BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
1 views

भारत छोड़ो आंदोलन (1942) के दौरान भूमिगत प्रतिरोध (Underground Resistance) और सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित 'आज़ाद हिंद फौज' (INA) की गतिविधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान बॉम्बे में गुप्त रूप से 'कांग्रेस रेडियो' का प्रसारण करने वाली उषा मेहता थीं, जबकि समाजवादी नेता अच्युत पटवर्धन, राम मनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण (जिन्हें हजारीबाग सेंट्रल जेल से भागने का श्रेय है) ने भूमिगत रहकर आंदोलन का नेतृत्व किया था।
  2. 2. सिंगापुर में 1943 में रास बिहारी बोस से आजाद हिंद फौज (INA) की कमान अपने हाथ में लेने के बाद सुभाष चंद्र बोस ने 'अस्थाई भारतीय सरकार' (Arzi Hukumat-e-Hind) की स्थापना की थी, जिसे धुरी राष्ट्रों (Axis Powers) द्वारा मान्यता प्रदान की गई थी।
  3. 3. जापानी सेना के सहयोग से INA की एक टुकड़ी ने मार्च 1944 में भारतीय मुख्य भूमि पर आक्रमण किया और नागालैंड के कोहिमा तथा मणिपुर के मोइरंग में भारतीय स्वतंत्रता का तिरंगा झंडा फहराया था।
  4. 4. आजाद हिंद फौज के सैनिकों पर ब्रिटिश सरकार द्वारा दिल्ली के लाल किले में ऐतिहासिक मुकदमे चलाए गए, जिनका बचाव करने के लिए कांग्रेस द्वारा गठित भूulabhai Desai के नेतृत्व वाले बचाव पक्ष दल में जवाहरलाल नेहरू, तेज बहादुर सप्रू और कात्जू शामिल थे।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

भारत छोड़ो आंदोलन (1942) के दौरान कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की गिरफ्तारी के बाद आंदोलन की बागडोर युवा और समाजवादी नेताओं ने संभाली। उषा मेहता ने बॉम्बे से गुप्त 'कांग्रेस रेडियो' का संचालन किया, जबकि जयप्रकाश नारायण और राम मनोहर लोहिया ने भूमिगत गतिविधियों का नेतृत्व किया। सिंगापुर में सुभाष चंद्र बोस ने 'आर्ज़ी हुकूमत-ए-हिन्द' की स्थापना की। INA ने मार्च 1944 में मोइरंग (मणिपुर) में तिरंगा फहराया। युद्ध के पश्चात लाल किले के मुकदमों में INA के कैदियों का बचाव भूलाभाई देसाई, जवाहरलाल नेहरू और तेज बहादुर सप्रू जैसे वकीलों ने किया था। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
Share:

