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History of India
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उन्नीसवीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों और उनके संस्थापकों/संस्थाओं के वैचारिक दृष्टिकोण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद और पुरोहितवाद का कड़ा विरोध करते हुए उपनिषदों के एकेश्वरवाद पर बल दिया, किंतु उन्होंने ईसाई धर्म के त्रित्व (Trinity) सिद्धांत को पूर्णतः स्वीकार करते हुए 'द प्रीसेप्ट्स ऑफ जीसस' में ईसा मसीह के नैतिक उपदेशों की प्रशंसा की थी।
- 2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा देते हुए वेदों को अपरिवर्तनीय और अपौरुषेय (ईश्वर प्रदत्त) माना, तथा समाज सुधार के अंतर्गत अंतरजातीय विवाह और विधवा पुनर्विवाह का समर्थन करने के साथ-साथ 'शुद्धि आंदोलन' की शुरुआत की थी।
- 3. केशव चंद्र सेन के ब्रह्म समाज से अलग होने के बाद देवेंद्रनाथ टैगोर ने 'साधारण ब्रह्म समाज' की स्थापना की थी, जिसने महिला शिक्षा, बाल विवाह निषेध और ब्रह्म विवाह अधिनियम (1872) को पारित करवाने में निर्णायक भूमिका निभाई थी।
- 4. प्रार्थना समाज की स्थापना मुंबई में आत्माराम पांडुरंग द्वारा महादेव गोविंद रानाडे और आर.जी. भंडारकर के सहयोग से की गई थी, जिसका मुख्य ध्यान अंतरजातीय भोजन, अंतरजातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह और दलित व महिला उत्थान जैसे सामाजिक सुधारों पर केंद्रित था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि राजा राममोहन राय ने एकेश्वरवाद का समर्थन किया और 'द प्रीसेप्ट्स ऑफ जीसस' में ईसा मसीह के नैतिक उपदेशों की सराहना की थी। कथन 2 सही है क्योंकि दयानंद सरस्वती ने वेदों की सर्वोच्चता पर बल दिया और शुद्धि आंदोलन चलाया था। कथन 3 गलत है क्योंकि 'साधारण ब्रह्म समाज' की स्थापना आनंद मोहन बोस, शिवनाथ शास्त्री और द्वारकानाथ गांगुली ने 1878 में की थी, जबकि केशव चंद्र सेन ने 'भारतीय ब्रह्म समाज' (नवविधान) की स्थापना की थी। कथन 4 सही है क्योंकि प्रार्थना समाज की स्थापना मुंबई में सामाजिक सुधारों जैसे विधवा पुनर्विवाह और दलित-महिला उत्थान के लिए की गई थी। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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वर्धन राजवंश तथा दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) के कला, प्रशासन और राजनीतिक इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महाबलीपुरम के प्रसिद्ध रथ मंदिरों का निर्माण पल्लव शासक नरसिंहवर्मन प्रथम (महमल्ल) के शासनकाल में हुआ था, और ये सभी मंदिर एकात्म (Monolithic) चट्टानों को काटकर बनाए गए हैं।
2. बादामी के चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था, जिसकी जानकारी हमें कालिदास की प्रसिद्ध रचना 'हर्षचरित' से मिलती है।
3. चोल राजवंश की स्थानीय स्वशासन प्रणाली, विशेषकर उत्तरमेरूर अभिलेखों में वर्णित ग्राम सभाओं और चुनावों की कार्यप्रणाली, उनकी प्रशासनिक उत्कृष्टता का एक अनूठा उदाहरण थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान दिल्ली में विद्रोही गतिविधियों के नेतृत्व, मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका और इस क्षेत्र में ब्रिटिश सैन्य दमन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मेरठ से दिल्ली पहुँचे विद्रोही सिपाहियों ने 11 मई 1857 को लाल किले में प्रवेश कर वृद्ध मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को अनिच्छा से ही सही, भारत का 'शहंशाह-ए-हिंद' (सम्राट) घोषित कर दिया, जिससे इस स्थानीय सैनिक विद्रोह को एक अखिल भारतीय वैधता और राजनीतिक प्रतीक मिल गया।
2. यद्यपि बहादुर शाह जफर ने स्वयं कभी प्रत्यक्ष रूप से युद्ध के मैदान का नेतृत्व नहीं किया, तथापि उनके नाम और फरमानों का उपयोग कर देश भर के राजाओं और सैनिकों को अंग्रेजों के विरुद्ध एकजुट होने का आह्वान किया गया था।
3. दिल्ली में विद्रोहियों की वास्तविक सैन्य कमान जनरल बख्त खान के हाथों में थी, जो बरेली से आए सैनिकों के मुख्य नेता थे और उन्होंने सम्राट को सलाह दी थी कि ब्रिटिश सेना के पुनर्गठन से पूर्व निर्णायक हमला किया जाए, किंतु आपसी गुटबाजी के कारण यह प्रभावी रणनीति धरी रह गई।
4. दिल्ली पर पुनः अधिकार प्राप्त करने के लिए ब्रिटिश सेना ने जॉन निकलसन और हडसन के नेतृत्व में भीषण घेराबंदी की, और अंततः लाल किले पर अधिकार करने के बाद हडसन ने राजकुमारों (मिर्जा मुगल और खिज्र सुल्तान) को गोली से उड़ा दिया तथा बहादुर शाह जफर को गिरफ्तार कर रंगून निर्वासित कर दिया, जहाँ 1862 में उनकी मृत्यु हो गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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विजयनगर काल में राजा के निजी सचिव को क्या कहा जाता था जो शाही आदेशों को लिखता था?
