BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
3 views

वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरjis कादिर को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व संभाला और ब्रिटिश सेनाओं के विरुद्ध ब्रिटिश रेजीडेंसी की घेराबंदी में सक्रिय रूप से भाग लिया।
  2. 2. 'डंका शाह' के नाम से प्रसिद्ध मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने फैजाबाद और रोहिलखंड क्षेत्र में अंग्रेजों के विरुद्ध सशस्त्र प्रतिरोध का संचालन किया तथा चिनहट के युद्ध में ब्रिटिश सेना को पराजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  3. 3. ब्रिटिश दमन चक्र के दौरान बेगम हजरत महल ने आत्मसमर्पण कर दिया और उन्हें आजीवन कारावास के लिए अंडमान निकोबार (सेल्यूलर जेल) भेज दिया गया, जबकि अहमदुल्लाह शाह को अंग्रेजों ने लखनऊ में सार्वजनिक रूप से फाँसी पर लटका दिया।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

वर्ष 1857 के विद्रोह के दौरान अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने ब्रिटिश सत्ता को कड़ी चुनौती दी थी। बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बृजिश कादिर को नवाब घोषित कर लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व किया और अंततः पराजय के बाद नेपाल चली गईं, जहाँ उनकी मृत्यु हुई (उन्होंने आत्मसमर्पण नहीं किया था)। मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'डंका शाह' भी कहा जाता था, ने फैजाबाद और लखनऊ के चिनहट युद्ध में अंग्रेजों के छक्के छुड़ाए। ब्रिटिश सरकार ने उन पर भारी इनाम रखा था और बाद में पवरा (पवई) के राजा की गद्दारी के कारण उनकी हत्या कर दी गई थी। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Share:

