BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
1 views

वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन और आज़ाद हिंद फौज (INA) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान बंबई के ग्वालिया टैंक मैदान में कांग्रेस के ऐतिहासिक सत्र में 'करो या मरो' का नारा दिया गया था, और इस आंदोलन की शुरुआत से ठीक पहले ब्रिटिश सरकार ने 'ऑपरेशन ज़ीरो ऑवर' के तहत कांग्रेस के सभी शीर्ष नेताओं को रातों-रात गिरफ्तार कर अज्ञात स्थान पर भेज दिया था।
  2. 2. आज़ाद हिंद फौज का गठन सर्वप्रथम जापानी सेना द्वारा पकड़े गए भारतीय युद्धबंदियों (POWs) को लेकर कैप्टन मोहन सिंह द्वारा किया गया था, और बाद में वर्ष 1943 में सिंगापुर में सुभाष चंद्र बोस ने इस सेना की कमान अपने हाथ में लेते हुए 'आर्ज़ी हुकुमत-ए-आज़ाद हिंद' (अस्थায়ী सरकार) की स्थापना की थी।
  3. 3. आज़ाद हिंद फौज के सैनिकों पर लाल किले में चलाए गए ऐतिहासिक मुकदमों (1945-46) के दौरान अभियुक्तों की पैरवी के लिए बनाई गई मुख्य बचाव समिति में भूलाभाई देसाई, तेज बहादुर सप्रू, कैटजू और जवाहरलाल नेहरू जैसे प्रख्यात वकील शामिल थे।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 'ऑपरेशन ज़ीरो ऑवर' के तहत ब्रिटिश प्रशासन ने सभी प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया था, जिससे यह एक 'नेतृत्वहीन' (Leaderless) जन-आंदोलन बन गया था। इसी पृष्ठभूमि में सुभाष चंद्र बोस ने विदेशों में भारतीयों को संगठित कर आज़ाद हिंद फौज को पुनर्जीवित किया और सिंगापुर में 'आर्ज़ी हुकुमत-ए-आज़ाद हिंद' की स्थापना की। युद्ध के पश्चात लाल किले के मुकदमे भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का एक महत्वपूर्ण मोड़ बने। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Share:

Related Questions

1857 के महान विद्रोह के दौरान झांसी और ग्वालियर में रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे के सैन्य अभियानों तथा ब्रिटिश सेना के साथ हुए संघर्षों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मार्च 1858 में सर ह्यूरोज के नेतृत्व में ब्रिटिश सेना ने झांसी को घेर लिया, जिसके उपरांत रानी लक्ष्मीबाई अपनी सेना के साथ साहसपूर्वक मुकाबला करते हुए तात्या टोपे से सहायता प्राप्त करने में सफल रहीं, किंतु तात्या टोपे की सेना को बेतवा नदी के युद्ध में पराजय का सामना करना पड़ा। 2. झांसी के पतन के बाद रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ग्वालियर की ओर बढ़े, जहाँ उन्होंने सिंधिया राजवंश के शासक जयाजीराव सिंधिया को पराजित कर ग्वालियर के किले पर अधिकार कर लिया, जिसे ग्वालियर के पतन के बाद तात्या टोपे ने ब्रिटिश सेना को बिना शर्त सौंप दिया था। 3. ग्वालियर के पुनः अधिकार के लिए ब्रिटिश जनरल ह्यूरोज और ब्रिगेडियर स्मिथ के संयुक्त नेतृत्व में सेना भेजी गई, जहाँ जून 1858 में कोट की सराय के युद्ध में रानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुईं। 