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History of India
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सत्रहवीं और अट्ठारहवीं शताब्दी में यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और उनकी व्यापारिक नीतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. डच ईस्ट इंडिया कंपनी (VOC) ने अपनी पहली व्यावसायिक कोठी वर्ष 1605 में मसूलीपट्टम में स्थापित की थी, और उन्होंने भारतीय वस्त्रों के व्यापार को बढ़ावा देते हुए मसालों के द्वीपसमूह (इंडोनेशिया) के साथ भारतीय कपड़ों का निर्यात बड़े पैमाने पर शुरू किया था।
- 2. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को भारत में व्यापार करने का एकाधिकार प्रदान करने वाला पहला शाही चार्टर वर्ष 1600 में महारानी एलिजाबेथ प्रथम द्वारा दिया गया था, जबकि मुगल दरबार में आने वाला पहला अंग्रेजी दूत विलियम हॉकिंस था जो जहाँगीर के दरबार में 1608 में आया था।
- 3. फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना फ्रांसीसी मंत्री कोल्बर्ट के प्रयासों से वर्ष 1664 में हुई थी, और उन्होंने भारत में अपनी पहली फैक्ट्री फ्रैंक कैरो के नेतृत्व में पुडुचेरी में वर्ष 1668 में स्थापित की थी।
- 4. पुर्तगालियों ने भारत में अपने प्रशासनिक नियंत्रण को मजबूत करने के लिए 'कार्टाज' (Cartaz) नामक एक नौसैनिक व्यापारिक लाइसेंस प्रणाली लागू की थी, जिसके तहत अरब सागर और हिंद महासागर से गुजरने वाले हर भारतीय और एशियाई जहाज को कर देना अनिवार्य था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 4 सही हैं, किंतु कथन 3 गलत है। फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 1664 में कोल्बर्ट के प्रयासों से हुई थी, किंतु उन्होंने भारत में अपनी पहली फैक्ट्री 1668 में पुडुचेरी में नहीं, बल्कि सूरत में फ्रैंक कैरो के नेतृत्व में स्थापित की थी (पुडुचेरी की स्थापना बाद में हुई थी)। पुर्तगालियों ने एशियाई व्यापार पर नियंत्रण के लिए कार्टाज व्यवस्था लागू की थी। इस विषय के अधिक विवरण के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह की असफलता और इसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 1857 के विद्रोह के अधिकांश नेताओं के पास कोई सुसंगत भविष्यवादी राजनीतिक दृष्टिकोण, आधुनिक प्रशासनिक ढांचा या अखिल भारतीय स्तर पर एक साझा राष्ट्रीय एजेंडा नहीं था, बल्कि वे मुख्य रूप से अपने व्यक्तिगत हितों, जागीरों या रियासत की बहाली के लिए लड़ रहे थे।
2. नाना साहब, तात्या टोपे, रानी लक्ष्मीबाई और बेगम हजरत महल जैसे नेताओं ने असाधारण व्यक्तिगत वीरता का परिचय दिया, किंतु उनके बीच किसी भी प्रकार के केंद्रीय समन्वय, रणनीतिक एकता और दीर्घकालिक सैन्य योजना का पूर्ण अभाव था।
3. भारत के अधिकांश बड़े रियासतों के शासकों, जमींदारों और शिक्षित अभिजात वर्ग ने विद्रोहियों का खुलकर समर्थन किया, जिससे अंग्रेजों के विरुद्ध एक राष्ट्रव्यापी समानांतर सरकार का गठन संभव हो सका था।
4. विद्रोहियों के पास ब्रिटिश सेना के मुकाबले आधुनिक संचार साधनों, जैसे टेलीग्राफ और रेलवे, तथा अत्याधुनिक तोपखाने का अत्यधिक प्रचुर भंडार था, जिसका उन्होंने युद्ध के दौरान भरपूर लाभ उठाया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार में वीर कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह के नेतृत्व, सैन्य अभियानों तथा ब्रिटिश सेनाओं के विरुद्ध उनके संघर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 25 जुलाई 1857 को दानापुर छावनी के सैनिकों के विद्रोह के पश्चात बाबू कुंवर सिंह ने उनका नेतृत्व स्वीकार किया और आरा पर आक्रमण कर ब्रिटिश सेना को पराजित किया, किंतु मेजर विन्सेंट आयर के विरुद्ध बिहिया के जंगलों में हुए निर्णायक संघर्ष में कुंवर सिंह को भारी क्षति उठानी पड़ी और उनका महल व जगदीशपुर का अधिकांश हिस्सा नष्ट कर दिया गया था।
2. जगदीशपुर से निकलने के पश्चात कुंवर सिंह ने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों (जैसे आजमगढ़, बलिया और कानपुर) में नाना साहब और तात्या टोपे की सेनाओं के साथ मिलकर अंग्रेजों के विरुद्ध सैन्य अभियानों का कुशल समन्वय किया तथा गंगा नदी पार करते समय अपने हाथ में गोली लगने पर स्वयं तलवार से अपना हाथ काटकर गंगा में अर्पित कर दिया था।
3. वीर कुंवर सिंह की मृत्यु के पश्चात उनके छोटे भाई अमर सिंह ने अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष की कमान संभाली और कैमूर की पहाड़ियों (रोहतास और शाहबाद क्षेत्र) को अपना मुख्य केंद्र बनाते हुए ब्रिटिश सेनाओं के खिलाफ एक प्रभावी 'छापामार युद्ध' (Guerrilla Warfare) प्रणाली का सफलतापूर्वक संचालन किया था।
