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History of India
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मुगल साम्राज्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. हुमायूं ने चौसा और कन्नौज (बिलग्राम) के युद्धों में शेरशाह सूरी से पराजित होने के बाद ईरान के सफावी शासक शाह तहमास्प के दरबार में शरण ली थी, और ईरान के सैन्य सहयोग से ही उसने वर्ष 1555 में पुनः दिल्ली और आगरा पर अधिकार किया था।
  2. 2. जहाँगीर के शासनकाल में मेवाड़ के शासक अमर सिंह के साथ मुगल संघर्ष का अंत हुआ, जिसके तहत राजकुमार खुर्रम (शाहजहाँ) द्वारा चित्तौड़ की संधि संपन्न कराई गई थी, जिसमें मेवाड़ के राणा को मुगल दरबार में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने से छूट दी गई थी।
  3. 3. शाहजहाँ के शासनकाल के उत्तरार्ध में उसकी बीमार होने की अफवाह फैलते ही उसके पुत्रों के बीच उत्तराधिकार का खूनी संघर्ष छिड़ गया, जिसमें दारा शिकोह, शूजा, औरमुराद को पराजित करते हुए औरंगजेब ने 'सामूगढ़ के निर्णायक युद्ध' (1658) के बाद आगरा पर अधिकार कर लिया था।
  4. 4. औरंगजेब ने अपने शासनकाल के दौरान सिक्खों के नौवें गुरु तेग बहादुर को इस्लाम स्वीकार करने से इंकार करने पर 1675 में दिल्ली में मृत्युदंड दिया था, तथा उसने सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया और उनके दोनों पुत्रों को भी जीवित दीवार में चुनवा दिया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 3 पूरी तरह सही हैं। हुमायूं ने शेरशाह सूरी से हारने के बाद ईरान के शाह की मदद से सत्ता पुनः प्राप्त की थी। जहाँगीर के समय मेवाड़ संधि में राणा अमर सिंह को व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट मिली थी। सामूगढ़ के युद्ध (1658) में औरंगजेब ने दारा शिकोह को निर्णायक रूप से हराया था। कथन 4 गलत है क्योंकि औरंगजेब ने गुरु तेग बहादुर को अवश्य मृत्युदंड दिया था, किंतु सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह के दो छोटे पुत्रों (जुझार सिंह और जोरावर सिंह) को सरहिंद के वजीर वजीर खान द्वारा दीवार में चुनवाया गया था, न कि औरंगजेब द्वारा सीधे तौर पर युद्ध के मैदान में या उस प्रकार से। इसके अतिरिक्त, औरंगजेब के अंतिम वर्षों में गुरु गोविंद सिंह के साथ उसके संबंध सुधरने लगे थे और बहादुर शाह प्रथम के समय तक संबंध अनुकूल हो गए थे। विकिपीडिया संदर्भ
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