4. रानी लक्ष्मीबाई की मृत्यु के पश्चात तात्या टोपे ने पार्सन (परावैद्य) जंगलों की ओर प्रस्थान किया और मध्य भारत तथा राजस्थान के क्षेत्रों में लगभग एक वर्ष तक ब्रिटिश सेना के विरुद्ध छापामार युद्ध (Guerrilla Warfare) जारी रखा, अंततः एक स्थानीय जमींदार मानसिंह के विश्वासघात के कारण उन्हें अंग्रेजों द्वारा पकड़ लिया गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' और सुभाष चंद्र बोस द्वारा संचालित 'आजाद हिंद फौज' (INA) की गतिविधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान बंबई के गोवालिया टैंक मैदान में कांग्रेस के ऐतिहासिक प्रस्ताव के बाद महात्मा गांधी ने 'करेंगे या मरेंगे' (Do or Die) का मंत्र दिया था, तथा इस आंदोलन की एक बड़ी विशिष्टता देश के कई हिस्सों में 'समानांतर सरकारों' (Parallel Governments) का गठन था, जिसमें बलिया, ताम्रलिप्त और सतारा की सरकारें प्रमुख थीं। 2. जापान के सहयोग से पुनर्गठित इंडियन नेशनल आर्मी (INA) का सर्वोच्च नेतृत्व ग्रहण करने के पश्चात, सुभाष चंद्र बोस ने अक्टूबर 1943 में सिंगापुर में 'आर्जि हुकूमत-ए-आजाद हिंद' (स्वतंत्र भारत की अनंतिम सरकार) की स्थापना की थी, जिसे जापान सहित कुल नौ धुरी और मित्र राष्ट्र-समर्थक देशों ने आधिकारिक मान्यता प्रदान की थी। 3. सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर से सिंगापुर रेडियो के माध्यम से 6 जुलाई 1944 को प्रसारित अपने एक संबोधन में महात्मा गांधी को संबोधित करते हुए उन्हें पहली बार 'राष्ट्रपिता' (Father of the Nation) कहकर पुकारा था और भारत की पूर्ण मुक्ति के लिए उनके आशीर्वाद की कामना की थी। 4. आजाद हिंद फौज के सैनिकों पर लाल किले (Red Fort Trials) में चलाए गए बहुचर्चित मुकदमों के दौरान ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध बचाव पक्ष के वकीलों की मुख्य समिति के प्रमुख वकील भूलाभाई देसाई थे, जबकि इस ऐतिहासिक कानूनी दल में तेज बहादुर सप्रू, कैलाश नाथ काटजू और जवाहरलाल नेहरू जैसे प्रसिद्ध विधिवेत्ता भी सक्रिय रूप से शामिल थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? बौद्ध धर्म एवं जैन धर्म के दार्शनिक विकास, संगीतों और उनके ऐतिहासिक ग्रंथों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बौद्ध धर्म के शून्यवाद (माध्यमिक दर्शन) के प्रणेता आचार्य नागार्जुन थे, जिन्होंने यह प्रतिपादन किया कि सभी वस्तुएं और धर्म 'प्रतीत्यसमुत्पाद' के कारण स्वभाव से शून्य (निःस्वभाव) हैं, जबकि जैन धर्म के 'स्यादवाद' (अनेकांतवाद) के अनुसार किसी भी वस्तु के सत्य का निर्धारण सात अलग-अलग दृष्टिकोणों (सप्तभंगी नय) से किया जाता है। 2. जैन धर्म के श्वेतांबर संप्रदाय के अनुसार स्त्रियां इसी जन्म में मोक्ष (निर्वाण) प्राप्त कर सकती हैं और उनके 19वें तीर्थंकर मल्लिनाथ एक स्त्री थे, जबकि दिगंबर संप्रदाय इस तथ्य का पूर्ण खंडन करता है कि कोई स्त्री इसी जन्म में मोक्ष प्राप्त कर सकती है। 3. बौद्ध धर्म की महायान शाखा में भविष्य के बुद्ध के रूप में 'मैत्रेय' (Maitreya) की कल्पना की गई है, जो इस कल्प के अंतिम बुद्ध होंगे, तथा जैन धर्म में प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव (आदिनाथ) का स्पष्ट उल्लेख ऋग्वेद में भी प्राप्त होता है। 