Related Questions

फतेहपुर सीकरी का निर्माण किसने करवाया? दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अलाउद्दीन खिलजी ने अपनी सैन्य आवश्यकता को पूरा करने के लिए सैनिकों को नकद वेतन देने की प्रथा शुरू की और घोड़ों को दागने तथा सैनिकों के हुलिया दर्ज करने की प्रणाली को सख्ती से लागू किया, साथ ही मूल्य नियंत्रण (Market Control) के लिए 'दीवान-ए-रियासत' और 'शहना-ए-मंडी' जैसे अधिकारियों की नियुक्ति की। 2. मुहम्मद बिन तुगलक ने कृषि सुधारों के लिए 'दीवान-ए-कोही' नामक एक नए कृषि विभाग की स्थापना की, किंतु दोआब क्षेत्र में कर वृद्धि और उसकी तुगलककालीन राजधानी परिवर्तन तथा सांकेतिक मुद्रा (Token Currency) के प्रयोग के गलत समय पर क्रियान्वयन के कारण उसकी योजनाएं विफल हो गईं। 3. फिरोजशाह तुगलक ने सल्तनत काल में राजस्व प्रणाली को सरल बनाने के लिए 24 प्रकार के कष्टप्रद करों (अवाब) को समाप्त कर दिया और केवल शरीयत द्वारा स्वीकृत चार करों—खराज, जकात, जिजिया और खुम्स—को ही वैध रखा, साथ ही सिंचाई की सुविधा के लिए यमुना और सतलुज नदियों से कई नहरों का निर्माण करवाया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना (1885) से लेकर सूरत विभाजन (1907) तक के कालखंड में नरम दल और गरम दल के वैचारिक संघर्ष, रणनीतियों और उद्देश्यों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. नरमपंथियों (Moderate Phase) की प्रमुख राजनीतिक कार्यप्रणाली '3P' (Prayer, Petition and Protest - प्रार्थना, याचिका और विरोध) पर आधारित थी, तथा वे ब्रिटिश शासन को भारत के लिए वरदान मानते हुए औपनिवेशिक स्वराज्य (Colonial Self-Government) की मांग ब्रिटिश न्यायप्रियता के दायरे में रहकर करते थे। 2. वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन के पश्चात गरम दल के नेताओं (लाल-बाल-पाल और अरविंद घोष) ने स्वदेशी, बहिष्कार, राष्ट्रीय शिक्षा और 'स्वराज' (पूर्ण स्वशासन) के प्रस्तावों को केवल बंगाल तक सीमित रखने का समर्थन किया ताकि राष्ट्रव्यापी दमन से बचा जा सके। 3. वर्ष 1906 के कलकत्ता (कोलकाता) अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में कांग्रेस ने पहली बार 'स्वराज' शब्द को अपने राजनीतिक लक्ष्य के रूप में स्वीकार किया, किंतु गरम दल और नरम दल के बीच वैचारिक मतभेदों के कारण यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित नहीं हो सका था। 4. सूरत के 1907 के वार्षिक अधिवेशन में कांग्रेस के अध्यक्ष पद के निर्वाचन को लेकर हुए विवाद के पश्चात कांग्रेस का विभाजन हो गया, जिसमें गरम दल के नेता रास बिहारी घोष को कांग्रेस का नया अध्यक्ष बनाया गया जबकि नरमपंथियों ने बाल गंगाधर तिलक को इस पद के लिए प्रस्तावित किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और ब्रिटिश सत्ता की प्रारंभिक स्थापना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को वर्ष 1600 में ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ प्रथम द्वारा एक शाही चार्टर प्रदान किया गया था, जिसके तहत उसे पूर्वी देशों के साथ व्यापार करने का एकाधिकार अनिश्चित काल के लिए बिना किसी अवधि सीमा के दे दिया गया था। 2. वर्ष 1615 में किंग जेम्स प्रथम के राजदूत के रूप में सर थॉमस रो भारत आया था, जिसने मुगल सम्राट जहांगीर के दरबार से सूरत और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अंग्रेजों को फैक्ट्रियां स्थापित करने और व्यापारिक रियायतें प्राप्त करने के लिए शाही फरमान हासिल किया था। 3. बंगाल में ब्रिटिश सत्ता की सुदृढ़ नींव रखने वाले सुअवसर के रूप में, वर्ष 1717 में मुगल सम्राट फर्रुख्शियर द्वारा जारी एक ऐतिहासिक फरमान के तहत अंग्रेजों को बंगाल में 3000 रुपये वार्षिक कर के एवज में बिना सीमा शुल्क के व्यापार करने की स्वतंत्र अनुमति मिल गई थी, जिसे इतिहासकार ओरम ने 'कंपनी का मैग्नाकार्टा' कहा था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे के सैन्य अभियानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मार्च 1858 में ब्रिटिश सेनापति ह्यूरोज द्वारा झाँसी के घेरा डालने पर, रानी लक्ष्मीबाई ने अत्यधिक वीरतापूर्वक शहर की रक्षा की और अंततः तात्या टोपे की सहायता से कालपी की ओर प्रस्थान किया जहाँ दोनों की संयुक्त सेना ने अंग्रेजों का मुकाबला किया। 2. कालपी में पराजय के पश्चात रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ने ग्वालियर की ओर प्रस्थान किया और वहाँ के सिंधिया शासक जयाजीराव सिंधिया को अपनी ओर मिलाते हुए ग्वालियर के दुर्ग पर अधिकार कर लिया। 3. ग्वालियर के पतन के उपरांत रानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुईं, जबकि तात्या टोपे नेपाल की पहाड़ियों में सुरक्षित निकल गए जहाँ उन्हें कभी पकड़ा नहीं जा सका। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.