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History of India
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वर्ष 1857 के विद्रोह के स्वरूप, कारणों और उसके मूल्यांकन के संबंध में विभिन्न इतिहासकारों और विचारकों के प्रसिद्ध कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
- 1. "यह तथाकथित प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम न तो प्रथम था, न ही राष्ट्रीय था और न ही स्वतंत्रता संग्राम था।" – डॉ. आर.सी. मजूमदार
- 2. "यह सुनियोजित राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम था, जो ब्रिटिश साम्राज्यवादी नीतियों के विरुद्ध एक राष्ट्रीय जन-विद्रोह के रूप में प्रकट हुआ था।" – वी.डी. सावरकर
- 3. "यह केवल एक सिपाही विद्रोह था, जो ब्रिटिश राज के प्रति दुर्भावना और चर्बी वाले कारतूसों की अफवाहों के कारण उत्पन्न हुआ था।" – सर जॉन सीले
- 4. "यह धर्म का युद्ध था, जिसमें असंतुष्ट बर्बर और प्रतिक्रियावादी तत्व रूढ़िवादी परंपराओं की रक्षा के लिए सभ्यता और प्रगति के विरुद्ध लड़ रहे थे।" – टी.आर.
होम्स उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वर्ष 1857 के विद्रोह के स्वरूप को लेकर ब्रिटिश और भारतीय इतिहासकारों में भारी मतभेद रहा है। प्रसिद्ध इतिहासकार वी.डी. सावरकर ने अपनी पुस्तक 'द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस 1857' में इसे सुनियोजित राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम कहा था, जबकि डॉ. आर.सी. मजूमदार ने अपनी पुस्तक 'द सिपाही म्यूटिनी एंड द रिबेलियन ऑफ 1857' में स्पष्ट रूप से लिखा कि यह तथाकथित प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम न तो प्रथम था, न ही राष्ट्रीय था और न ही स्वतंत्रता संग्राम था। इसी प्रकार, ब्रिटिश इतिहासकार सर जॉन सीले ने इसे 'केवल एक सिपाही विद्रोह' (Merely a patriotic mutiny/Sepoy mutiny) बताया और टी.आर. होम्स ने इसे 'सभ्यता और बर्बरता (या धर्म) का संघर्ष' करार दिया था। 1857 के विद्रोह से जुड़े ऐतिहासिक विश्लेषण के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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मुबारक खिलजी ने कौन सी उपाधि धारण की थी?
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1857 के महान विद्रोह के तात्कालिक कारणों और बैरकपुर छावनी की घटना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रिटिश सेना द्वारा पुरानी 'ब्राउन बैस' बन्दूक के स्थान पर 'एनफील्ड राइफल' को शामिल किया गया था, जिसके कारतूसों में गाय और सुअर की चर्बी होने की अफवाह ने भारतीय सैनिकों में भारी असंतोष पैदा कर दिया था।
2. बैरकपुर छावनी की 34वीं नेटिव इन्फैंट्री के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के खिलाफ खुलेआम बगावत की और ब्रिटिश अधिकारियों लेफ्टिनेंट बॉग तथा सार्जेंट ह्यू हडसन पर हमला कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया।
3. इस घटना के तुरंत बाद ब्रिटिश प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मंगल पांडे को 8 अप्रैल 1857 को निर्धारित तिथि से पहले ही बैरकपुर में सार्वजनिक रूप से फांसी पर लटका दिया था।
