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History of India
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उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य और उत्तरार्ध में उभरे सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के दार्शनिक दृष्टिकोण, सांगठनिक संरचना तथा उनके सुधारवादी एजेंडे के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'आत्मीय सभा' (1815) और बाद में 'ब्रह्म समाज' ने एकेश्वरवाद का समर्थन करने के साथ-साथ मूर्तिपूजा, बहुदेववाद और पुरोहितवाद का कड़ा विरोध किया, किंतु ब्रह्म समाज के भीतर आदि ब्रह्म समाज और साधारण ब्रह्म समाज के रूप में विभाजन का मुख्य कारण केशव चंद्र सेन की अल्पवयस्क पुत्री का कूचबिहार के राजा के साथ बाल विवाह होना था।
  2. 2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और वेदों को अपौरुषेय तथा अज्ञानता से मुक्त मानते हुए मध्यकालीन पौराणिक ग्रंथों और मूर्तिपूजा को पूरी तरह से खारिज कर दिया, लेकिन समाज के भीतर शुद्धि आंदोलन का मुख्य उद्देश्य केवल गैर-भारतीयों को हिंदू धर्म में दीक्षित करना था।
  3. 3. प्रार्थना समाज की स्थापना महादेव गोविंद रानाडे, आत्माराम पांडुरंग और आर. जी. भंडारकर द्वारा बंबई में की गई थी, जिसका मुख्य ध्यान धार्मिक आडंबरों के स्थान पर सामाजिक सुधारों जैसे कि अंतरजातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह और महिला शिक्षा को बढ़ावा देने पर केंद्रित था।
  4. 4. स्वामी विवेकानंद ने वर्ष 1897 में 'रामकृष्ण मिशन' की स्थापना की, जिसका उद्देश्य केवल प्राचीन वेदांत दर्शन का प्रचार करना और संन्यासी जीवन को बढ़ावा देना था, जबकि यह संगठन ब्रिटिश काल के दौरान किसी भी प्रकार के सामाजिक कल्याण, राहत कार्यों या धर्मार्थ गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल नहीं था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि राजा राममोहन राय ने 1815 में आत्मीय सभा और 1828 में ब्रह्म समाज की स्थापना की। केशव चंद्र सेन की पुत्री का अल्पायु में कूचबिहार के राजा से विवाह होने के कारण ब्रह्म समाज में वैचारिक मतभेद उत्पन्न हुए, जिसके परिणामस्वरूप इसका विभाजन हुआ। कथन 2 गलत है क्योंकि आर्य समाज के 'शुद्धि आंदोलन' का उद्देश्य केवल विदेशी या गैर-हिंदू मूल के लोगों को ही नहीं, बल्कि उन हिंदुओं की घर-वापसी भी था जिन्हें जबरन या परिस्थितियोंवश अन्य धर्मों में परिवर्तित कर दिया गया था। विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं। कथन 3 सही है क्योंकि प्रार्थना समाज ने मुख्य रूप से पश्चिमी भारत में सामाजिक सुधारों, विधवा पुनर्विवाह और दलितोद्धार पर जोर दिया। कथन 4 गलत है क्योंकि रामकृष्ण मिशन ने वेदांत के प्रचार के साथ-साथ बड़े पैमाने पर राहत कार्य, शिक्षा प्रसार और सामाजिक कल्याण के कार्य किए थे।
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भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन के संदर्भ में 'ग़दर पार्टी' और उसके कार्यक्रमों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ग़दर पार्टी की स्थापना वर्ष 1913 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को शहर में लाला हरदयाल, सोहन सिंह भकना और कांशीराम जैसे क्रूर क्रांतिकारियों के प्रयासों से हुई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य सशस्त्र क्रांति के माध्यम से भारत से ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंकना था। 