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History of India
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बौद्ध धर्म और जैन धर्म के प्रारंभिक दार्शनिक विकास तथा उनकी संगीतों (Councils) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. बौद्ध संघ के प्रथम विभाजन के पश्चात महासंगिफ़क संप्रदाय का उदय हुआ, जिसने अनुशासन के नियमों में लचीलापन अपनाने का समर्थन किया, जबकि थेरवादी (स्थविरवाद) रूढ़िवादी परंपरा के पक्षधर रहे।
- 2. जैन धर्म की प्रथम जैन संगीति पाटलिपुत्र में स्थूलभद्र की अध्यक्षता में हुई थी, जिसमें जैन वेदों और बारह अंगों का संकलन किया गया, किंतु दिगंबर संप्रदाय ने इन संकलित ग्रंथों को पूरी तरह स्वीकार करने से इंकार कर दिया।
- 3. बौद्ध धर्म के विपरीत जैन धर्म ने आत्मा (जीव) के अस्तित्व को स्वीकार किया और मोक्ष प्राप्ति के लिए घोर कायाक्लेश तथा तपस्या को अनिवार्य माना, जबकि बुद्ध ने मध्यम प्रतिपधा (अमज्झिण पतिपदा) पर बल दिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
बौद्ध धर्म और जैन धर्म दोनों ही प्राचीन भारत के श्रमण परंपरा से उत्पन्न हुए महान धार्मिक आंदोलन थे। वैशाली की द्वितीय बौद्ध संगीति के पश्चात बौद्ध संघ में स्थविरवाद और महासंगिफ़क के रूप में पहला बड़ा विभाजन हुआ। जैन धर्म की प्रथम संगीति पाटलिपुत्र में स्थूलभद्र की अध्यक्षता में हुई थी जिसमें बारह अंगों का संकलन हुआ, जिसे श्वेतांबर मानते हैं किंतु दिगंबर नहीं। बौद्ध धर्म 'अनिरात्मवाद' (अनात्मन्) में विश्वास रखता है, जबकि जैन धर्म प्रत्येक जीव में शाश्वत आत्मा का अस्तित्व मानता है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
Related Questions
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान झांसी और ग्वालियर में रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे के सैन्य अभियानों तथा उनके संघर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मार्च 1858 में ब्रिटिश सेनापति सर ह्यूरोज़ द्वारा झांसी की घेराबंदी किए जाने के पश्चात रानी लक्ष्मीबाई ने अत्यंत साहस का परिचय दिया और किले की रक्षा करते हुए अंततः तात्या टोपे की सेना की सहायता से कालपी की ओर प्रस्थान किया।
2. कालपी की पराजय के पश्चात रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ने ग्वालियर की ओर रुख किया, जहाँ उन्होंने सिंधिया शासक को पराजित कर ग्वालियर के रणनीतिक किले पर अधिकार कर लिया तथा नाना साहब को पेशवा घोषित किया।
3. सर ह्यूरोज़ के नेतृत्व में ब्रिटिश सेना ने ग्वालियर पर पुनः आक्रमण किया, और 18 जून 1858 को ग्वालियर के पास कोटा-की-सराय में लड़ते हुए रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुईं, जिसके बाद ह्यूरोज़ ने उन्हें 'भारतीय विद्रोहियों में एकमात्र सर्वश्रेष्ठ और सबसे बहादुर सैन्य नेता' कहा था।
4. ग्वालियर के पतन के बाद तात्या टोपे नेपाल की पहाड़ियों की ओर सफलतापूर्वक निकल गए और ब्रिटिश काल के अंत तक अंग्रेजों के हाथ कभी नहीं आए, वहीं रानी लक्ष्मीबाई के निष्ठावान सेनापति मान सिंह ने अंग्रेजों से संधि कर ली थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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खिलजी काल में "खुत" और "मुकद्दम" से कौन से विशेषाधिकार छीन लिए गए थे?
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मध्यकालीन भारत के सूफी आंदोलनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में चिश्ती सिलसिले की स्थापना ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ने की थी और इस सिलसिले के संतों ने शाही संरक्षण (पैट्रोनटेज) तथा राजनीतिक पदों को अनिवार्य रूप से स्वीकार करते हुए सुल्तानों के दरबार में सक्रिय भूमिका निभाई थी।
2. सुहरावर्दी सिलसिला मुख्य रूप से मुल्तान और सिंध क्षेत्र में सक्रिय था, तथा इस सिलसिले के संतों ने चिश्ती संतों के विपरीत राजकीय सहायता और जागीरों को स्वीकार करने से कभी परहेज नहीं किया।
3. सूफी संतों की सभाओं को 'मजलिस' कहा जाता था, जबकि संगीत और रहस्यवादी नृत्य के माध्यम से ईश्वर की आराधना की पद्धति को 'समां' कहा जाता था, जिसे चिश्ती सिलसिले ने विशेष रूप से अपनाया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में विद्रोह को दबाने वाले ब्रिटिश अधिकारियों और उनके संबंधित क्षेत्रों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. दिल्ली - जॉन निकोलसन और हडसन
2. लखनऊ - सर कॉलिन कैंपबेल और हेनरी लॉरेंस
3. कानपुर - सर कॉलिन कैंपबेल और विरार
4. झाँसी और ग्वालियर - सर ह्यू रोज़
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
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मध्यकालीन भारत के भक्ति और सूफी आंदोलनों के वैचारिक विकास, संतों के दार्शनिक सिद्धांतों तथा उनके ऐतिहासिक प्रभावों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. रामानंद ने उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन को लोकप्रिय बनाने में अग्रणी भूमिका निभाई, और उनके शिष्यों में कबीर, रैदास (संत रविदास), पीपा और धन्ना जैसे विभिन्न जातियों व पृष्ठभूमियों के संत शामिल थे, जिन्होंने जातिगत भेदभाव को कड़ी चुनौती दी।
2. सूफी सिलसिले के अंतर्गत 'सुहरावर्दी सिलसिला' ने कठोर आत्म-अनुशासन, सादगी और फकीरी जीवन पर अत्यधिक बल दिया, तथा उनके संतों ने चिश्ती संतों के ठीक विपरीत कभी भी शाही अनुदान, जागीरें या राजकीय पदों को स्वीकार नहीं किया।
3. मीराबाई ने राजसी सुखों का परित्याग कर भगवान कृष्ण की उपासना 'माधुर्य भाव' (प्रेमाभक्ति) से की, और उनके पद मुख्य रूप से राजस्थानी, ब्रज और गुजराती भाषा में रचे गए हैं, जिन्हें राजस्थान और गुजरात के लोक-मानस में अत्यधिक प्रतिष्ठा प्राप्त हुई।
4. सूफी संतों में 'चिश्ती सिलसिला' के प्रसिद्ध संत शेख निजामुद्दीन औलिया ने सल्तनत काल के दौरान अनेक सुल्तानों के आमंत्रण को सहर्ष स्वीकार किया और शाही दरबार में उच्च पद ग्रहण कर राजनीतिक मामलों में सक्रिय रूप से हस्तक्षेप किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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