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History of India
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान दिल्ली में विद्रोहियों के नेतृत्व और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. मेरठ के सैनिकों द्वारा दिल्ली पहुँचने के बाद अनिच्छुक बहादुर शाह जफर को विद्रोहियों द्वारा 'शहंशाह-ए-हिंदुस्तान' घोषित किया गया, जिससे इस स्थानीय सैन्य विद्रोह को एक अखिल भारतीय राष्ट्रीय वैधानिकता प्राप्त हुई।
  2. 2. यद्यपि सम्राट बहादुर शाह जफर ने औपचारिक रूप से नेतृत्व स्वीकार कर लिया था, किंतु वृद्ध होने के कारण वास्तविक सैन्य नेतृत्व और निर्णय लेने की शक्ति 'कोर्ट ऑफ सोल्जर्स' (सैनिकों की अदालत) के हाथों में थी, जिसके प्रमुख जनरल बख्त खान थे।
  3. 3. दिल्ली पर पुन: अधिकार करने के पश्चात ब्रिटिश अधिकारी हडसन ने हुमांयू के मकबरे से बहादुर शाह जफर को गिरफ्तार किया तथा उनके दोनों पुत्रों और पोते की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी, और जफर को देश से निर्वासित कर रंगून भेज दिया गया जहाँ उनकी मृत्यु हो गई।
  4. 4. दिल्ली में विद्रोह के दमन के दौरान ब्रिटिश सेना ने केवल सैन्य विद्रोहियों को ही निशाना बनाया, जबकि दिल्ली के मुगल राजवंश के प्रति सहानुभूति रखने वाले शाही घराने के किसी भी अन्य सदस्य या नागरिकों के विरुद्ध कोई सामूहिक दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

वर्ष 1857 के विद्रोह के दौरान दिल्ली में मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को विद्रोहियों द्वारा प्रतीकात्मक रूप से भारत का सम्राट घोषित किया गया था। यद्यपि जफर इस भूमिका के लिए initially अनिच्छुक थे, लेकिन सैनिकों के दबाव में उन्होंने नेतृत्व स्वीकार किया। वास्तविक सैन्य शक्ति 'कोर्ट ऑफ सोल्जर्स' के पास थी, और बरेली से आए जनरल बख्त खान ने सैन्य मामलों में महत्वपूर्ण नेतृत्व प्रदान किया। सितंबर 1857 में अंग्रेजों द्वारा दिल्ली पर पुनः कब्जा करने के बाद जफर को हुमायू के मकबरे से गिरफ्तार किया गया, उनके बेटों की हत्या कर दी गई और उन्हें रंगून निर्वासित कर दिया गया। किंतु कथन 4 असत्य है क्योंकि अंग्रेजों ने दिल्ली पर अधिकार करने के बाद नागरिकों और शाही परिवार के सदस्यों पर अत्यधिक क्रूरता और सामूहिक नरसंहार/दमन की कार्रवाई की थी। अत: विकल्प (a) सही है।
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