित और अरीय पैटर्न को दर्शाती है। कथन 3 गलत है क्योंकि सुरकोटडा से घोड़े की हड्डियों के अवशेष मिलने के साक्ष्य जरूर कुछ विद्वानों द्वारा बताए गए हैं, किंतु संपूर्ण सिंधु घाटी सभ्यता में घोड़ा कोई सर्वसामान्य या व्यापक रूप से प्रयुक्त पालतू पशु नहीं था और परिपक्व हड़प्पा संस्कृति के अधिकांश स्थलों पर इसके निर्विवाद साक्ष्य नहीं मिलते हैं। सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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