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History of India
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार में वीर कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह द्वारा संचालित संघर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वीर कुंवर सिंह ने जगदीशपुर के अपने पैतृक किले से ब्रिटिश सेना के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व किया तथा दानापुर से आए सैनिकों के साथ मिलकर आरा (शाहबाद) में ब्रिटिश सेनाओं को पराजित किया, और बाद में अपने सैन्य कौशल का परिचय देते हुए गंगा नदी पार कर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों (जैसे आजमगढ़ और कानपुर) तक सफल सैन्य अभियान चलाया।
- 2. वीर कुंवर सिंह की मृत्यु के पश्चात उनके भाई अमर सिंह ने जगदीशपुर के जंगलों से अंग्रेजों के विरुद्ध गुरिल्ला (छापामार) युद्ध का सफल नेतृत्व जारी रखा और शाहबाद क्षेत्र में एक समानांतर प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित कर दी थी, जिसे कुचलने के लिए अंग्रेजों को भारी सैन्य बल का उपयोग करना पड़ा था।
- 3. अमर सिंह द्वारा संचालित इस गोरिल्ला प्रतिरोध को ब्रिटिश सरकार द्वारा पूर्णतः समाप्त करने के उपरांत उन्हें गिरफ्तार कर कलकत्ता के अलीपुर जेल में फांसी दे दी गई थी, जहाँ वर्ष 1860 में उनकी मृत्यु हो गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के जगदीशपुर में वीर कुंवर सिंह और उनके छोटे भाई अमर सिंह ने अद्वितीय नेतृत्व और सैन्य रणनीति का परिचय दिया था। वीर कुंवर सिंह ने आरा और आजमगढ़ में ब्रिटिश सेनाओं को धूल चटाई और अपनी वृद्ध आयु के बावजूद अद्भुत शौर्य का प्रदर्शन किया। उनकी मृत्यु के पश्चात उनके भाई अमर सिंह ने अंग्रेजों के विरुद्ध जंगलों से गुरिल्ला (छापामार) युद्ध जारी रखा और समानांतर सरकार चलाई। हालांकि, अमर सिंह को फांसी नहीं दी गई थी, बल्कि ब्रिटिश रिकॉर्ड के अनुसार नवंबर 1859 में आत्मसमर्पण के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था और दिसंबर 1859 में गोरखपुर जेल में पेचिश (Dysentery) जैसी बीमारी के कारण उनकी मृत्यु हो गई थी। इस प्रकार कथन 1 और 2 सही हैं, जबकि कथन 3 उनकी मृत्यु के स्थान और कारण के गलत होने के कारण असत्य है। इस ऐतिहासिक संघर्ष के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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प्राचीन भारतीय इतिहास में वर्धन राजवंश एवं दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पल्लव शासक नरसिंहवर्मन् प्रथम ने वातापी के चालुक्य नरेश पुलकेशिन द्वितीय को पराजित किया और 'वातापीकोंड' (वातापी का विजेता) की उपाधि धारण की थी।
2. बादामी के चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय की नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन पर विजय का उल्लेख प्रख्यात पुलकेशिन द्वितीय के ऐहोल अभिलेख (Aihole Inscription) में मिलता है, जिसकी रचना रवि कीर्ति ने की थी।
3. चोल राजवंश के पुनरुत्थान का श्रेय विजयालय को जाता है, जिसने तंजावुर को अपनी राजधानी बनाया और 'निशुंभसुदनी' (दुर्गा) देवी के मंदिर का निर्माण करवाया था।
4. पल्लव राजा राजसिंह (नरिंसहवर्मन् द्वितीय) ने कांची में प्रसिद्ध 'कैलासनाथ मंदिर' का निर्माण करवाया था, जो द्रविड़ वास्तुकला की प्रारंभिक शैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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बीजापुर में स्थित विश्व प्रसिद्ध "गोल गुंबद" (Gumbad) का निर्माण किसने करवाया था?
