त्वरित लिंक्स
History of India
17 views
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में हुए संघर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिस कादिर को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व संभाला और ब्रिटिश सेना के दमन के बाद नेपाल की तराई में शरण ली।
- 2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'डंका शाह' भी कहा जाता था, ने चिनहट के युद्ध में ब्रिटिश सेना को पराजित किया था और अंग्रेजों ने उन पर पचास हजार रुपये का इनाम घोषित किया था।
- 3. मौलवी अहमदुल्लाह शाह को अंततः अवध के ही पुवायाँ के एक स्थानीय राजा के सहयोग और विश्वासघात के कारण अंग्रेजों द्वारा घेर लिया गया, जहाँ वे वीरतापूर्वक लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ अत्यंत प्रभावशाली और ओजस्वी नेतृत्व प्रदान किया था। बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिस कादिर को अवध का नवाब घोषित किया और लखनऊ रेजिडेंसी के घेराव का नेतृत्व किया। ब्रिटिश दमन के बाद उन्होंने नेपाल में शरण ली। मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'डंका शाह' के रूप में भी जाना जाता था, ने चिनहट के युद्ध में हेनरी लॉरेंस के नेतृत्व वाली ब्रिटिश सेना को करारी शिकस्त दी थी। अंग्रेजों ने उन्हें पकड़ने के लिए पचास हजार रुपये का इनाम रखा था। अंततः पुवायाँ के राजा जगन्नाथ सिंह के विश्वासघात के कारण अंग्रेजों ने उन्हें घेर लिया और वे लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। अधिक जानकारी के लिए देखें विकिपीडिया संदर्भ।
Related Questions
→
1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की भूमिका तथा उससे जुड़े घटनाक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र नाना साहब ने संभाला, जिन्होंने स्वयं को पेशवा घोषित किया और अजीमुल्ला खां को अपना मुख्य सलाहकार तथा राजनीतिक रणनीतिकार नियुक्त किया था।
2. तात्या टोपे ने कानपुर की सैन्य कमान संभालते हुए ब्रिटिश सेनापति जनरल सर ह्यूरोज की संयुक्त सेनाओं को शुरुआती मुठभेड़ों में करारी शिकस्त दी, जिसके बाद अंग्रेजों ने कानपुर पर कभी अधिकार नहीं किया।
3. सती चौरा घाट की दुखद घटना के पश्चात ब्रिटिश सेनापति कैंपबेल के नेतृत्व में कानपुर पर पुनः अधिकार कर लिया गया, जिसके बाद नाना साहब नेपाल की तराई की ओर निकल गए और उनका अंतिम जीवन रहस्यमय बना रहा।
4. अजीमुल्ला खां ने विद्रोह से पूर्व लंदन जाकर पेशवा की पेंशन बहाली के लिए पैरवी की थी और बाद में तात्या टोपे के साथ मिलकर मध्य भारत और कालपी के क्षेत्रों में अंग्रेजों के विरुद्ध सैन्य अभियानों का समन्वय किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
"दीवान-ए-अमीर कोही" का मुख्य कार्य क्या था?
→
हुमायूँनामा की लेखिका:
→
अकबर के आदेश पर रामायण और महाभारत का फारसी में अनुवाद किस नाम से किया गया?
→
वर्ष 1857 के विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां के नेतृत्व तथा उनकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नाना साहब को अंग्रेजों द्वारा उनके पिता पेशवा बाजीराव द्वितीय की पेंशन से वंचित किए जाने और ब्रिटिश सत्ता द्वारा उनके उपाधि एवं अधिकारों को अस्वीकार करने के पश्चात उन्होंने कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व संभाला तथा स्वयं को पेशवा घोषित किया।
2. अजीमुल्ला खां, जो नाना साहब के मुख्य सलाहकार और कूटनीतिक रणनीतिकार थे, ने ब्रिटिश नीतियों के विरुद्ध तुर्की और अन्य अंतरराष्ट्रीय ताकतों से संपर्क साधने का प्रयास किया था तथा कानपुर में सैन्य अभियानों के दौरान अंग्रेजों के साथ कूटनीतिक वार्ताओं में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
3. तात्या टोपे ने कानपुर में नाना साहब की सेना के सैन्य कमांडर के रूप में कार्य करते हुए ब्रिटिश जनरल सर कॉलिन कैंपबेल को निर्णायक रूप से पराजित किया और कानपुर पर स्थायी रूप से अधिकार स्थापित कर लिया, जिसे अंग्रेजों ने कभी पुनः नहीं जीता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.