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History of India
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सिंधु घाटी सभ्यता की धार्मिक मान्यताओं, मातृदेवी की पूजा, मुहरों पर अंकित आकृतियों और पशु-पूजा के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. सिंधु घाटी सभ्यता के स्थलों से प्राप्त मुहरों पर सबसे अधिक संख्या में एकसिंगी पशु (Unicorn) का अंकन मिलता है, इसके अतिरिक्त कूबड़ वाले सांड, बाघ, गैंडा और हाथी के चित्र भी प्रचुर मात्रा में पाए गए हैं, लेकिन इस सभ्यता में कहीं भी गाय का अंकन मुहरों पर प्रमुखता से नहीं मिलता है।
  2. 2. मोहनजोदड़ो से प्राप्त एक प्रसिद्ध मुहर पर योग मुद्रा में बैठे एक त्रिमूर्ति या त्रिमुख देवता का चित्र है, जिसके चारों ओर हाथी, बाघ, गैंडा और भैंसा विराजमान हैं तथा पैरों के पास दो हिरण बैठे हैं, जिन्हें जॉन मार्शल ने 'पशुपति महादेव' की संज्ञा दी थी।
  3. 3. सैंधव धर्म में मातृदेवी (Mother Goddess) की मृण्मूर्तियों की बहुलता से यह प्रमाणित होता है कि यह समाज पूर्ण रूप से मातृसत्तात्मक था, जहाँ पुरुषों की तुलना में महिलाओं की स्थिति सर्वोच्च और राजनीतिक रूप से निर्णायक थी।
  4. 4. इस सभ्यता के लोग प्रकृति पूजक थे और वृक्षों (विशेषकर पीपल और बबूल) तथा नाग पूजा में विश्वास रखते थे, साथ ही लोथल और कालीबंगा जैसे स्थलों से अग्निकुंड या वेदियों के साक्ष्य मिलने से यह संकेत मिलता है कि वे अग्नि और यज्ञीय अनुष्ठानों से भी परिचित थे।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 4 सही हैं। सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) की मुहरों पर एकसिंगी पशु (Unicorn) का अंकन सबसे अधिक बार हुआ है, और कूबड़ वाला सांड भी अत्यंत महत्वपूर्ण था, जबकि मुहरों पर गाय का चित्र नहीं मिलता है। मोहनजोदड़ो से प्राप्त पशुपतिनाथ की मुहर ऐतिहासिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। किंतु कथन 3 गलत है; यद्यपि मातृदेवी की मूर्तियों की अधिकता से समाज में मातृ-प्रधान परिवार या माताओं के सम्मान का संकेत मिलता है, परंतु इसे पूर्ण और रूढ़िबद्ध 'मातृसत्तात्मक समाज' कहना और राजनीतिक सर्वोच्चता का दावा करना इतिहासकारों द्वारा पूरी तरह सिद्ध नहीं माना गया है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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