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History of India
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मुगलकालीन वास्तुकला और चित्रकला के विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. हुमायूं के मकबरे का निर्माण उसकी विधवा बेगम हाजी बेगम (बेगा बेगम) की देखरेख में फारसी वास्तुकार मिर्जा घियास द्वारा करवाया गया था, जिसमें पहली बार बड़े पैमाने पर सफेद संगमरमर के दोहरे गुंबद (Double Dome) का भारतीय वास्तुकला में सफलतापूर्वक प्रयोग किया गया था।
- 2. जहांगीर के शासनकाल में मुगल चित्रकला अपने स्वर्ण युग में पहुँची, जहाँ उसने छविचित्र (Portraiture) और प्राकृतिक दृश्यों (Flora and Fauna) के चित्रण को विशेष प्रोत्साहन दिया, तथा उस्ताद मंसूर को पक्षियों और फूलों के यथार्थवादी चित्रण के लिए 'नादिर-उल-असर' की उपाधि प्रदान की थी।
- 3. शाहजहां के काल में वास्तुकला में संगमरमर का प्रयोग और 'पित्रा दुरा' (Pietra Dura) यानी संगमरमर पर बहुमूल्य रत्नों की जड़ाई कला अपने चरम पर पहुँची, किंतु औरंगजेब ने संगीत, चित्रकला और दरबार में झरोखा दर्शन जैसी प्रथाओं को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया, जिससे शाही दरबार के कलाकारों ने प्रांतीय रियासतों और राजपूत राजाओं के यहाँ शरण ली।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए तीनों कथन पूर्णतः सत्य हैं। हुमायूं का मकबरा मुगल वास्तुकला का एक मील का पत्थर है, जिसमें चारबाग शैली और दोहरे गुंबद का पहली बार भव्य प्रयोग हुआ था। जहांगीर का काल मुगल चित्रकला का स्वर्ण युग माना जाता है जहाँ उस्ताद मंसूर और अबुल हसन जैसे महान चित्रकार थे। शाहजहां के काल को स्थापत्य कला का स्वर्ण युग कहा जाता है जिसमें पित्रा दुरा शैली का व्यापक विकास हुआ। औरंगजेब की रूढ़िवादी नीतियों के कारण कला को राजकीय संरक्षण मिलना बंद हो गया। इस ऐतिहासिक कालखंड के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930-34), प्रथम व द्वितीय गोलमेज सम्मेलन तथा गांधी-इरविन समझौते के ऐतिहासिक घटनाक्रम के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कांग्रेस के कराची अधिवेशन (1931) में गांधी-इरविन समझौते को औपचारिक रूप से अनुमोदित किया गया तथा इसी अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरू द्वारा तैयार किए गए 'मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम' प्रस्ताव को स्वीकार किया गया।
2. वर्ष 1931 में आयोजित द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में महात्मा गांधी ने भाग लिया, और इसी सम्मेलन में ब्रिटिश प्रधानमंत्री रामसे मैकडोनाल्ड ने 'कम्युनल अवार्ड' (सांप्रदायिक पंचाट) की घोषणा की, जिसके तहत दलितों के लिए पृथक निर्वाचन मंडल का प्रावधान किया गया था।
3. लार्ड इरविन और महात्मा गांधी के मध्य संपन्न हुए 'गांधी-इरविन समझौते' के तहत सरकार ने सभी राजनीतिक बंदियों (हिंसा के आरोपियों को छोड़कर) को रिहा करने और समुद्र तट के किनारे बसे लोगों को बिना कर के नमक बनाने की अनुमति देने पर सहमति व्यक्त की थी।
4. सविनय अवज्ञा आंदोलन के दूसरे चरण के दौरान ब्रिटिश सरकार द्वारा 'दमनकारी अध्यादेशों' के माध्यम से कांग्रेस को गैर-कानूनी घोषित कर दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप जनवरी 1932 में महात्मा गांधी की पुनः गिरफ्तारी के साथ आंदोलन ने अपनी तीव्रता खो दी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पानीपत के युद्ध में भाग जाने वाले मराठा सरदार, जिन्होंने बाद में मराठा शक्ति को फिर से जीवित किया?
