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History of India
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बौद्ध धर्म एवं जैन धर्म के दार्शनिक विकास, संगीतों और उनके ऐतिहासिक ग्रंथों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. बौद्ध धर्म के शून्यवाद (माध्यमिक दर्शन) के प्रणेता आचार्य नागार्जुन थे, जिन्होंने यह प्रतिपादन किया कि सभी वस्तुएं और धर्म 'प्रतीत्यसमुत्पाद' के कारण स्वभाव से शून्य (निःस्वभाव) हैं, जबकि जैन धर्म के 'स्यादवाद' (अनेकांतवाद) के अनुसार किसी भी वस्तु के सत्य का निर्धारण सात अलग-अलग दृष्टिकोणों (सप्तभंगी नय) से किया जाता है।
- 2. जैन धर्म के श्वेतांबर संप्रदाय के अनुसार स्त्रियां इसी जन्म में मोक्ष (निर्वाण) प्राप्त कर सकती हैं और उनके 19वें तीर्थंकर मल्लिनाथ एक स्त्री थे, जबकि दिगंबर संप्रदाय इस तथ्य का पूर्ण खंडन करता है कि कोई स्त्री इसी जन्म में मोक्ष प्राप्त कर सकती है।
- 3. बौद्ध धर्म की महायान शाखा में भविष्य के बुद्ध के रूप में 'मैत्रेय' (Maitreya) की कल्पना की गई है, जो इस कल्प के अंतिम बुद्ध होंगे, तथा जैन धर्म में प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव (आदिनाथ) का स्पष्ट उल्लेख ऋग्वेद में भी प्राप्त होता है।
- 4. चतुर्थ बौद्ध संगीति कनिष्क के शासनकाल में कुण्डलनवन (कश्मीर) में हुई थी, जिसकी अध्यक्षता वसुमित्र ने की थी और इसी संगीति में बौद्ध धर्म स्पष्ट रूप से हीनयान और महायान संप्रदायों में विभाजित हो गया था, जिसके उपाध्यक्ष अश्वघोष थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। आचार्य नागार्जुन द्वारा प्रतिपादित शून्यवाद माध्यमिक दर्शन की नींव है। जैन धर्म के श्वेतांबर संप्रदाय में 19वें तीर्थंकर भगवान मल्लिनाथ को स्त्री माना गया है, जबकि दिगंबर मत इसके विपरीत विचार रखता है। बौद्ध धर्म के विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, महायान परंपरा में भविष्य के बुद्ध 'मैत्रेय' की मान्यता है और चतुर्थ बौद्ध संगीति कनिष्क के काल में कुण्डलनवन में हुई थी जिसके अध्यक्ष वसुमित्र और उपाध्यक्ष अश्वघोष थे।
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गदर पार्टी के संस्थापना काल, उसके वैचारिक स्वरूप और प्रथम विश्व युद्ध के दौरान उसकी सक्रियता के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1913 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में स्थापित 'पैसिफिक कोस्ट हिंदुस्तान एसोसिएशन' (जिसे बाद में ग़दर पार्टी के रूप में प्रसिद्धि मिली) के प्रथम अध्यक्ष सोहन सिंह भकना थे, जबकि लाला हरदयाल इसके मुख्य प्रेरणास्त्रोत और महासचिव थे।
2. ग़दर पार्टी द्वारा प्रकाशित साप्ताहिक पत्र 'ग़दर' का मुखपृष्ठ हर अंक में 'अंग्रेज़ी राज का कच्चा चिट्ठा' शीर्षक के साथ छपता था, जिसका मुख्य उद्देश्य प्रवासी भारतीयों में ब्रिटिश साम्राज्य के आर्थिक शोषण और दमनकारी नीतियों के प्रति राजनीतिक चेतना जगाना था।
3. प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ग़दर क्रांतिकारियों ने 'जुगांतर आश्रम' से अपनी योजना को क्रियान्वित करते हुए केवल अमेरिका तक ही खुद को सीमित रखा और ब्रिटिश सेना के भारतीय सैनिकों के बीच विद्रोह कराने या भारत लौटने से पूरी तरह परहेज किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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मौर्योत्तर काल एवं गुप्त साम्राज्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गुप्त काल में भूमि अनुदान (Land Grants) की प्रथा में व्यापक वृद्धि हुई, जिसके परिणामस्वरूप 'अग्रहार' और 'ब्रह्मदेय' जैसी कर-मुक्त भूमि ब्राह्मणों और धार्मिक संस्थानों को दी जाने लगी, और इस काल में 'अपहत' वह भूमि थी जो जंगली या कृषि योग्य नहीं थी।
2. फाह्यान (FaHien) के विवरण के अनुसार, चंद्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य के शासनकाल में भारत में बौद्ध धर्म का अत्यधिक पतन हो चुका था और पाटलिपुत्र के बौद्ध विहार पूरी तरह से खंडहर में बदल चुके थे, तथा चांडालों को नगर के बाहर रहना पड़ता था।