2. इस पार्टी द्वारा 'ग़दर' नामक साप्ताहिक पत्र का प्रकाशन मुख्य रूप से उर्दू और गुरुमुखी लिपि में किया जाता था, जिसके प्रत्येक अंक के पहले पृष्ठ पर 'अंग्रेज़ी राज का कच्चा चिट्ठा' शीर्षक से ब्रिटिश नीतियों की आलोचना छपती थी। 3. प्रथम विश्व युद्ध के आरंभ होने पर ग़दर पार्टी के नेताओं ने जर्मनी और बर्लिन में सक्रिय भारतीय क्रांतिकारियों (जैसे वीरेंद्रनाथ चट्टोपाध्याय) के साथ मिलकर 'बर्लिन समिति' की सहायता से ब्रिटिश सेना में कार्यरत भारतीय सैनिकों को बगावत के लिए प्रेरित करने की एक व्यापक योजना बनाई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? दिल्ली सल्तनत ने कुल कितने वर्षों तक भारत पर शासन किया? दिल्ली सल्तनत के विभिन्न राजवंशों के प्रशासनिक सुधारों, राजस्व प्रणालियों और सैन्य संगठनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अलाउद्दीन खिलजी ने सल्तनत काल में पहली बार सैनिकों को नगद वेतन देने की प्रथा की शुरुआत की, घोड़ों को दागने (दाग) और सैनिकों का हुलिया लिखने की प्रणाली लागू की, तथा दोआब क्षेत्र में भू-राजस्व बढ़ाकर उपज का आधा (50 प्रतिशत) हिस्सा कर दिया, जिसे 'खराज' कहा जाता था। 2. मुहम्मद बिन तुगलक ने अपनी राजधानी दिल्ली से देवगिरी (दौलताबाद) स्थानांतरित करने का एक प्रमुख कारण साम्राज्य के मध्य में स्थित होने के कारण प्रशासनिक नियंत्रण को सुदृढ़ करना था, किंतु खराब योजना और जल संकट के कारण यह प्रयोग असफल साबित हुआ और उसने पुनः दिल्ली को राजधानी बना दिया। 3. फिरोजशाह तुगलक ने सल्तनत काल में राजस्व प्रणाली को सरल बनाते हुए केवल कुरान द्वारा स्वीकृत चार करों—खराज, खुम्स, जकात और जिजिया—को ही वैध घोषित किया, तथा अवांछित करों को समाप्त करते हुए सिंचाई की सुविधा हेतु यमुना और सतलज नदियों से बड़ी नहरों का निर्माण करवाया और 'हक-ए-शर्ब' (सिंचाई कर) वसूला। 4. इल्तुतमिश ने सल्तनत काल को एक स्थिर प्रशासनिक ढांचा प्रदान करते हुए 'इक्ता व्यवस्था' को संस्थागत रूप दिया, 'चालीस' (चहलगानी) तुर्क सरदारों के दल का गठन किया, और शुद्ध अरबी सिक्के—चांदी का टंका और तांबे का जीतल—चलाए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? 19वीं शताब्दी के सुधार आंदोलनों के दौरान स्थापित 'प्रार्थना समाज' (Prarthana Samaj) और 'आत्मीय सभा' के वैचारिक तथा संस्थागत विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1815 में राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'आत्मीय सभा' ने एकेश्वरवाद के प्रचार और मूर्तिपूजा के विरोध का समर्थन किया, जबकि वर्ष 1867 में केशव चंद्र सेन की प्रेरणा से बंबई में स्थापित 'प्रार्थना समाज' का मुख्य उद्देश्य अंतरजातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह और दलित उत्थान जैसे सामाजिक सुधारों पर विशेष बल देना था। 2. प्रार्थना समाज के प्रमुख संस्थापक नेताओं में आत्माराम पांडुरंग, न्यायमूर्त्ति महादेव गोविंद रानाडे और आर. जी. भंडारकर शामिल थे, जिन्होंने महाराष्ट्र में धार्मिक रूढ़िवादिता के विरुद्ध बौद्धिक चेतना जगाई और 'डेक्कन एजुकेशन सोसायटी' जैसी संस्थाओं की नींव रखने में भी योगदान दिया। 3. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'ब्रह्म समाज' और प्रार्थना समाज दोनों ने ही वेदों की अभ्रान्तता (Infallibility) के सिद्धांत को पूर्णतः स्वीकार किया था और वे वेदों को सर्वोच्च एवं अंतिम धार्मिक सत्ता मानते थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? औरंगजेब का शासनकाल:
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