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प्राचीन भारतीय इतिहास में बौद्ध धर्म के महायान संप्रदाय और जैन धर्म के श्वेतांबर संप्रदाय के दार्शनिक तथा व्यावहारिक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महायान बौद्ध धर्म के अंतर्गत बोधिसत्वों की संकल्पना को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई, जिसके अनुसार बोधिसत्व अपनी व्यक्तिगत मुक्ति (निर्वाण) से पूर्व संपूर्ण sentient beings (प्राणियों) के उद्धार और कल्याण के मार्ग पर कार्य करते हैं।
2. जैन धर्म के श्वेतांबर संप्रदाय के अनुयायी स्थूलभद्र के नेतृत्व में उत्तर भारत में रहे और उन्होंने जैन ग्रंथों के संकलन हेतु पाटलिपुत्र में आयोजित प्रथम जैन संगीति में सक्रिय रूप से भाग लिया, जबकि दिगंबर संप्रदाय के विपरीत इन्होंने मोक्ष प्राप्ति के लिए पूर्ण रूप से वस्त्र त्यागने (नग्न रहने) को अनिवार्य नहीं माना।
3. महायान संप्रदाय की तर्ज पर जैन धर्म में भी मूर्तिकला और भक्ति मार्ग का अत्यधिक विकास हुआ, जिसके परिणामस्वरूप श्वेतांबर और दिगंबर दोनों ही संप्रदायों ने महात्मा बुद्ध की भांति महावीर स्वामी की विशाल मूर्तियों का निर्माण करवाकर उनकी पूजा प्रारंभ की, जिसे बौद्ध धर्म के प्रभाव का प्रत्यक्ष परिणाम माना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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भारत छोड़ो आंदोलन (1942) और आज़ाद हिंद फौज (INA) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 8 अगस्त 1942 को बॉम्बे के गोवालिया टैंक मैदान में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा 'भारत छोड़ो' प्रस्ताव पारित किए जाने के तुरंत बाद, ऑपरेशन रुथलेस (Operation Ruthless) के तहत ब्रिटिश सरकार ने कांग्रेस के सभी शीर्ष नेताओं को रातों-रात गिरफ्तार कर नजरबंद कर दिया था।
2. भूमिगत गतिविधियों के संचालन के दौरान डॉ. राम मनोहर लोहिया, अच्युत पटवर्धन, अरुणा आसफ अली और उषा मेहता जैसे नेताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसमें उषा मेहता ने बॉम्बे से गुप्त रूप से 'कांग्रेस रेडियो' का प्रसारण कर जनमानस को संगठित किया।
3. सुभाष चंद्र बोस ने जनवरी 1941 में ब्रिटिश पहरे से बचकर 'ग्रेट एस्केप' (Great Escape) किया और पेशावर तथा काबुल के रास्ते बर्लिन पहुँचे, जहाँ उन्होंने जर्मन विदेश मंत्रालय के सहयोग से 'फ्री इंडिया सेंटर' की स्थापना की और 'इंडियन लीजन' का गठन किया।
4. सिंगापुर के पतन के बाद मोहन सिंह और जापानी मेजर इवाइची फुजिवारा के प्रयासों से भारतीय राष्ट्रवादियों और युद्धबंदियों को मिलाकर 'आज़ाद हिंद फौज' (INA) की नींव रखी गई, और बाद में सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर में 'अर-हुकूमत-ए-आजाद हिंद' (आज़ाद हिंद सरकार) की स्थापना की घोषणा की।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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