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History of India
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19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में भारतीय समाज-सुधार आंदोलनों और उनके प्रणेताओं के वैचारिक दृष्टिकोण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. स्वामी विवेकानंद ने 1897 में 'रामकृष्ण मिशन' की स्थापना की, जिसका मुख्य उद्देश्य केवल धार्मिक मुक्ति प्राप्त करना था और इसने भौतिक उन्नति या सामाजिक कल्याण के कार्यों को पूर्णतः त्याग दिया था।
- 2. ज्योतिराव फुले द्वारा स्थापित 'सत्यशोधक समाज' ने ब्राह्मणवादी वर्चस्व, पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों और पुरोहिती व्यवस्था का विरोध करते हुए शूद्रों तथा अति-शूद्रों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।
- 3. गोपाल गणेश आगरकर ने 'सुधारक' नामक समाचार पत्र के माध्यम से अंधविश्वास, बाल विवाह और सामाजिक रूढ़ियों की कड़ी आलोचना की तथा सामाजिक सुधार को राजनीतिक स्वतंत्रता से अधिक प्राथमिकता दी।
- 4. एनी बेसेंट ने थियोसोफिकल सोसायटी के माध्यम से प्राचीन हिंदू धर्म और उसकी दार्शनिक परंपराओं का समर्थन करते हुए भारतीय पुनरुत्थान में योगदान दिया, किंतु उन्होंने जाति व्यवस्था और बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं का पुरजोर समर्थन किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि स्वामी विवेकानंद द्वारा स्थापित रामकृष्ण मिशन का उद्देश्य केवल पारमार्थिक मुक्ति ही नहीं, बल्कि 'नरों में नारायण की सेवा' के सिद्धांत पर आधारित मानवतावादी और समाज-कल्याणकारी कार्य भी था। कथन 2 सही है, ज्योतिराव फुले ने 1873 में 'सत्यशोधक समाज' की स्थापना की थी जिसका उद्देश्य शोषित जातियों को ब्राह्मणवादी वर्चस्व से मुक्त कराना था। कथन 3 सही है, गोपाल गणेश आगरकर ने 'सुधारक' पत्र के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार किया और राजनीतिक सुधारों से पहले सामाजिक सुधार को आवश्यक माना। कथन 4 गलत है, क्योंकि एनी बेसेंट ने प्राचीन भारतीय संस्कृति का समर्थन अवश्य किया, परंतु उन्होंने जाति व्यवस्था और बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं का कभी समर्थन नहीं किया। इस काल के सुधार आंदोलनों के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल तथा मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व करते हुए बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिस कादिर को अवध का नवाब घोषित किया और ब्रिटिश सेना के विरुद्ध सशस्त्र प्रतिरोध का संचालन किया।
2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'फैजाबाद के लाइटहाउस' के रूप में भी जाना जाता है, ने अंग्रेजों के विरुद्ध जिहाद का आह्वान किया और चिनहट के युद्ध में ब्रिटिश सेना को पराजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
3. बेगम हजरत महल ने ब्रिटिश सेना की दमनकारी नीतियों के आगे कभी आत्मसमर्पण नहीं किया और अंततः नेपाल जाकर शरण ली, जहाँ उनकी मृत्यु हुई।
4. मौलवी अहमदुल्लाह शाह की गतिविधियों से भयभीत होकर ब्रिटिश प्रशासन ने उनके ऊपर पचास हजार रुपये का भारी इनाम घोषित किया था, और अंततः पुव्वयाँ के राजा के विश्वासघात के कारण उनकी हत्या कर दी गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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विजयनगर के सोने के सिक्कों को क्या कहा जाता था?
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वैदिक साहित्य और उसके रचनाकाल के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. आरण्यक: ये ऐसे ग्रंथ हैं जो जंगलों में पढ़े जाने के लिए रचे गए थे और इनमें दार्शनिक तथा रहस्यवादी विषयों का प्रतिपादन किया गया है।
2. उपनिषद: इन्हें 'वेदांत' भी कहा जाता है, क्योंकि ये वैदिक साहित्य के अंतिम भाग हैं और इनमें मुख्य रूप से यज्ञीय कर्मकांडों का विस्तृत वर्णन मिलता है।
3. वेदांग: इनकी कुल संख्या छह है (शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छंद और ज्योतिष), जिन्हें वेदों के अर्थ को समझने और उनके सही उच्चारण के लिए सहायक अंगों के रूप में विकसित किया गया था।
4. ब्राह्मण ग्रंथ: ये गद्य में रचे गए वेदों के वे भाग हैं जो संहिताओं के कर्मकांडीय प्रयोग, यज्ञों की विधियों और उनके अनुष्ठानों की व्याख्या करते हैं।
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और खेड़ा सत्याग्रह (1918) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चंपारण में यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर 'तीनकठिया' प्रणाली थोपी गई थी, जिसके तहत किसानों को अपनी भूमि के प्रत्येक बीघे के तीन-बीसवें हिस्से (3/20 भाग) पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करनी पड़ती थी।
2. चंपारण सत्याग्रह के दौरान ही महात्मा गांधी ने पहली बार भारत में 'भूख हड़ताल' (Hunger Strike) का अस्त्र के रूप में प्रयोग किया था, जबकि अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन (1918) उनका पहला सविनय अवज्ञा प्रयोग था।
3. खेड़ा सत्याग्रह के दौरान फसलें नष्ट हो जाने के बाद भी जब ब्रिटिश प्रशासन ने राजस्व वसूली माफ नहीं की, तो गांधीजी ने किसानों को लगान न चुकाने का आह्वान किया, और इसी आंदोलन के दौरान सरदार वल्लभभाई पटेल गांधीजी के मुख्य सहयोगियों के रूप में उभरे।
4. चंपारण जाँच समिति (Champaranya Agrarian Enquiry Committee) के एक सदस्य के रूप में महात्मा गांधी ने स्वयं बागान मालिकों द्वारा किसानों से अवैध रूप से वसूले गए धन का 50 प्रतिशत हिस्सा वापस दिलाने का सफल समझौता कराया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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