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History of India
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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक विकास और संस्थागत परिवर्तनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. इल्तुतमिश ने सल्तनत काल में 'चालीसा' (तुर्कान-ए-चहलगानी) नामक तुर्क गुलाम सरदारों के एक प्रभावशाली दल का गठन किया था, जिसे बाद में बलबन ने अपनी केंद्रीय सत्ता को सुदृढ़ करने और आंतरिक विद्रोहों का दमन करने के लिए पूरी तरह समाप्त कर दिया था।
  2. 2. अलाउद्दीन खिलजी ने सल्तनत काल में पहली बार सैनिकों को नगद वेतन देने की स्थायी व्यवस्था शुरू की और घोड़ों को दागने (दाग) तथा सैनिकों का हुलिया लिखने की प्रथा को सख्ती से लागू किया, ताकि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सके।
  3. 3. मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में मंगोल आक्रमणों से निपटने और राज्य की सैन्य शक्ति को बढ़ाने के लिए सल्तनत की सेना को तीन वर्षों का अग्रिम वेतन नगद रूप में दिया गया था, जिससे शाही राजकोष दिवालिया होने के कगार पर पहुँच गया था।
  4. 4. सिकंदर लोदी ने भू-राजस्व के निर्धारण और माप के लिए 'गज-ए-सिकंदरी' का प्रचलन शुरू किया, जिसकी लंबाई 39 अंगुल (लगभग 30 इंच) थी, तथा उसने कृषि और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए अनाज पर लगने वाले जकात (चुंगी कर) को समाप्त कर दिया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि 'तुर्कान-ए-चहलगानी' (चालीसा) का गठन इल्तुतमिश ने किया था, लेकिन इसे समाप्त बलबन ने किया था (न कि इल्तुतमिश ने)। बलबन ने इस शक्तिशाली दल को अपनी निरंकुश सत्ता के मार्ग की सबसे बड़ी बाधा मानकर नष्ट कर दिया था। कथन 2 सत्य है; अलाउद्दीन खिलजी ने सल्तनत में पहली बार सैनिकों को नगद वेतन देने, घोड़ों को दागने (दाग प्रथा) और सैनिकों का हुलिया दर्ज करने की वैज्ञानिक व्यवस्था की थी। कथन 3 असत्य है क्योंकि तीन वर्षों का अग्रिम वेतन देने की योजना मुहम्मद बिन तुगलक की 'खुरासान विजय योजना' से जुड़ी थी, जिसमें उसने 3,00,000 सैनिकों की विशाल सेना को एक साल का अग्रिम वेतन दिया था, न कि तीन साल का। कथन 4 सत्य है; सिकंदर लोदी ने कृषि और भूमि की पैमाइश के लिए 'गज-ए-सिकंदरी' पैमाना (39 अंगुल) शुरू किया और व्यापार सुगम बनाने हेतु अनाज से जकात कर हटाया। इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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