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History of India
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सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) की आर्थिक संरचना, व्यापारिक संपर्कों और नगरीय नियोजन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. सिंधु घाटी सभ्यता के लोग लोहे से पूर्णतः परिचित थे और लोहे के बने कृषि उपकरणों का व्यापक उपयोग करके खाद्यान्न का भारी मात्रा में निर्यात करते थे।
  2. 2. मेसोपोटामिया के अभिलेखों में सिंधु क्षेत्र के लिए 'मेलुहा' (Meluhha) शब्द का प्रयोग किया गया है, और वहाँ से प्राप्त मुहरें तथा साक्ष्य यह दर्शाते हैं कि सिंधु सभ्यता के व्यापारियों का मेसोपोटामिया के साथ प्रत्यक्ष समुद्री व स्थलीय व्यापारिक संबंध था।
  3. 3. लोथल में ईंटों से बने एक विशाल संरचना को 'गोदीवाड़ा' (Dockyard) के रूप में पहचाना गया है, जो इस बात का प्रमाण है कि यह स्थल पश्चिमी एशिया के साथ समुद्री व्यापार का एक प्रमुख बंदरगाह और वाणिज्यिक केंद्र था।
  4. 4. सिंधु सभ्यता की नगर योजना 'ग्रिड पद्धति' (Grid System) पर आधारित थी, जिसमें सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं और जल निकासी के लिए ढकी हुई उन्नत नालियों की व्यवस्था थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

सिंधु घाटी सभ्यता एक कांस्य युगीन (Bronze Age) सभ्यता थी और यहाँ के लोग लोहे से पूरी तरह अपरिचित थे; उत्तर वैदिक काल में भारत में लोहे का ज्ञान हुआ। इसलिए कथन 1 गलत है। मेसोपोटामिया के साक्ष्यों में सिंधु घाटी क्षेत्र को 'मेलुहा' कहा गया है जहाँ से लापीस लाजुली, कारनेलियन और अन्य वस्तुओं का व्यापार होता था, अतः कथन 2 सही है। गुजरात स्थित लोथल में मिला कृत्रिम ईंटों का विशाल ढांचा एक गोदीवाड़ा (Dockyard) था जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार का मुख्य केंद्र था, जिससे कथन 3 भी सही है। इस सभ्यता की नगर नियोजन व्यवस्था ग्रिड पद्धति पर आधारित थी तथा जल निकासी व्यवस्था इसकी सबसे अनूठी विशेषता थी, अतः कथन 4 भी सही है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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