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History of India
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विजयनगर के सोने के सिक्कों को क्या कहा जाता था?
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Detailed Explanation
विजयनगर के सोने के सिक्कों को वराह या पैगोडा कहा जाता था।
Related Questions
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मराठा साम्राज्य के प्रशासन, राजस्व व्यवस्था और अष्टप्रधान के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिवाजी की प्रशासनिक व्यवस्था में 'अष्टप्रधान' के अंतर्गत प्रत्येक मंत्री प्रशासनिक और सैन्य मामलों में सीधे राजा के प्रति उत्तरदायी होता था, किंतु ये पद वंशानुगत नहीं थे और आवश्यकता पड़ने पर अधिकांश मंत्रियों को सैन्य अभियानों का नेतृत्व भी करना पड़ता था।
2. 'चौथ' मराठा साम्राज्य के स्वराज्य (प्रत्यक्ष नियंत्रण वाले क्षेत्र) से वसूला जाने वाला मुख्य भू-राजस्व कर था, जबकि 'सरदेशमुखी' उस बाहरी क्षेत्र से वसूला जाता था जहाँ मराठों का प्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं था बल्कि वे उसकी सुरक्षा का आश्वासन देते थे।
3. शिवाजी की राजस्व प्रणाली काफी हद तक मलिक अंबर की दक्कनी राजस्व व्यवस्था पर आधारित थी, जिसके तहत भूमि की पैमाइश करवाकर राज्य का हिस्सा कुल उपज का लगभग 40 प्रतिशत निर्धारित किया गया था।
4. शिवाजी की केंद्रीय मंत्रिपरिषद में 'पंडितराव' और 'न्यायाधीश' धार्मिक और न्यायिक मामलों के सर्वोच्च अधिकारी थे, और इन दोनों पदों को छोड़कर अन्य सभी छह मंत्रियों को अपने प्रशासनिक दायित्वों के साथ-साथ युद्ध के समय सेना का नेतृत्व करना अनिवार्य होता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में स्थापित धार्मिक एवं सामाजिक सुधार संगठनों तथा उनके संस्थापकों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. सत्यशोधक समाज - ज्योतिराव फुले
2. देव समाज - शिवनारायण अग्निहोत्री
3. सेवा सदन - पंडिता रमाबाई
4. भारत सेवक समाज (Servants of India Society) - गोपाल कृष्ण गोखले
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश संसद द्वारा पारित 'भारत सरकार अधिनियम 1858' और 1 नवंबर 1858 को इलाहाबाद दरबार में लॉर्ड कैनिंग द्वारा पढ़ी गई 'क्वीन विक्टोरिया की घोषणा' के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम द्वारा 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' की दोहरी शासन प्रणाली को समाप्त कर दिया गया तथा भारत के प्रशासन का पूर्ण नियंत्रण 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) को सौंप दिया गया, जिसकी सहायता के लिए 15 सदस्यीय 'भारतीय परिषद' (India Council) का गठन किया गया।
2. क्वीन विक्टोरिया की घोषणा में ब्रिटिश सरकार द्वारा यह स्पष्ट प्रतिज्ञा की गई कि भविष्य में भारत में किसी भी नए भू-भाग का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय (Annexation) नहीं किया जाएगा तथा भारतीय रियासतों को 'दत्तक पुत्र' लेने के अधिकार (राज्यरोहण और उत्तराधिकार) को आधिकारिक रूप से मान्यता दी गई।
3. घोषणा में यह भी आश्वासन दिया गया कि ब्रिटिश सरकार भारतीय प्रजा की प्राचीन धार्मिक, सामाजिक परंपराओं और रीति-रिवाजों में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी, तथा नस्ल, जाति या धर्म के भेदभाव के बिना योग्यता के आधार पर सभी भारतीयों को उच्च प्रशासनिक सेवाओं में निष्पक्ष रूप से नियुक्त किया जाएगा।
4. विद्रोह की पुनरावृत्ति को रोकने और सेना पर पूर्ण यूरोपीय नियंत्रण स्थापित करने के लिए 'पील आयोग' (Peel Commission) की सिफारिशों पर सेना का पुनर्गठन किया गया, जिसके तहत तोपखाने जैसे संवेदनशील और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण विभागों पर पूरी तरह से यूरोपीय सैनिकों का एकाधिकार रखा गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मौर्योत्तर काल तथा गुप्त साम्राज्य के दौरान व्यापार, शहरीकरण और आर्थिक संरचना में आए परिवर्तनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मौर्योत्तर काल में रोमन साम्राज्य के साथ होने वाले अत्यधिक लाभदायक समुद्री व्यापार के कारण भारत में बड़ी संख्या में रोमन सोने के सिक्के (दीनार/औरियन) आए, किंतु तीसरी शताब्दी ईस्वी के पश्चात रोमन व्यापार के पतन के कारण उत्तर भारत में नगरीय केंद्रों (Urban Centers) का ह्रास होने लगा।
2. गुप्त काल में कुषाण काल की तुलना में सोने के सिक्कों की संख्या तो सर्वाधिक मिलती है, किंतु गुप्त शासकों के उत्तरवर्ती काल में इन सिक्कों में सोने की शुद्धता (Purity) में निरंतर गिरावट आई और तांबे व चांदी के सिक्कों का अनुपात कम हो गया, जो गुप्त अर्थव्यवस्था के संकट का प्रमाण है।
3. गुप्तकाल में प्रशासनिक और धार्मिक अनुदानों (ब्रह्मदेय और अग्रहार) के रूप में भूमि दिए जाने की प्रथा ने सामंती व्यवस्था (Feudalism) की नींव को मजबूत किया, जिसके परिणामस्वरूप स्थानीय स्तर पर मुद्रा का चलन कम हुआ और ग्रामीण आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिला।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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दिल्ली में 1857 के विद्रोह के नेतृत्व, प्रशासनिक संरचना और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मेरठ के सैनिकों द्वारा 11 मई 1857 को दिल्ली पहुँचने के बाद, अनिच्छुक मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को विद्रोहियों द्वारा 'शहंशाह-ए-हिंदुस्तान' घोषित किया गया, जिससे इस सिपाही विद्रोह को एक अखिल भारतीय वैधानिकता प्राप्त हुई।
2. सम्राट बहादुर शाह जफर की वृद्धावस्था और राजनीतिक अक्षमता के कारण वास्तविक सैन्य शक्ति और निर्णय लेने का अधिकार 'कोर्ट ऑफ सोल्जर्स' (सैनिकों की परिषद) के पास था, जिसका नेतृत्व बरेली से आए जनरल बख्त खान ने किया था।
3. दिल्ली में विद्रोह के दमन के दौरान ब्रिटिश सेनापति जॉन निकलसन मारा गया, किंतु अंततः हडसन के नेतृत्व में अंग्रेजों ने सितंबर 1857 में दिल्ली पर पुनः अधिकार कर लिया और बहादुर शाह जफर को हुमायूं के मकबरे से गिरफ्तार कर रंगून निर्वासित कर दिया।
4. दिल्ली पर पुनः अधिकार करने के पश्चात ब्रिटिश सेना ने केवल सैन्य विद्रोहियों और उनके नेताओं को ही दंडित किया, जबकि नगर के सामान्य नागरिकों, व्यापारियों और मुगल शाही परिवार के अन्य सदस्यों को पूर्ण आम माफी (Amnesty) दे दी गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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