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History of India
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सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930-34), गोलमेज सम्मेलनों और गांधी-इरविन समझौते के ऐतिहासिक घटनाक्रम के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन (1929) में पूर्ण स्वराज्य का प्रस्ताव पारित होने के पश्चात महात्मा गांधी ने 31 जनवरी 1930 को वायसराय लॉर्ड इरविन के समक्ष अपनी प्रसिद्ध '11 सूत्री मांगें' रखीं, जिनमें नमक कर की समाप्ति, लग्जूरियस विदेशी कपड़ों पर भारी शुल्क और राजनीतिक बंदियों की रिहाई प्रमुख थीं।
- 2. दांडी मार्च (12 मार्च 1930 से 6 अप्रैल 1930) के उपरांत सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत हुई, जिसके दौरान उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत में खान अब्दुल गफ्फार खान के नेतृत्व में 'खुदाई खिदमतगार' (लाल कुर्ती दल) संगठन ने इस आंदोलन को अहिंसक तरीके से आगे बढ़ाया।
- 3. प्रथम गोलमेज सम्मेलन (नवंबर 1930 - जनवरी 1931) में कांग्रेस ने आधिकारिक रूप से भाग लिया था, जिसके परिणामस्वरुप महात्मा गांधी और लॉर्ड इरविन के बीच 5 मार्च 1931 को एक समझौता हुआ, जिसे 'दिल्ली समझौता' या गांधी-इरविन पैक्ट कहा गया।
- 4. कराची कांग्रेस अधिवेशन (मार्च 1931) में गांधी-इरविन समझौते का अनुमोदन किया गया और इसी अधिवेशन में पहली बार कांग्रेस ने 'मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम' से संबंधित प्रस्ताव को स्वीकार किया, जिसकी अध्यक्षता सरदार वल्लभभाई पटेल ने की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
इस प्रश्न का सही उत्तर विकल्प (a) है। कथन 1, 2 और 4 सही हैं, जबकि कथन 3 असत्य है क्योंकि कांग्रेस ने 1930 में हुए *प्रथम गोलमेज सम्मेलन* में भाग नहीं लिया था। कांग्रेस की ओर से केवल 1931 के *द्वितीय गोलमेज सम्मेलन* में महात्मा गांधी ने एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया था। सविनय अवज्ञा आंदोलन और इससे जुड़े ऐतिहासिक समझौतों के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक विकास, सैन्य सुधारों और राजस्व प्रणालियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अलाउद्दीन खिलजी ने सल्तनत काल में पहली बार सैनिकों की नगद वेतन देने की प्रथा शुरू की तथा भ्रष्टाचार रोकने के लिए 'दाग' (घोड़ों को दागना) और 'चेहरा' (सैनिकों का हुलिया दर्ज करना) प्रणाली को सख्ती से लागू किया।
2. मुहम्मद बिन तुगलक ने कृषि के विकास के लिए 'दीवान-ए-कोही' नामक नए विभाग की स्थापना की और दोआब क्षेत्र में कर वृद्धि के साथ-साथ 'सौंदल' (तक्क़वी ऋण) के रूप में किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान की।
3. फ़िरोज़ शाह तुगलक ने सल्तनत काल में सभी प्रकार के कष्टदायक करों को समाप्त कर केवल शरीयत के अनुसार चार कर (खराज, जकात, जजिया और खम्स) रखे, तथा इक्ता प्रथा को पूरी तरह से वंशानुगत बना दिया।
4. लोदी वंश के संस्थापक बहलोल लोदी ने अपने अफगान सरदारों को संतुष्ट करने और उनकी श्रेष्ठता स्वीकार करने के लिए 'मंसूर' की नीति अपनाई, जिसके अंतर्गत वह दरबार में सरदारों के साथ सिंहासन पर बैठता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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1857 के महान विद्रोह के स्वरूप और प्रकृति के संबंध में विभिन्न इतिहासकारों और विचारकों द्वारा दिए गए कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. "यह तथाकथित प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम न तो प्रथम था, न ही राष्ट्रीय था और न ही स्वतंत्रता संग्राम था।" — आर.सी. मजूमदार
