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History of India
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भारत छोड़ो आंदोलन (1942) और सुभाष चंद्र बोस से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वर्ष 1942 में बंबई के अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सत्र में 'भारत छोड़ो' प्रस्ताव पारित होने के बाद, ब्रिटिश सरकार ने 'ऑपरेशन जीरो आवर' के तहत कांग्रेस के सभी शीर्ष नेताओं को गिरफ्तार कर लिया, जिसके परिणामस्वरूप यह आंदोलन नेतृत्वहीन होने के बावजूद देश के कई हिस्सों में समानांतर सरकारों की स्थापना में सफल रहा।
- 2. सुभाष चंद्र बोस ने जनवरी 1941 में अपने ऐतिहासिक पलायन ('ग्रेट एस्केप') के उपरांत बर्लिन पहुँचकर 'फ्री इंडिया सेंटर' की स्थापना की और वहीं से 'आजाद हिंद रेडियो' पर प्रसारण के दौरान महात्मा गांधी को संबोधित करते हुए उन्हें सर्वप्रथम 'राष्ट्रपिता' (Father of the Nation) कहकर पुकारा।
- 3. वर्ष 1943 में सिंगापुर में रास बिहारी बोस ने 'इंडियन इंडिपेंडेंस लीग' और 'आजाद हिंद फौज' (INA) की संपूर्ण बागडोर औपचारिक रूप से सुभाष चंद्र बोस को सौंप दी, जिसके बाद अक्टूबर 1943 में सिंगापुर में ही 'अस्थाई आज़ाद हिंद सरकार' की स्थापना की गई।
- 4. आज़ाद हिंद फौज (INA) के अंतर्गत गठित महिला रेजिमेंट 'झांसी की रानी रेजिमेंट' का नेतृत्व कैप्टन लक्ष्मी सहगल द्वारा किया गया था, तथा INA के अन्य ब्रिगेडों के नाम गांधी, नेहरू, मौलाना आजाद और खुद सुभाष के नाम पर रखे गए थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 'ऑपरेशन जीरो आवर' के तहत नेताओं की गिरफ्तारी के बाद बलिया, ताम्रलि और सतारा में समानांतर सरकारें बनीं। सुभाष चंद्र बोस ने बर्लिन से 'आजाद हिंद रेडियो' के माध्यम से 6 जुलाई 1944 को गांधीजी को 'राष्ट्रपिता' कहकर संबोधित किया था। 1943 में सिंगापुर में रास बिहारी बोस ने INA की कमान सुभाष चंद्र बोस को सौंपी और 'Arzi Hukumat-e-Azad Hind' बनी। साथ ही, झांसी की रानी रेजिमेंट का नेतृत्व कैप्टन लक्ष्मी सहगल ने किया था। इस ऐतिहासिक घटनाक्रम के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ पढ़ सकते हैं।
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महात्मा गांधी के भारत आगमन और उनके शुरुआती सत्याग्रहों—चंपारण (1917) और खेड़ा (1918)—के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटने के पश्चात महात्मा गांधी ने वर्ष 1915 में अहमदाबाद के कोचरब क्षेत्र में अपने 'सत्याग्रह आश्रम' की स्थापना की थी, तथा गोपाल कृष्ण गोखले की सलाह पर उन्होंने देश की राजनीतिक और सामाजिक वास्तविकताओं को समझने के लिए पूरे एक वर्ष तक देश का भ्रमण किया था।
2. वर्ष 1917 के चंपारण सत्याग्रह के दौरान राजकुमार शुक्ल के निमंत्रण पर गांधीजी बिहार गए थे, जहाँ उन्होंने यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर थोपी गई क्रूर 'तीनकठिया पद्धति' (जिसके तहत किसानों को अपनी कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर नील की खेती करना अनिवार्य था) के विरुद्ध सफल सत्याग्रह किया था।
3. वर्ष 1918 के खेड़ा सत्याग्रह में गांधीजी ने फसल खराब होने के बावजूद ब्रिटिश प्रशासन द्वारा लगान पूरी तरह वसूलने के दमनकारी निर्णय के विरुद्ध किसानों का नेतृत्व किया, और इस आंदोलन के दौरान सरदार वल्लभभाई पटेल व इंदुलाल याग्निक जैसे युवा नेताओं ने गांधीजी का सक्रिय रूप से साथ दिया था।
4. खेड़ा सत्याग्रह के दौरान ही ब्रिटिश सरकार ने अंततः एक गुप्त आदेश जारी कर यह स्वीकार किया था कि लगान केवल उन्हीं किसानों से वसूला जाए जो स्वेच्छा से भुगतान करने में समर्थ हैं, और यहीं पर गांधीजी ने पहली बार अपने संपूर्ण राजनीतिक जीवन में 'असहयोग' (Non-Cooperation) के अस्त्र का औपचारिक प्रयोग किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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महाजनपद काल और मगध साम्राज्य के उत्कर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बौद्ध ग्रंथ 'अंगुत्तर निकाय' और जैन ग्रंथ 'भगवती सूत्र' में षोडश महाजनपदों की सूची मिलती है, जिसमें वज्जी और मल्ल संघ राजतंत्रात्मक शासन प्रणालियों के उदाहरण थे।