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सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) की परिपक्व अवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित नगरों और उनकी विशिष्ट पुरातात्विक विशेषताओं या अवस्थितियों पर विचार कीजिए:
1. चान्हूदड़ो (Chanhu-daro) एकमात्र ऐसा हड़प्पाकालीन स्थल था जहाँ किसी भी प्रकार का दुर्ग (Citadel) नहीं पाया गया है, और यह स्थल मनके बनाने के कारखाने (Bead-making factory) के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध था।
2. धौलावीरा (Dholavira) अपनी अनूठी त्रि-स्तरीय नगर योजना (Acropolis, Middle town, and Lower town) तथा विशाल जल प्रबंधन प्रणाली और शिलालेख वाले साइन-बोर्ड के लिए जाना जाता है, जो लूनी नदी के तट पर कच्छ के रण में स्थित है।
3. लोथल (Lothal) एक प्रमुख तटीय व्यापारिक स्थल था जहाँ पाकी ईंटों से निर्मित एक विशाल गोदीबाड़ा (Dockyard) के अवशेष मिले हैं, और यहाँ फारसी (फारस की खाड़ी) मुहरों की प्राप्ति से इसके विदेशी व्यापारिक संबंधों की पुष्टि होती है।
4. कालीबंगा (Kalibangan) में जुते हुए खेत (Ploughed field) के साक्ष्य मिले हैं, तथा इस स्थल के निचले शहर की सभी बस्तियों के घरों के दरवाजे मुख्य सड़कों की ओर खुलते थे, जो सिंधु घाटी की सामान्य जल निकासी और सुरक्षा व्यवस्था के विपरीत था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बिहार में बाबू कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह द्वारा चलाए गए सशस्त्र संघर्ष एवं सैन्य अभियानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आरा और जगदीशपुर के पतन तथा कुंवर सिंह की मृत्यु (अप्रैल 1858) के पश्चात उनके छोटे भाई अमर सिंह ने कैमूर की पहाड़ियों (रोहतास क्षेत्र) को अपना सुरक्षित अड्डा बनाया और ब्रिटिश सेना के विरुद्ध गुरिल्ला युद्ध (छापेमार युद्ध) की रणनीति का सफलतापूर्वक संचालन किया।
2. अमर सिंह द्वारा कैमूर क्षेत्र में स्थापित समानांतर सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था का संचालन 'नजीम' नामक अधिकारियों के माध्यम से किया जाता था, और उन्होंने ब्रिटिश भू-राजस्व व्यवस्था को अस्वीकार कर स्थानीय स्तर पर लगान वसूली का वैकल्पिक तंत्र विकसित किया था।
3. ब्रिटिश सेनापति मेजर विंसेंट आयर और जनरल डगलस ने संयुक्त रूप से कैमूर की पहाड़ियों में अमर सिंह के विरुद्ध निर्णायक अभियान चलाया, किंतु अमर सिंह ब्रिटिश सेना की पकड़ में कभी नहीं आए और नेपाल की तराई में अज्ञातवास के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी।
4. अमर सिंह को वर्ष 1858 के अंत में ब्रिटिश सेना द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया था, जिसके बाद उन पर आगरा में देशद्रोह और हत्या का मुकदमा चलाया गया, तथा कारावास के दौरान ही कलकत्ता (कोलकाता) के अस्पताल में बीमारी के कारण उनकी मृत्यु हो गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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बौद्ध धर्म और जैन धर्म के प्रारंभिक दार्शनिक विकास एवं संप्रदायों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जैन धर्म के श्वेतांबर संप्रदाय के अनुयायी वस्त्र धारण करते हैं और उनका यह विश्वास है कि तीर्थंकर मल्लिनाथ एक पुरुष थे, जबकि दिगंबर संप्रदाय के अनुसार मल्लिनाथ एक स्त्री थीं और इस संप्रदाय के साधु पूर्ण नग्नता का व्रत रखते हैं।
2. बौद्ध धर्म की महायान शाखा के उदय के साथ ही बोधिसत्त्वों की संकल्पना को प्रमुखता मिली, जिसमें अवलोकितेश्वर (पद्मपाणि) को सबसे लोकप्रिय बोधिसत्त्व माना गया जिनका मुख्य कार्य संसार के दुःखों को दूर करना और करुणा का प्रसार करना है।
3. जैन धर्म में 'स्यादवाद' (अनेकांतवाद या सप्तभंगी नय) का सिद्धांत वस्तु के स्वरूप को बहुआयामी और सापेक्षिक दृष्टिकोण से समझने पर बल देता है, जो बौद्ध धर्म के 'प्रतीत्यसमुत्पाद' के सिद्धांत के समान ही कर्मात्मक कारणों की व्याख्या करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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