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History of India
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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों के संदर्भ में, अलाउद्दीन खिलजी और मुहम्मद बिन तुगलक की नीतियों के बीच निम्नलिखित में से कौन-सा अंतर सही सुमेलित है?

Detailed Explanation

दिल्ली सल्तनत के खिलजी और तुगलक राजवंशों के दौरान प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों का विशेष महत्व रहा है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, अलाउद्दीन खिलजी ने विशाल सेना के रखरखाव के लिए बाजार नियंत्रण और मूल्य नियंत्रण नीति अपनाई थी, जबकि मुहम्मद बिन तुगलक अपने नवीन और दूरदर्शी किंतु प्रायोगिक असफल निर्णयों जैसे कि सांकेतिक मुद्रा और दोआब में कर वृद्धि के लिए जाना जाता है।
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→ कृष्णदेव राय ने संस्कृत में किस प्रसिद्ध नाटक की रचना की थी? → बंगाल विभाजन (1905) और इसके विरोध में प्रारंभ किए गए स्वदेशी एवं बहिष्कार आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बंगाल विभाजन के निर्णय की औपचारिक घोषणा 20 जुलाई 1905 को लॉर्ड कर्जन द्वारा की गई थी, तथा इसके विरोध में 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में आयोजित ऐतिहासिक बैठक में 'बहिष्कार प्रस्ताव' पारित किया गया था। 2. 16 अक्टूबर 1905 को जिस दिन बंगाल विभाजन प्रभावी हुआ, उस दिन को पूरे बंगाल में 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया, जहाँ लोगों ने उपवास रखा, गंगा स्नान किया और 'अहमद यार खान' द्वारा रचित प्रसिद्ध गीत 'आमार सोनार बांग्ला' गाते हुए सड़कों पर मार्च किया। 3. स्वदेशी आंदोलन के दौरान आर्थिक बहिष्कार के साथ-साथ रचनात्मक कार्यों पर विशेष बल दिया गया, जिसके तहत आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय ने 'बंगाल केमिकल एंड फार्मास्युटिकल वक्र्स' की स्थापना की और राष्ट्रीय शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए नवंबर 1905 में 'राष्ट्रीय शिक्षा परिषद' (National Council of Education) का गठन किया गया। 4. कांग्रेस के वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन, जिसकी अध्यक्षता गोपाल कृष्ण गोखले ने की थी, में पहली बार औपचारिक रूप से पूरे देश में स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन का विस्तार करने का प्रस्ताव पारित किया गया, यद्यपि नरमपंथियों और गरमपंथियों के बीच आंदोलन के तरीकों को लेकर मतभेद स्पष्ट होने लगे थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1858 के शुरुआती महीनों में ब्रिटिश जनरल ह्यूरोज़ (Hugh Rose) के नेतृत्व में झाँसी और ग्वालियर क्षेत्र में चलाए गए सैन्य अभियानों तथा रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे की रणनीतिक गतिविधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मार्च 1858 में ब्रिटिश सेना द्वारा झाँसी के किले की घेराबंदी किए जाने पर, रानी लक्ष्मीबाई ने अत्यंत वीरता के साथ किले की रक्षा की और तात्या टोपे द्वारा कालपी से लाई गई राहत सेना के सहयोग से अंग्रेजों को निर्णायक रूप से पराजित कर झाँसी को स्वतंत्र कराने में सफल रहीं। 