4. चतुर्थ बौद्ध संगीति कनिष्क के शासनकाल में कुण्डलनवन (कश्मीर) में हुई थी, जिसकी अध्यक्षता वसुमित्र ने की थी और इसी संगीति में बौद्ध धर्म स्पष्ट रूप से हीनयान और महायान संप्रदायों में विभाजित हो गया था, जिसके उपाध्यक्ष अश्वघोष थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह की विफलता और इसके नेतृत्व की सीमाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस विद्रोह का नेतृत्व करने वाले अधिकांश पारंपरिक शासक (जैसे नाना साहब, बेगम हजरत महल और कुंवर सिंह) अपने-अपने सीमित प्रादेशिक और स्थानीय हितों से घिरे थे तथा उनके पास संपूर्ण राष्ट्र के लिए कोई सुसंगत राजनीतिक दृष्टिकोण या भविष्य का वैकल्पिक प्रशासनिक ढांचा नहीं था। 2. विद्रोहियों के पास आधुनिक हथियारों और सैन्य तकनीक की कमी तो थी ही, साथ ही एक केंद्रीय उच्च कमान (Central High Command) और एकीकृत सैन्य रणनीति का भी पूर्ण अभाव था, जिससे विभिन्न छावनियों के सैनिक बिना किसीसार्थक सामंजस्य के अपने दम पर लड़ते रहे। 3. देश के अधिकांश आधुनिक अंग्रेजी-शिक्षित मध्यम वर्ग, बड़े व्यापारियों और जमींदारों ने इस विद्रोह का खुलकर समर्थन किया क्योंकि वे ब्रिटिश शासन की आर्थिक नीतियों से पूरी तरह त्रस्त थे। 4. सिख रेजिमेंटों, गोरखा सैनिकों तथा सिंधिया, होलकर और हैदराबाद जैसी कई प्रमुख देशी रियासतों के शासकों ने ब्रिटिश सत्ता का सक्रिय रूप से साथ दिया, जिसके कारण अंग्रेजों को इस व्यापक बगावत को कुचलने में भारी सामरिक और राजनीतिक संबल प्राप्त हुआ। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के विद्रोह के राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक कारणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राजनीतिक कारणों के अंतर्गत लॉर्ड डलहौजी की 'व्यपगत का सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति के तहत सतारा, नागपुर और झाँसी जैसी रियासतों का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय कर दिया गया था, तथा लॉर्ड कैनिंग द्वारा मुगल सम्राट के उपाधि और शाही परिवार के विशेषाधिकारों को समाप्त करने की घोषणा ने मुस्लिम और राजशाही वर्ग में तीव्र असंतोष फैलाया था। 2. सामाजिक और धार्मिक कारणों में ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा भारतीय समाज की रूढ़ियों (जैसे सती प्रथा और बाल विवाह) पर कानून बनाकर रोक लगाना तथा वर्ष 1850 के 'धार्मिक निर्योग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act) द्वारा ईसाई धर्म अपनाने वाले व्यक्ति को उसकी पैतृक संपत्ति से वंचित न किए जाने के प्रावधान ने पारंपरिक भारतीयों में यह भय उत्पन्न कर दिया कि अंग्रेज उनके धर्म को नष्ट करना चाहते हैं। 3. आर्थिक कारणों के अंतर्गत अंग्रेजों की पारंपरिक मुक्त व्यापार नीति और एकतरफा शुल्क व्यवस्था ने भारतीय हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों को पूरी तरह तबाह कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप पारंपरिक कारीगर और शिल्पकार कृषि पर निर्भर होने के लिए बाध्य हुए और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर अत्यधिक दबाव बढ़ गया। 4. भू-राजस्व प्रणालियों (जैसे स्थायी बंदोबस्त, रैयतवाड़ी और महालवाड़ी) के कारण किसानों और ज़मींदारों दोनों पर अत्यधिक करों का बोझ लादा गया, जिसके चलते साहूकारों और महाजनों द्वारा किसानों का भारी शोषण हुआ और अधिकांश उपजाऊ भूमि साहूकारों के नियंत्रण में चली गई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.