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History of India
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मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल और सम्राट अशोक के धम तथा नीतिगत सुधारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. मौर्य प्रशासन में 'अध्यक्ष' विभिन्न विभागों के अधीक्षक होते थे, जैसे 'सुराध्यक्ष' आबकारी और मदिरा विभाग का प्रमुख था, जबकि 'लक्षणाध्यक्ष' टकसाल (Coinage) का प्रमुख अधिकारी होता था।
  2. 2. अशोक के 'धम्म' का मूल आधार केवल बौद्ध धर्म के धार्मिक अनुष्ठानों का प्रसार करना था, और उसने अपने शिलालेखों में बौद्ध संघ के प्रति अपनी अटूट निष्ठा प्रकट करते हुए राज्य के सभी नागरिकों के लिए बौद्ध धर्म अपनाना अनिवार्य कर दिया था।
  3. 3. मेगास्थनीज की 'इंडिका' के अनुसार, पाटलिपुत्र नगर का प्रशासन छह समितियों (Committees) द्वारा संचालित होता था, जिनमें प्रत्येक समिति में पाँच सदस्य होते थे जो शिल्पकारों, विदेशियों, जन्म-मृत्यु पंजीकरण और व्यापार की देखरेख करते थे।
  4. 4. चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में सौराष्ट्र क्षेत्र के गवर्नर पुष्यगुप्त वैश्य द्वारा जूनागढ़ (गिरनार) के पास 'सुदर्शन झील' का निर्माण करवाया गया था, जिसका उल्लेख बाद में रुद्रदामन के जूनागढ़ अभिलेख में मिलता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

मौर्य साम्राज्य के प्रशासनिक और ऐतिहासिक संदर्भ में कथन 1, 3 और 4 सही हैं। चाणक्य के 'अर्थशास्त्र' और मेगास्थनीज की 'इंडिका' के अनुसार मौर्य प्रशासन अत्यंत विकेंद्रित और सुव्यवस्थित था। विभिन्न विभागों के प्रमुखों को 'अध्यक्ष' कहा जाता था, जिसमें सुराध्यक्ष (मदिरा विभाग) और लक्षणाध्यक्ष (टकसाल) शामिल थे। पाटलिपुत्र का नगर प्रशासन छह समितियों द्वारा चलाया जाता था। चंद्रगुप्त मौर्य के गवर्नर पुष्यगुप्त ने सुदर्शन झील का निर्माण करवाया था। किंतु कथन 2 गलत है, क्योंकि अशोक का 'धम्म' कोई नया धर्म या बौद्ध धर्म का राजनीतिक प्रचार नहीं था, बल्कि यह एक नैतिक संहिता (Ethical Code) थी जिसमें सहिष्णुता, बड़ों का आदर और जीवों के प्रति दया पर जोर दिया गया था। उसने कभी भी नागरिकों के लिए बौद्ध धर्म अपनाना अनिवार्य नहीं किया था। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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