2. "यह भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम था।" — विनायक दामोदर सावरकर
3. "यह धर्मांधों का ईसाइयों के विरुद्ध एक धर्मयुद्ध (Religious War) था।" — टी.आर. होम्स
4. "यह राष्ट्रीय विद्रोह था, जो सिपाही विद्रोह के रूप में शुरू हुआ और स्वतंत्रता संग्राम के रूप में समाप्त हुआ।" — बेंजामिन डिजरायली
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों जैसे पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा में हुए घटनाक्रमों और उनके नेतृत्वकर्ताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए ऐतिहासिक विद्रोह का नेतृत्व पुस्तक विक्रेता पीर अली खां ने किया था, जिन्हें कमिश्नर विलियम टेलर के कड़े आदेश पर अफीम की कोठी के पास सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई थी।
2. दानापुर छावनी के 7वीं, 8वीं और 40वीं रेजीमेंट के भारतीय सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार कर शाहाबाद (आरा) की ओर प्रस्थान किया, जहाँ उन्होंने बाबू कुंवर सिंह के नेतृत्व को स्वीकार किया।
3. मुजफ्फरपुर और छपरा (सारण) में भी स्थानीय सैनिकों तथा जनता ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ बगावत का झंडा उठाया था, किंतु छपरा में कमिश्नर विलियम टेलर के कुशल नेतृत्व और त्वरित सैन्य कार्रवाई के कारण इस विद्रोह को तुरंत कुचल दिया गया और वहाँ कोई सशक्त दीर्घकालिक नेतृत्व नहीं उभर सका।
4. बाबू कुंवर सिंह के नेतृत्व में आरा (जगदीशपुर) में हुए विद्रोह का प्रभाव केवल शाहाबाद जिले तक ही सीमित रहा, और इसकी गूंज दानापुर या पटना के अन्य क्षेत्रों तक बिल्कुल नहीं पहुँची थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में ब्रिटिश सेना द्वारा विद्रोह के दमन और नियुक्त सैन्य अधिकारियों/कमांडरों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. दिल्ली - जॉन निकलसन और हडसन
2. लखनऊ - सर कॉलिन कैंपबेल और हेनरी लॉरेंस
3. झांसी और ग्वालियर - सर ह्यूरोज़
4. बनारस और इलाहाबाद - कर्नल नील
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
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1857 के महान विद्रोह की असफलता और उसकी कमियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विद्रोह का प्रसार संपूर्ण भारत में एक साथ और एक ही समय पर नहीं हुआ था, बल्कि यह मुख्य रूप से उत्तर और मध्य भारत तक ही सीमित रहा, जबकि दक्षिण भारत और पंजाब के अधिकांश भाग इस आंदोलन से तटस्थ या अप्रभावित रहे।
2. विद्रोही सैनिकों और विभिन्न क्षेत्रीय नेताओं के पास आधुनिक हथियारों, युद्ध सामग्री, कुशल सैन्य संगठन और एक केंद्रीय समन्वित राजनीतिक नेतृत्व का पूर्ण अभाव था, जिसके कारण वे ब्रिटिश साम्राज्य की अनुशासित और सुसज्जित सेना का दीर्घकालिक मुकाबला नहीं कर सके।
3. भारत के अधिकांश बड़े जमींदारों, साहूकारों, आधुनिक शिक्षा प्राप्त मध्यम वर्ग और विभिन्न रियासतों के शासकों (जैसे हैदराबाद, सिंधिया और नेपाल) ने विद्रोहियों का समर्थन करने के बजाय ब्रिटिश सत्ता का सक्रिय सहयोग किया, जिससे विद्रोह को कुचलना अंग्रेजों के लिए आसान हो गया।
4. विद्रोहियों के पास ब्रिटिश शासन के स्थान पर एक स्पष्ट वैकल्पिक राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था का कोई सुसंगत विजन या खाका नहीं था, और वे केवल पुरानी सामंतवादी व्यवस्था को बहाल करने तक ही सीमित रहे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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