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History of India
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सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) की परिपक्व अवस्था के नगर-विन्यास, अर्थव्यवस्था और शिल्प उत्पादन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. हड़प्पाकालीन अधिकांश नगरों में 'ग्रिड प्रणाली' (Grid System) पर आधारित नगर नियोजन दिखाई देता है, जहाँ सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं, और सामान्यतः मकानों के दरवाजे मुख्य सड़क की ओर न खुलकर पीछे की गलियों में खुलते थे।
  2. 2. लोथल और चान्हूदो जैसे स्थलों से मनके बनाने के कारखाने (Bead-making factories) के साक्ष्य मिले हैं, जहाँ कार्नेलियन, जैस्पर, शंख और स्टीलाइट जैसे पत्थरों और सामग्रियों का उपयोग करके आभूषणों का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाता था।
  3. 3. सिंधु घाटी सभ्यता के स्थलों से लोहे के कृषि उपकरण जैसे फाल (Ploughshare) और हथियार बड़े पैमाने पर प्राप्त हुए हैं, जिससे यह सिद्ध होता है कि इस सभ्यता के लोग लोहे की धातुकर्म तकनीक से भली-भांति परिचित थे।
  4. 4. कालीबंगा से जुते हुए खेत का साक्ष्य (Ploughed field evidence) मिला है, जिसमें दो अलग-अलग फसलें (संभवतः चना और सरसों) एक साथ उगाने के प्रमाण मिलते हैं, और यहाँ की प्राक्कैथी (Pre-Harappan) स्तर पर भी बस्ती के अवशेष पाए गए हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

सिंधु घाटी सभ्यता एक कांस्य युगीन (Bronze Age) सभ्यता थी, जिसके लोग तांबे और टिन को मिलाकर कांसा बनाते थे, किंतु वे लोहे से पूरी तरह अपरिचित थे। इसलिए कथन 3 असत्य है क्योंकि इस सभ्यता में लोहे का कोई अस्तित्व नहीं था (लोहे का आगमन भारत में उत्तर वैदिक काल के लगभग 1000 ईसा पूर्व में हुआ)। शेष कथन 1, 2 और 4 पूर्णतः सत्य हैं। हड़प्पा सभ्यता के नगर ग्रिड पद्धति पर बसे थे, लोथल और चान्हूदो मनके बनाने के प्रमुख केंद्र थे, तथा कालीबंगा से जुते हुए खेत के साक्ष्य मिले हैं। इस महान सभ्यता के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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1857 के महान विद्रोह के तात्कालिक कारण और बैरकपुर छावनी की घटना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जनवरी 1857 में बंगाल सेना में पुरानी ब्राउन बेस मस्कट बंदूक के स्थान पर नई 'एनफील्ड राइफल' (Enfield Rifle) को शामिल किया गया था, जिसके कारतूस में गाय और सुअर की चर्बी होने की अफवाह ने भारतीय सैनिकों में भारी असंतोष पैदा कर दिया था। 2. बैरकपुर छावनी (34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के आदेश के विरुद्ध खुलकर बगावत कर दी और ब्रिटिश अधिकारियों लेफ्टिनेंट बाग और सर्जेंट ह्यूसन पर आक्रमण कर उन्हें मार डाला था। 3. मंगल पांडे को बैरकपुर में विद्रोह करने के तत्कालिक परिणाम स्वरूप 8 अप्रैल 1857 को ही सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई थी, जिससे यह घटना 1857 के विद्रोह की चिंगारी बन गई। 4. इस घटना के तुरंत बाद मेरठ छावनी में 10 मई 1857 को 3rd लाइट कैवेलरी के सैनिकों ने चर्बी वाले कारतूसों को छूने से इंकार कर दिया और अपने साथियों को मुक्त कराने के लिए खुलेआम विद्रोह कर दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान पटना, दानापुर और आरा के अतिरिक्त बिहार के अन्य प्रमुख क्षेत्रों में हुई घटनाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मुजफ्फरपुर में विद्रोह की चिंगारी भड़काने में स्थानीय जमींदारों के साथ-साथ सरकारी कार्यालयों में कार्यरत भारतीय कर्मचारियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका थी, तथा वहाँ तैनात 38वीं रेजिमेंट के सैनिकों ने ब्रिटिश अधिकारियों के विरुद्ध खुला विद्रोह कर दिया था। 2. छपरा (सारण) क्षेत्र में विद्रोह का नेतृत्व मोहम्मद हुसैन खान ने किया था, जिन्होंने स्थानीय विद्रोही सिपाहियों और आम जनता को संगठित कर ब्रिटिश प्रशासन की रीढ़ तोड़ दी थी और अंग्रेजों के संचार तंत्र को पूरी तरह से ठप कर दिया था। 3. आरा के समीपवर्ती क्षेत्रों में बाबू कुंवर सिंह के छोटे भाई अमर सिंह ने अंग्रेजों के विरुद्ध छपाए-मार (Guerrilla) युद्ध की रणनीति का सफल संचालन किया था, और अंग्रेजों द्वारा नियंत्रण स्थापित किए जाने के बाद भी उन्होंने जंगलों से लंबे समय तक प्रतिरोध जारी रखा था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? मुगल काल में "साहिबे तौजी" (Sahib-e-Tawji) का पद किससे संबंधित था? मुगल काल में "कारखाना" (Karkhana) क्या था? मौर्योत्तर काल और गुप्त साम्राज्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मौर्योत्तर काल में सातवाहन राजवंश ने शीशा (Lead), प्रोटीन, तांबा और चांदी के संकर धातुओं (Potin) से बने सिक्के बड़े पैमाने पर जारी किए, तथा उनकी आधिकारिक प्राकृत भाषा और ब्राह्मी लिपि में सातवाहन राजवंश के अभिलेख प्राप्त होते हैं। 2. गुप्त सम्राट चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) के शासनकाल में चीनी बौद्ध यात्री फाह्यान भारत आया था, जिसने अपने यात्रा वृत्तांत 'फो-क्यो-की' में मध्य देश (गंगा घाटी) की समृद्धि, शांति, और दंड-विधान की कठोरता का विशेष रूप से उल्लेख किया है, जहाँ मृत्युदंड का प्रावधान था। 3. गुप्त काल के दौरान वाकाटक राजवंश के साथ वैवाहिक संबंध स्थापित करने के प्रभाव से चंद्रगुप्त द्वितीय ने पश्चिमी भारत के शक क्षत्रपों को पराजित कर 'शकारि' की उपाधि धारण की और इस विजय के उपलक्ष्य में पश्चिमी भारत में चांदी के सिक्कों का प्रचलन शुरू किया। 4. गुप्तकालीन वास्तुकला और मूर्तिकला के अंतर्गत देवगढ़ का दशावतार मंदिर (उत्तर प्रदेश) भारत के शुरुआती ईंटों और प्रस्तर निर्मित मंदिरों में से एक है, जिसमें भगवान विष्णु के शेषशायि रूप और नरसिंह अवतार का सुंदर अंकन मिलता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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