2. मगध के उत्कर्ष में उसकी भौगोलिक स्थिति ने निर्णायक भूमिका निभाई; उसकी पहली राजधानी राजगृह पाँच पहाड़ियों से घिरी थी, जबकि बाद में पाटलिपुत्र को गंगा, सोन और गंडक नदियों के संगम पर सामरिक महत्व के कारण राजधानी बनाया गया।
3. हर्यक वंश के शासक बिम्बिसार ने अपने साम्राज्य के विस्तार के लिए वैवाहिक संबंधों की नीति अपनाई, जिसके तहत उसने कौशल, मल्ल और वज्जी राजवंशों की राजकुमारियों के साथ विवाह कर मगध की स्थिति को सुदृढ़ किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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मराठा साम्राज्य के प्रशासन और छत्रपति शिवाजी महाराज की सैन्य एवं राजस्व प्रणालियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिवाजी की केंद्रीय मंत्रिपरिषद 'अष्टप्रधान' के सभी मंत्री पूर्णतः सैन्य प्रकृति के होते थे और उन्हें अपने अधीन सैन्य टुकड़ियों का प्रत्यक्ष नेतृत्व करना अनिवार्य था, तथा इनके पद वंशानुगत (hereditary) होते थे।
2. 'चौथ' कर पड़ोसी मुगल अथवा अन्य क्षेत्रों से राज्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने (बदले में आक्रमण न करने) के एवज में वसूला जाने वाला 25 प्रतिशत भू-राजस्व था, जबकि 'सरदेशमुखी' संपूर्ण राज्य पर राजा के वंशानुगत अधिकारों के दावे के रूप में वसूला जाने वाला 10 प्रतिशत अतिरिक्त कर था।
3. शिवाजी ने अपनी सेना में जागीरदारी प्रथा को हतोत्साहित करने के लिए सैनिकों और अधिकारियों को भूमि अनुदान (इनाम/जागीर) देने के स्थान पर नकद वेतन देने की परंपरा को अधिक प्राथमिकता दी थी।
4. मराठा घुड़सवार सेना में 'पागा' वे सैनिक थे जो अपने स्वयं के घोड़े और शस्त्र लेकर युद्ध में भाग लेते थे, जबकि 'सिलहदार' वे सैनिक होते थे जिन्हें राज्य द्वारा घोड़े और शस्त्र प्रदान किए जाते थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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सिंधु घाटी सभ्यता की अर्थव्यवस्था, व्यापार, मुहरों और शिल्प कला के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हड़प्पा सभ्यता के लोग आंतरिक और बाह्य व्यापार दोनों में कुशल थे, और मेसोपोटामिया के अभिलेखों में सिंधु क्षेत्र के लिए 'मेलुहा' (Meluhha) शब्द का प्रयोग किया गया है, तथा यहाँ से मूँगे, लापीस लाजुली और तांबे का आयात किया जाता था।
2. सिंधु सभ्यता की अधिकांश मुहरें (Seals) सेलखड़ी (Steatite) से बनाई जाती थीं, जिन पर एकसंगी पशु (Unicorn), कूबड़ वाला बैल, बाघ और हाथी जैसे जानवरों का उत्कृष्ट अंकन मिलता है, किंतु इन मुहरों पर किसी भी मुहर पर घोड़े या गाय का चित्रांकन नहीं मिलता है।
3. लोथल और चान्हूड़ो सिंधु सभ्यता के प्रमुख शिल्प उत्पादन केंद्र (Craft Production Centres) थे, जहाँ से मनके (Beads), सीप की वस्तुएँ और मुहर निर्माण के कारखाने तथा विशेष रूप से चान्हूड़ो से मनके बनाने का कारखाना एवं वक्राकार ईंटों के साक्ष्य मिले हैं।
4. सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों द्वारा बाह्य व्यापार के लिए लोथल के अतिरिक्त सूतकांगेडोर, बालाकोट और अल्लादीनो जैसे तटीय बंदरगाहों का उपयोग किया जाता था, जो फारसी खाड़ी और पश्चिमी एशिया के साथ समुद्री मार्ग से व्यापार का प्रमुख साधन थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में विद्रोह के दमन और नेतृत्व के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैजाबाद में विद्रोह का नेतृत्व मौलवी अहमदुल्लाह शाह द्वारा किया गया था, जिन्हें 'फैजाबाद का डंका शाह' भी कहा जाता था, और इस क्षेत्र में विद्रोह का दमन करने वाले ब्रिटिश सेनापति कर्नल कैंपबेल थे।
2. बरेली में रोहिल्ला सेना के अंतिम शासक के वंशज खान बहादुर खान ने विद्रोह का प्रभावी नेतृत्व किया था, तथा बरेली पर पुनः नियंत्रण स्थापित करने के लिए ब्रिटिश सेना का नेतृत्व सर कॉलिन कैंपबेल ने किया था।
3. इलाहाबाद में मौलवी लियाकत अली ने विद्रोह की कमान संभाली थी, जहाँ उन्होंने स्थानीय जनता को संगठित किया, किंतु शीघ्र ही जनरल नील ने अत्यधिक क्रूरता के साथ इस विद्रोह का पूर्ण दमन कर दिया।
4. मौलवी अहमदुल्लाह शाह पर अंग्रेजों द्वारा 50,000 रुपये का इनाम घोषित किया गया था, और अंततः पुवयाँ के राजा के विश्वासघात के कारण उनकी हत्या कर दी गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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