4. अमर सिंह ने कैमूर की पहाड़ियों से अंग्रेजी प्रशासन के विरुद्ध समानांतर सरकार चलाई और ब्रिटिश अधिकारियों (जैसे आउट्राम और डगलस) को भारी रणनीतिक चुनौती दी, किंतु अंततः नेपाल के राजा के विश्वासघात और ब्रिटिश घेराबंदी के कारण उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और कलकत्ता में सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह की असफलता के मुख्य कारणों और इसके नेतृत्व की संरचनात्मक कमियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस ऐतिहासिक विद्रोह के पास अखिल भारतीय स्तर पर किसी एक सर्वमान्य, दूरदर्शी और केन्द्रीकृत राजनीतिक नेतृत्व का पूर्ण अभाव था, जिसके कारण विभिन्न क्षेत्रों के स्थानीय नेता अपने संकीर्ण व क्षेत्रीय हितों से ऊपर उठकर अंग्रेजों के विरुद्ध कोई एकीकृत दीर्घकालिक रणनीति नहीं बना सके।
2. दिल्ली के प्रतीकात्मक सम्राट घोषित किए गए बहादुर शाह ज़फ़र के पास न तो कोई वास्तविक सैन्य शक्ति थी और न ही विद्रोही सैनिकों के मध्य अनुशासन तथा समन्वय स्थापित करने की व्यावहारिक क्षमता।
3. आधुनिक शिक्षित मध्यम वर्ग, व्यापारियों और अंग्रेजी शिक्षा से लाभान्वित भारतीय बुद्धिजीवियों ने इस विद्रोह का सक्रिय रूप से नेतृत्व किया तथा इसे ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध एक सफल आधुनिक लोकतांत्रिक जन-क्रांति में बदल दिया।
4. अधिकांश बड़ी देशी रियासतों और भारतीय शासकों (जैसे हैदराबाद के निजाम, ग्वालियर के सिंधिया और भोपाल के नवाब) ने विद्रोहियों का साथ देने के बजाय ब्रिटिश सत्ता के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखी, जिसके संदर्भ में ब्रिटिश गवर्नर-जनरल लॉर्ड कैनing ने टिप्पणी की थी कि इन शासकों ने 'तूफान में ब्रेकवाटर' (तरंगरोधक) की तरह कार्य किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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महात्मा गांधी के भारत आगमन के पश्चात उनके शुरुआती सत्याग्रहों — चंपारण, खेड़ा और अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन — के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चंपारण सत्याग्रह (1917) में यूरोपीय बागान मालिकों द्वारा किसानों पर थोपी गई 'तीनकथा प्रणाली' के अंतर्गत किसानों को अपनी भूमि के 3/20वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करनी पड़ती थी, और इस आंदोलन की सफलता से प्रभावित होकर रविंद्रनाथ टैगोर ने गांधीजी को 'महात्मा' की उपाधि से सम्मानित किया था।
2. अहमदाबाद मिल मजदूर संघर्ष (1918) के दौरान गांधीजी ने पहली बार भारत में भूख हड़ताल (Hunger Strike) का प्रयोग किया था, जो मिल मालिकों और मजदूरों के बीच 'प्लैटैग बोनस' (Plague Bonus) को समाप्त करने के विवाद को लेकर हुआ था।
3. खेड़ा सत्याग्रह (1918) गुजरात में फसल के पूर्णतया विफल हो जाने के कारण उत्पन्न हुआ था, जहाँ राजस्व संहिता के नियमानुसार यदि फसल सामान्य उत्पादन के एक-चौथाई से कम होती है, तो किसानों को पूर्ण राजस्व छूट का अधिकार था, और इस आंदोलन में सरदार वल्लभभाई पटेल ने गांधीजी के प्रमुख सहयोगी के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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सत्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी के भारत में व्यापारिक विस्तार तथा राजनीतिक संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फ्रांसिस कैरो ने मुगल सम्राट औरंगजेब से अधिकार पत्र प्राप्त कर वर्ष 1668 में भारत में पहली फ्रांसीसी फैक्ट्री की स्थापना सूरत में की थी, जबकि इसके दो वर्ष पश्चात मार्कारा के नेतृत्व में मसूलिपट्टनम में दूसरी फ्रांसीसी फैक्ट्री स्थापित हुई।
2. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल में वास्तविक राजनीतिक और व्यापारिक सुदृढ़ीकरण वर्ष 1651 में शाहशुजा द्वारा जारी 'निशान' (राजकीय आज्ञापत्र) के माध्यम से मिला, जिसके तहत मात्र 3000 रुपये वार्षिक कर के बदले बंगाल में मुक्त व्यापार करने का विशेषाधिकार प्राप्त हुआ।
3. भारत में एंग्लो-फ्रेंच प्रतिद्वंद्विता (कर्नाटक युद्ध) के दौरान, प्रथम कर्नाटक युद्ध (1746-48) ऑस्ट्रिया के उत्तराधिकार युद्ध का परिणाम था, जिसका अंत एक्स-ला-शापेली की संधि से हुआ और इसके तहत अंग्रेजों को मद्रास वापस मिल गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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