Related Questions

ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों — स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी — के आर्थिक प्रभावों और उनकी प्रशासनिक विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. स्थाई बंदोबस्त (Permanent Settlement) के तहत जमींदारों को भूमि का स्थायी स्वामी मान लिया गया था, जिससे किसानों की स्थिति पट्टेदार या किराएदार बनकर रह गई और कृषि में कोई दीर्घकालिक पूंजी निवेश नहीं हुआ, जिसे 'कृषि का वाणिज्यीकरण' कहा जाता है। 2. थॉमस मुनरो द्वारा मुख्य रूप से मद्रास प्रेसीडेंसी में लागू की गई रयतवारी व्यवस्था (Ryotwari System) में ब्रिटिश सरकार और व्यक्तिगत किसानों (रयतों) के मध्य सीधा संबंध था, किंतु अत्यधिक उच्च लगान दरों और अकाल या सूखे के समय भी राजस्व की कठोर वसूली के कारण किसान भारी ऋणजाल (Debt trap) में फंस गए थे। 3. महालवारी व्यवस्था (Mahalwari System) के अंतर्गत भू-राजस्व निर्धारण और भुगतान की इकाई व्यक्तिगत किसान न होकर संपूर्ण गाँव या महलों (ग्राम समूह) होता था, जहाँ पूरा ग्रामीण समुदाय सामूहिक रूप से राजस्व अदायगी के लिए उत्तरदायी था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान दिल्ली में विद्रोहियों के नेतृत्व और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मेरठ से आए विद्रोही सिपाहियों ने 11 मई 1857 को दिल्ली पहुँचकर मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को भारत का 'शहंशाह-ए-हिंद' घोषित किया, जिससे इस असंगठित विद्रोह को एक वैध राजनीतिक और प्रतीकात्मक केंद्र मिल गया। 2. बहादुर शाह जफर व्यक्तिगत रूप से अंग्रेजों के विरुद्ध सीधे सैन्य अभियानों, युद्ध रणनीतियों और कूटनीतिक बैठकों में प्रतिदिन सक्रिय रूप से भाग लेते थे तथा उन्होंने ही दिल्ली की रक्षा के लिए सेनापति के रूप में बख्त खान की नियुक्ति की थी। 3. दिल्ली में विद्रोह की वास्तविक सैन्य प्रशासनिक व्यवस्था का संचालन 'कोर्ट ऑफ सोल्जर्स' (सैनिकों की अदालत) द्वारा किया जाता था, जिसमें विभिन्न रेजिमेंटों से आए निर्वाचित सिपाही प्रशासनिक और सैन्य निर्णय लेते थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? छत्रपति शिवाजी महाराज के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. शिवाजी ने अपने सैन्य संगठन में 'पागा' और 'सिलहदार' घुड़सवारों की व्यवस्था की थी, जिसमें पागा सैनिक राज्य द्वारा प्रदत्त घोड़ों और शस्त्रों का प्रयोग करते थे, जबकि सिलहदार सैनिक अपने स्वयं के घोड़े और शस्त्र लेकर युद्ध में भाग लेते थे। 2. शिवाजी के प्रशासन में 'अष्टप्रधान' मंडल का प्रत्येक मंत्री राजा के अधीन सीधे कार्य करता था और इनमें से अधिकांश मंत्रियों को आवश्यकता पड़ने पर सैन्य अभियानों का नेतृत्व भी करना पड़ता था, सिवाय पंडितराव और न्यायाधीश के। 3. शिवाजी की राजस्व व्यवस्था मलिक अंबर की भूमि सुधार प्रणालियों से अत्यधिक प्रभावित थी, जिसके तहत उन्होंने भूमि की पैमाइश के लिए 'काठी' और बीघा के मानक माप को अपनाया तथा उपज का 40% भाग राज्य के कर के रूप में वसूल किया, जिसे बाद में बढ़ाकर 50% कर दिया गया था। 4. शिवाजी के द्वारा दक्षिण भारत के राज्यों से वसूल किया जाने वाला 'चौथ' कर उनकी सीमा के सुरक्षा प्रदान करने के बदले कुल आय का एक-चौथाई हिस्सा होता था, जबकि 'सरदेशमुखी' आंतरिक क्षेत्रों पर उनके पारंपरिक वंशानुगत अधिकारों के दावे के रूप में 10 प्रतिशत वसूला जाता था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? दिल्ली सल्तनत का वह एकमात्र सुल्तान कौन था जो युद्ध के मैदान में मारा गया? भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के शुरुआती दौर (1885-1905) के नरमपंथी नेताओं की कार्यप्रणाली और उनके राजनीतिक दृष्टिकोण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. नरमपंथी नेता ब्रिटिश न्यायप्रियता में दृढ़ विश्वास रखते थे और उनका मानना था कि ब्रिटिश शासन भारत के हित में है, किंतु ब्रिटिश अधिकारी भारतीयों की वास्तविक स्थिति से अनभिज्ञ हैं, इसलिए प्रार्थना, याचिका और शिष्टमंडल (प्रार्थना और विरोध की राजनीति) के माध्यम से उन्हें जागरूक किया जाना चाहिए। 2. दादाभाई नौरोजी ने अपनी प्रसिद्ध 'धन की निकासी' (Drain of Wealth) के सिद्धांत के माध्यम से यह प्रमाणित किया कि ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन किस प्रकार भारत के आर्थिक संसाधनों का हनन कर रहा है, और कांग्रेस के मंच से वर्ष 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में पहली बार 'स्वराज' की मांग औपचारिक रूप से रखी गई थी। 3. नरमपंथियों का सामाजिक आधार मुख्य रूप से शिक्षित मध्यम वर्ग, वकीलों, डॉक्टरों और पत्रकारों तक सीमित था, और उन्होंने कभी भी ब्रिटिश शासन के विरुद्ध व्यापक जन-आंदोलन या सविनय अवज्ञा शुरू करने का समर्थन नहीं किया क्योंकि उन्हें डर था कि इससे अराजकता फैल सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.