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सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) की नगर योजना, अर्थव्यवस्था और व्यापारिक संपर्कों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हड़प्पा सभ्यता की जल निकासी प्रणाली (Drainage System) अपनी उन्नत इंजीनियरिंग के लिए जानी जाती है, जहाँ लगभग प्रत्येक घर में स्नानघर और शौचालय होते थे, तथा नालियों को ढंकने के लिए पकी हुई ईंटों और चूने-जिप्सम के मिश्रण का प्रयोग किया जाता था।
2. लोथल और चान्हूदरो दोनों ही स्थल सिंधु सभ्यता के प्रमुख शिल्प उत्पादन (Craft Production) केंद्र थे, जहाँ मनके बनाने (Bead-making), शंख की कटाई और धातु-शिल्प से जुड़े कारखानों के स्पष्ट पुरातात्विक साक्ष्य मिले हैं।
3. सिंधु घाटी सभ्यता के मुहरों (Seals) पर सबसे अधिक उत्कीर्ण की जाने वाली आकृति 'एकसृंगी पशु' (Unicorn) की है, तथा इन मुहरों का मुख्य उपयोग व्यापारिक वस्तुओं के बंडलों की पहचान और लंबी दूरी के समुद्री व स्थलीय व्यापार में उनके नियंत्रण के लिए किया जाता था।
4. मेसोपोटामिया के सुमेरियन अभिलेखों में सिंधु क्षेत्र के लिए 'मेलुहा' (Meluhha) शब्द का प्रयोग किया गया है, और वहाँ से प्राप्त साक्ष्यों से यह स्पष्ट होता है कि मेलुहा के साथ होने वाले व्यापार में जहाजों और नाविकों के लिए 'मक्कन' (Makkan) को मुख्य मध्यवर्ती बंदरगाह के रूप में उपयोग किया जाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में बौद्ध धर्म और जैन धर्म के दार्शनिक और संस्थागत विकास के निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बौद्ध धर्म के प्रथम उपदेश (धर्मचक्रप्रवर्तन) के समय संघ की स्थापना सारनाथ में हुई थी, जबकि जैन धर्म में तीर्थंकर महावीर द्वारा जैन संघ की स्थापना पावापुरी में अपने अंतिम समय में की गई थी, जिसके प्रथम प्रमुख (थेर) सुधर्मन बने थे।
2. बौद्ध संघ की सदस्यता के लिए न्यूनतम आयु सीमा 15 वर्ष निर्धारित की गई थी, जबकि जैन संघ में प्रवेश के लिए ऐसा कोई आयु प्रतिबंध नहीं था और चातुर्यम धर्म (जो पार्श्वनाथ द्वारा दिया गया था) में महावीर ने 'ब्रह्मचर्य' को जोड़कर इसे पंचमहाव्रत बना दिया था।
3. बौद्ध धर्म के विपरीत जैन धर्म ने 'सद्वाद' (अनेकांतवाद या सप्तभंगीनय) के सिद्धांत को प्रतिपादित किया, जिसके अनुसार किसी भी वस्तु के सत्य का पूर्ण ज्ञान केवल केवलियों को ही हो सकता है, क्योंकि साधारण मनुष्य का ज्ञान सापेक्ष होता है।
4. बौद्ध संगीति और जैन संगीति दोनों के संदर्भ में, द्वितीय बौद्ध संगीति का आयोजन वैशाली में कालाशोक के शासनकाल में हुआ था, जबकि प्रथम जैन संगीति पाटलिपुत्र में स्थूलभद्र की अध्यक्षता में हुई थी, जिसमें जैन ग्रंथों का संकलन कर '12 अंगों' का निर्माण किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मनसबदारी में "मश़रूत" (Mashrut) पद का क्या अर्थ था?
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