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History of India
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सत्रहवीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित मराठा साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, विशेषकर 'अष्टप्रधान' और राजस्व प्रशासन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. शिवाजी के केंद्रीय प्रशासन में 'अष्टप्रधान' नामक मंत्रिपरिषद का गठन किया गया था, जिसमें प्रत्येक मंत्री सीधे सम्राट के प्रति उत्तरदायी था और यह कोई मंत्रिमंडल (Cabinet) न होकर आठ अलग-अलग प्रशासनिक विभागों के व्यक्तिगत सचिवों या सलाहकारों का समूह था।
  2. 2. अष्टप्रधान में 'पेशवा' (या पंत प्रधान) प्रधानमंत्री का पद था जो सामान्य प्रशासन और वित्त का प्रमुख होता था, जबकि सैन्य मामलों का सर्वोच्च कमांडर 'सेनापति' (या सर-ए-नौबत) होता था, जो विशुद्ध रूप से वंशानुगत आधार पर नियुक्त किया जाता था।
  3. 3. शिवाजी ने अपनी प्रशासनिक सुधार नीति के अंतर्गत मलिक अंबर की लगान प्रणाली पर आधारित भूमि सर्वेक्षण और मूल्यांकन को अपनाया, तथा अपने राज्य में 'जागीरदारी प्रथा' को हतोत्साहित करते हुए सैनिकों और अधिकारियों को नगद वेतन देने की परंपरा को बढ़ावा दिया।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: शिवाजी महाराज द्वारा गठित 'अष्टप्रधान' एक सलाहकार मंत्रिपरिषद थी, जिसमें सभी आठ मंत्री (पेशवा, अमात्य, मंत्री, सुमंत, सेनापति, पंडितराव, न्यायाधीश और सचिव) अपने-अपने विभागों के लिए सीधे छत्रपति के प्रति उत्तरदायी थे। यह कोई कैबिनेट प्रणाली नहीं थी, बल्कि मंत्रियों की व्यक्तिगत नियुक्ति राजा द्वारा की जाती थी। कथन 2 गलत है: अष्टप्रधान के अंतर्गत 'सेनापति' (सर-ए-नौबत) सैन्य विभाग का प्रमुख होता था, किंतु यह पद **वंशानुगत नहीं** था। शिवाजी ने योग्यता के आधार पर अधिकारियों का चयन किया और किसी भी पद को वंशानुगत बनाने से कड़ाई से परहेज किया ताकि सामंती प्रवृत्तियों को रोका जा सके। कथन 3 सही है: शिवाजी ने दक्कन के प्रसिद्ध प्रशासक मलिक अंबर की भू-राजस्व व्यवस्था का अनुसरण करते हुए भूमि का पैमाइश (सर्वेक्षण) कराया, बिस्वा की इकाई तय की और जागीरदारी प्रथा के स्थान पर अधिकारियों और सैनिकों को नगद वेतन (या कभी-कभी राजस्व संग्रह के अधिकार वाला नोट) देने की नीति अपनाई, ताकि केंद्र का नियंत्रण मजबूत रहे। इस महान मराठा साम्राज्य और इसके प्रशासनिक ताने-बाने के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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→ वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान विभिन्न भारतीय क्षेत्रों में हुए विद्रोह का दमन करने वाले प्रमुख ब्रिटिश अधिकारियों और उनके संबंधित कार्यक्षेत्रों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. जॉन निकलसन — दिल्ली 2. मेजर जनरल हैवलॉक — लखनऊ 3. कर्नल नील — कानपुर 4. ह्यूरोज — झांसी और ग्वालियर उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से युग्म सही सुमेलित है/हैं? → भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नरम दल और गरम दल के वैचारिक संघर्ष तथा सूरत अधिवेशन (1907) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन में गोपाल कृष्ण गोखले की अध्यक्षता में स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन के प्रस्ताव को पूरे देश में फैलाने का औपचारिक और सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया था, जिसका गरमपंथियों ने पूर्ण समर्थन किया था। 2. वर्ष 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी के अध्यक्ष बनने के कारण कांग्रेस विभाजन टल गया, क्योंकि इस अधिवेशन में पहली बार 'स्वराज' (Self-Government) को कांग्रेस के लक्ष्य के रूप में स्वीकार किया गया तथा स्वदेशी, बहिष्कार और राष्ट्रीय शिक्षा से संबंधित प्रस्ताव पारित किए गए। 3. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस का विभाजन केवल अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर हुआ था, जबकि नरमपंथियों और गरमपंथियों के बीच बंगाल से बाहर स्वदेशी आंदोलन के विस्तार और उग्रवादी रणनीतियों को अपनाने को लेकर पूर्ण वैचारिक सहमति थी। 