4. चर्बी वाले कारतूसों के विरोध में सबसे पहले आधिकारिक रूप से बगावत करने वाली और नए कारतूसों का इस्तेमाल करने से पूरी तरह इनकार करने वाली पहली रेजिमेंट मेरठ की 3rd लाइट कैवलरी थी, जिसने जनवरी 1857 में ही विद्रोह कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मध्यकालीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में भक्ति और सूफी आंदोलनों की दार्शनिक प्रवृत्तियों, उनके संतों तथा उनकी साधना पद्धतियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दक्षिण भारत के प्रसिद्ध संत रामानुजाचार्य द्वारा प्रतिपादित 'विशिष्टाद्वैत' दर्शन के अनुसार जीव और जगत ब्रह्म से भिन्न होने के बावजूद ब्रह्म का ही अंश हैं, जबकि मध्वाचार्य द्वारा प्रतिपादित 'द्वैतवाद' जीव, जगत और ईश्वर को पूर्णतः पृथक एवं स्वतंत्र मानता है।
2. सूफी संत शेख शहाबुद्दीन सुहरवर्दी द्वारा स्थापित 'सुहरवर्दी सिलसिले' ने भारत में चिश्ती संप्रदाय के विपरीत कठोर वैराग्य, उपवास और भिक्षाटन के जीवन को पूर्णतः अपनाया तथा राजकीय सत्ता से पूर्ण अलगाव रखते हुए किसी भी प्रकार के जागीर या सरकारी अनुदान को लेने से स्पष्ट मना कर दिया था।
3. निर्गुण भक्ति धारा के महान संत कबीर ने जहाँ जाति व्यवस्था, बाह्य आडंबरों और मूर्तिपूजा का कड़ा विरोध किया, वहीं सूफी संत मलिक मुहम्मद जायसी ने अपनी रचना 'पद्मावत' में प्रेमाभ्री (प्रेममार्गी) शाखा के अंतर्गत सूफी रहस्यावाद को लोकभाषा अवधी के माध्यम से प्रस्तुत किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजििस कादिर को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ में विद्रोह की कमान संभाली और ब्रिटिश सेना के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व किया।
2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'फैजाबाद का डंका शाह' भी कहा जाता था, ने ब्रिटिश सेना के विरुद्ध जिहाद का आह्वान किया और चिनहट के युद्ध में हेनरी लॉरेंस के नेतृत्व वाली ब्रिटिश सेना को पराजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
3. लखनऊ की रेजिडेंसी को मुक्त कराने के लिए पहुँचे ब्रिटिश सेनापति जनरल आउट्राम और हैवलॉक को अंततः सफलता मिल गई और उन्होंने मई 1858 तक अवध पर पूर्ण रूप से स्थायी नियंत्रण स्थापित कर लिया था।
4. अंग्रेजों से पराजय के पश्चात बेगम हजरत महल ने आत्मसमर्पण करने से इनकार कर दिया और नेपाल की तराई में शरण ली, जहाँ बाद में उन्हें ब्रिटिश सेना द्वारा बंदी बनाकर अंडमान निकोबार निर्वासित कर दिया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और पुर्तगाली सत्ता की स्थापना के संदर्भ में, अल्बुकर्क (Afonso de Albuquerque) की नीतियों और उनके प्रभावों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अल्बुकर्क ने भारत में पुर्तगाلی साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है, जिसने वर्ष 1510 में बीजापुर के आदिल शाह से गोवा पर अधिकार कर लिया था और इसे पुर्तगाली पूर्व साम्राज्य का मुख्य प्रशासनिक एवं व्यापारिक केंद्र बनाया।
2. उसने कोचीन के स्थान पर गोवा को पुर्तगालियों की मुख्य राजधानी बनाया और भारतीय महिलाओं के साथ पुर्तगाली पुरुषों के विवाह को प्रोत्साहित किया ताकि भारत में एक नई मिश्रित नस्ल की आबादी तैयार की जा सके।
3. अल्बुकर्क ने फारस की खाड़ी के मुहाने पर स्थित होर्मुज द्वीप पर अधिकार कर लिया, जिसका मुख्य सामरिक उद्देश्य एशियाई व्यापार मार्गों पर नियंत्रण स्थापित करना और लाल सागर से होकर होने वाले मुस्लिम व्यापार को बाधित करना था।
4. उसने भारत में सती प्रथा पर प्रतिबंध लगाने वाला पहला पुर्तगाली गवर्नर होने के साथ-साथ कालीकट के जमोरिन के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित कर त्रावणकोर तक पुर्तगाली प्रभाव का विस्तार किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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