2. झाँसी के पतन के उपरांत रानी लक्ष्मीबाई कालपी पहुँचीं, जहाँ उन्होंने तात्या टोपे के साथ मिलकर ग्वालियर के तत्कालीन शासक जयाजीराव सिंधिया की सेना को अपने पक्ष में मिलाया और ग्वालियर के रणनीतिक किले पर अधिकार कर लिया। 3. जनरल ह्यूरोज़ ने ग्वालियर के समीप कोटा-की-सराय के युद्ध में विद्रोही सेना को पराजित किया, जहाँ 18 जून 1858 को रानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुईं, जिन्हें ह्यूरोज़ ने स्वयं 'भारतीय विद्रोहियों में एकमात्र मर्द' कहकर संबोधित किया था। 4. ग्वालियर के पतन के बाद तात्या टोपे ने मध्य भारत के जंगलों और राजस्थान के क्षेत्रों में ब्रिटिश सेना के विरुद्ध छापामार युद्ध (Guerrilla Warfare) का सफल नेतृत्व किया, किंतु अंततः उनके एक विश्वासघाती मित्र मान सिंह के धोखे के कारण वे पकड़े गए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह की विफलता और इसके नेतृत्व की सीमाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस विद्रोह का नेतृत्व करने वाले अधिकांश पारंपरिक शासक (जैसे नाना साहब, बेगम हजरत महल और कुंवर सिंह) अपने-अपने सीमित प्रादेशिक और स्थानीय हितों से घिरे थे तथा उनके पास संपूर्ण राष्ट्र के लिए कोई सुसंगत राजनीतिक दृष्टिकोण या भविष्य का वैकल्पिक प्रशासनिक ढांचा नहीं था। 2. विद्रोहियों के पास आधुनिक हथियारों और सैन्य तकनीक की कमी तो थी ही, साथ ही एक केंद्रीय उच्च कमान (Central High Command) और एकीकृत सैन्य रणनीति का भी पूर्ण अभाव था, जिससे विभिन्न छावनियों के सैनिक बिना किसीसार्थक सामंजस्य के अपने दम पर लड़ते रहे। 3. देश के अधिकांश आधुनिक अंग्रेजी-शिक्षित मध्यम वर्ग, बड़े व्यापारियों और जमींदारों ने इस विद्रोह का खुलकर समर्थन किया क्योंकि वे ब्रिटिश शासन की आर्थिक नीतियों से पूरी तरह त्रस्त थे। 4. सिख रेजिमेंटों, गोरखा सैनिकों तथा सिंधिया, होलकर और हैदराबाद जैसी कई प्रमुख देशी रियासतों के शासकों ने ब्रिटिश सत्ता का सक्रिय रूप से साथ दिया, जिसके कारण अंग्रेजों को इस व्यापक बगावत को कुचलने में भारी सामरिक और राजनीतिक संबल प्राप्त हुआ। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मध्यकालीन भारत के इतिहास में भक्ति और सूफी आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सूफी संतों के सिलसिले मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित थे — बा-शरा (जो इस्लामिक शरिया कानून का सख्ती से पालन करते थे) और बे-शरा (जो शरिया कानून से पूरी तरह बंधे नहीं थे, जिन्हें 'कलंदर' भी कहा जाता था)। 2. भारत में चिश्ती सिलसिले की स्थापना ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती द्वारा की गई थी, और इस सिलसिले के संतों ने राज्य के संरक्षण और शाही दरबारों में उच्च पदों को स्वीकार करने की नीति को अनिवार्य माना ताकि वे राजनीतिक शक्ति के माध्यम से समाज में सुधार कर सकें। 3. भक्ति आंदोलन के महान संत रामानंद ने उत्तर भारत में भक्ति के संदेश का व्यापक प्रसार किया, और उनके शिष्यों में कबीर (जुलाहा), रैदास (मोची), सेन (नाई) तथा पीपा (राजपूत शासक) जैसे विभिन्न जातियों और पृष्ठभूमियों के लोग शामिल थे। 4. वारकरी संप्रदाय महाराष्ट्र में भक्ति आंदोलन का एक प्रमुख केंद्र था, जिसके अनुयायी भगवान विठ्ठल (विठोबा) की पूजा करते थे और इस संप्रदाय के प्रसिद्ध संतों में ज्ञानेश्वर, नामदेव तथा तुकाराम का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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