3. गुप्त साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में प्रांतीय प्रशासन 'भुक्ति' कहलाता था, जिसके प्रमुख को 'उपर्तिक' कहा जाता था, जबकि जिला प्रशासन 'विषय' के अधीन था और विषय का प्रमुख 'विषयपति' कहलाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में, ब्रह्म समाज, आर्य समाज और सत्यशोधक समाज की स्थापना, उनके वैचारिक सिद्धांतों तथा सामाजिक सुधार एजेंडे के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा 1828 में स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद, पुरोहितवाद और सती प्रथा जैसी कुप्रथाओं का कड़ा विरोध करते हुए एकेश्वरवाद और उपनिषदों के तार्किक दर्शन पर बल दिया, किंतु यह संगठन वेदों की अचूकता या infallibility में विश्वास नहीं रखता था।
2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' (Back to the Vedas) का नारा दिया और वेदों को अपौरुषेय तथा ज्ञान का एकमात्र स्रोत मानते हुए मूर्तिपूजा, अवतारवाद, बाल विवाह और जाति व्यवस्था की जन्मगत कठोरताओं को खारिज किया, साथ ही शुद्धि आंदोलन के माध्यम से धर्मांतरित हिंदुओं की वापसी का मार्ग प्रशस्त किया।
3. ज्योतिराव फुले द्वारा 1873 में स्थापित 'सत्यशोधक समाज' ने ब्राह्मणवादी वर्चस्व, धार्मिक पाखंड और सामाजिक असमानता को चुनौती दी, तथा शूद्रों एवं अति-शूद्रों (दलितों) के अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए पारंपरिक धार्मिक कर्मकांडों के बिना विवाह संस्कारों (सत्यशोधक विवाह) का संचालन किया।
4. प्रार्थना समाज (जो केशव चंद्र सेन की प्रेरणा से बंबई में स्थापित हुआ था) और ब्रह्म समाज दोनों ने ही रूढ़िवादी हिंदू समाज के पुनरुत्थान और वेदों के पूर्ण अधिकार को स्वीकार करते हुए पश्चिमी आधुनिक शिक्षा और ईसाई मिशनरियों की गतिविधियों का पूर्ण रूप से बहिष्कार किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और बंगाल में ब्रिटिश सत्ता की स्थापना के प्रारंभिक चरण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1717 में मुगल सम्राट फर्रुखसियर द्वारा जारी फरमान के तहत ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल में ₹3,000 वार्षिक कर के बदले बिना किसी अतिरिक्त चुंगी के व्यापार करने का विशेष अधिकार (दस्तक) प्राप्त हुआ, जिसे कंपनी के अधिकारियों ने अपने निजी व्यापार पर भी दुरुपयोग करना शुरू कर दिया था।
2. बंगाल के नवाब अलीवर्दी खान ने यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों की तुलना 'मधुमक्खियों' से करते हुए कहा था कि यदि उन्हें छेड़ा न जाए तो वे शहद देंगी और यदि छेड़ा जाए तो वे काटकर मार डालेंगी।
3. वर्ष 1757 के प्लासी के युद्ध में सिराजुद्दोला की पराजय का मुख्य कारण मीर जाफर, यार लतीफ और राय दुर्लभ जैसे सैन्य कमांडरों की गद्दारी थी, जिसके फलस्वरूप अंग्रेजों ने मीर जाफर को बंगाल का नया नवाब बनाया और इस युद्ध के बाद ही भारत में ब्रिटिश राजनीतिक प्रभुत्व की वास्तविक नींव पड़ी।
4. ब्लैक होल त्रासदी (काल कोठरी की घटना) के तुरंत बाद रॉबर्ट क्लाइव और वाटसन ने नवाब सिराजुद्दोला के साथ 'अलीनगर की संधि' पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत अंग्रेजों को कलकत्ता की किलेबंदी करने, अपने सिक्के ढालने और युद्ध की क्षतिपूर्ति प्राप्त करने का अधिकार मिल गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मराठा साम्राज्य के प्रशासन, राजस्व सुधारों और छत्रपति शिवाजी महाराज की सैन्य व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिवाजी ने राजस्व सुधारों के तहत मलिक अंबर की भू-राजस्व प्रणाली के आधार पर भूमि की पैमाइश करवाई और राज्य अधिकारियों को जागीर देने की प्रथा को हतोत्साहित करते हुए उन्हें नकद वेतन देने की नीति अपनाई।
2. 'चौथ' और 'सरदेशमुखी' मराठा साम्राज्य के आंतरिक क्षेत्रों से वसूले जाने वाले मुख्य कर थे, जबकि बाहरी क्षेत्रों से सुरक्षा प्रदान करने के एवज में कोई कर नहीं लिया जाता था।
3. शिवाजी की केंद्रीय मंत्रिपरिषद 'अष्टप्रधान' के अंतर्गत प्रत्येक मंत्री प्रशासनिक और सैन्य मामलों में सीधे राजा के प्रति उत्तरदायी होता था, तथा 'अत्याधिक विशेष' रूप से 'पंडितराव' और 'न्यायाधीश' धार्मिक और न्याय संबंधी कार्य देखते थे।
4. शिवाजी की नौसेना (Navy) का गठन मुख्य रूप से पश्चिमी तट पर कोंकण क्षेत्र की रक्षा और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए किया गया था, तथा कोलाबा और विजयदुर्ग जैसे स्थानों पर मजबूत नौसैनिक अड्डे स्थापित किए गए थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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