4. सूरत विभाजन के उपरांत ब्रिटिश सरकार ने उग्रवादी राष्ट्रवादी नेताओं का दमन करने के लिए कई कड़े कानून पारित किए, जिसके तहत बाल गंगाधर तिलक को राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर मांडले (बर्मा) की जेल में छह वर्ष के कारावास की सजा दी गई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान झांसी और ग्वालियर में रानी लक्ष्मीबाई तथा तात्या टोपे द्वारा संचालित सैन्य अभियानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मार्च 1858 में ब्रिटिश सेनापति ह्यूरोज़ द्वारा झांसी की घेराबंदी किए जाने के बाद रानी लक्ष्मीबाई ने अद्वितीय साहस का परिचय दिया और अपने दत्तक पुत्र दामोदर राव को पीठ पर बांधकर सुरक्षित रूप से कालपी की ओर प्रस्थान किया, जहाँ वे तात्या टोपे की संयुक्त सेना से जुड़ीं। 2. कालपी के युद्ध में पराजय के पश्चात रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ने ग्वालियर की ओर कूच किया, जहाँ ग्वालियर के सिंधिया शासक जयाजीराव सिंधिया ने राष्ट्रभक्ति का परिचय देते हुए अपनी पूरी सेना विद्रोहियों को सौंप दी, जिससे उनकी स्थिति अत्यधिक मजबूत हो गई। 3. ग्वालियर पर अधिकार करने के उपरांत ब्रिटिश सेनापति ह्यूरोज़ ने ग्वालियर पर पुनः आक्रमण किया, और जून 1858 में कोटा-की-सराय (Kotah-Ke-Serai) के युद्ध में अंग्रेजों से लड़ते हुए रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुईं। 4. रानी लक्ष्मीबाई की मृत्यु के पश्चात तात्या टोपे ने नेपाल की तराई में शरण ली, जहाँ एक स्थानीय जमींदार मानसिंह के विश्वासघात के कारण उन्हें अंग्रेजों द्वारा पकड़ लिया गया और अप्रैल 1859 में शिवपुरी में फांसी दे दी गई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मौर्य साम्राज्य की केंद्रीय प्रशासनिक व्यवस्था और उसके प्रांतीय विभाजन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' के अनुसार, मौर्य प्रशासन में सर्वोच्च स्तर के प्रशासनिक अधिकारी 'तीर्थ' या 'महामात्र' कहलाते थे, जिनकी कुल संख्या अट्ठारह थी और इनमें सबसे महत्वपूर्ण पद 'समाहर्त्ता' (राजस्व संग्रह) तथा 'संनिधातृ' (कोषाध्यक्ष) का था। 2. अशोक के शासनकाल में प्रांतीय प्रशासन के अंतर्गत साम्राज्य को पाँच प्रमुख प्रांतों में विभाजित किया गया था, जिनके प्रशासक के रूप में केवल शाही परिवार के राजकुमार (कुमार या आर्यपुत्र) ही नियुक्त किए जाते थे, और प्रांतीयराजधानियाँ तक्षशिला, उज्जैन, सुवर्णगिरि, तोसली और पाटलिपुत्र थीं। 3. मेगास्थनीज की 'इंडिका' के अनुसार, पाटलिपुत्र नगर का प्रशासन छह समितियों द्वारा संचालित होता था, जिनमें प्रत्येक समिति में पाँच सदस्य होते थे, और ये समितियाँ उद्योग, विदेशी यात्रियों, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, व्यापार तथा बिक्री कर संग्रहण जैसे विभिन्न कार्यों का प्रबंधन करती थीं। 4. मौर्यकालीन प्रशासनिक व्यवस्था में न्याय व्यवस्था के तहत दो प्रकार के न्यायालयों का उल्लेख मिलता है—दीवानी मामलों के लिए 'धर्मस्थीय' न्यायालय (जो मुख्य न्यायाधीश या 'धर्माध्यक्ष' द्वारा संचालित होते थे) और फौजदारी मामलों के लिए 'कंटकशोधन' न्यायालय (जहाँ पुलिस और मजिस्ट्रेट स्तर के अधिकारी न्याय करते थे)। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन और तज्जनित स्वदेशी आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बंगाल विभाजन के निर्णय की औपचारिक घोषणा 20 जुलाई 1905 को की गई थी, जिसके विरोध में 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में ऐतिहासिक बैठक आयोजित कर 'स्वदेशी आंदोलन' की औपचारिक घोषणा की गई और 'बॉयकॉट' (बहिष्कार) प्रस्ताव पारित किया गया। 2. लार्ड कर्ज़न ने बंगाल को विभाजित करने के प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए पूर्वी बंगाल और असम को मिलाकर एक नया प्रांत बनाया, जिसका प्रथम लेफ्टिनेंट-गवर्नर एंड्रू फ़्रेज़र को नियुक्त किया गया था। 3. स्वदेशी आंदोलन के दौरान बंगाल के प्रसिद्ध राष्ट्रवादी गीत 'मारार सोनार बांग्ला' को रवींद्रनाथ टैगोर ने लिखा था, जो आगे चलकर बांग्लादेश का राष्ट्रगान भी बना, और इसी आंदोलन की अवधि में कलकत्ता में 'बंगाल नेशनल कॉलेज' की स्थापना की गई जिसके प्रथम प्रधानाचार्य अरबिंदो घोष बनाए गए थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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