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History of India
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पल्लव राजवंश और चालुक्य राजवंश के संघर्ष तथा उनके वास्तुकला एवं ऐतिहासिक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. पल्लव शासक महेंद्रवर्मन प्रथम ने अपने शासनकाल के प्रारंभिक दौर में जैन धर्म का अनुयायी होने के कारण बौद्ध धर्म का तीव्र विरोध किया था, किंतु बाद में शैव संत अप्पर के प्रभाव में आकर उसने शैव धर्म अपना लिया था।
- 2. बादामी के चालुक्य राजा पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन की विशाल सेना को पराजित किया था, जिसका सजीव और विस्तृत विवरण ऐहोल प्रशस्ति में मिलता है, जिसकी रचना उसके दरबारी कवि रविचर्ति ने की थी।
- 3. पल्लव राजा नरसिंहवर्मन प्रथम (महामल्ल) ने चालुक्य राजधानी बादामी पर अधिकार कर लिया था और इस विजय के उपलक्ष्य में 'वातापिचकोंडा' (वातापि का विजेता) की उपाधि धारण की थी।
- 4. महाबलीपुरम के प्रसिद्ध एकात्मथ (रथ) मंदिरों का निर्माण पल्लव शासक राजसिंह (राजसिंहवर्मन द्वितीय) के शासनकाल में हुआ था, जिन्होंने कांची के प्रसिद्ध कैलाशनाथ मंदिर का भी निर्माण करवाया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए कथनों में से कथन 1, 2 और 3 सही हैं, जबकि कथन 4 असत्य है। महाबलीपुरम के एकात्मथ (रथ) मंदिरों का निर्माण नरसिंहवर्मन प्रथम (महामल्ल) द्वारा करवाया गया था, न कि राजसिंह (राजसिंहवर्मन द्वितीय) द्वारा, हालांकि कांची के कैलाशनाथ मंदिर का निर्माण राजसिंह ने ही करवाया था। चालुक्य और पल्लव राजवंशों के संघर्ष और वास्तुकला के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन और सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित आज़ाद हिंद फौज (INA) के ऐतिहासिक घटनाक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान देश के कई हिस्सों में समानांतर सरकारों की स्थापना की गई थी, जिनमें बलिया में चित्तू पांडेय के नेतृत्व में, तामलुक में 'जातीय सरकार' और सतारा में 'प्रति सरकार' (जो सबसे लंबे समय तक चली) प्रमुख थीं।
2. सुभाष चंद्र बोस ने वर्ष 1941 में ब्रिटिश खुफिया तंत्र को चकमा देकर देश से पलायन किया और जर्मनी पहुँचे, जहाँ उन्होंने 'फ्री इंडिया सेंटर' की स्थापना की और पहली बार जर्मनी में ही भारतीय युद्धबंदियों को संगठित करके 'आज़ाद हिंद फौज' की औपचारिक स्थापना की थी।
3. रास बिहारी बोस ने टोक्यो सम्मेलन में इंडियन इंडिपेंडेंस लीग की स्थापना की और सिंगापुर में आयोजित सम्मेलन में 'आज़ाद हिंद फौज' का औपचारिक पुनर्गठन कर इसकी कमान सुभाष चंद्र बोस को सौंपी, जिन्होंने अक्टूबर 1943 में सिंगापुर में 'अस्थाई आज़ाद सरकार' (आर्ध हुकूमत-ए-आज़ाद हिंद) की स्थापना की घोषणा की थी।
4. आज़ाद हिंद फौज की 'सुभाष ब्रिगेड', 'गांधी ब्रिगेड' और महिलाओं की एक रेजिमेंट 'रानी झांसी रेजिमेंट' (जिसका नेतृत्व लक्ष्मी सहगल ने किया था) ने बर्मा और इम्फाल अभियान के दौरान जापानी सेना के साथ मिलकर ब्रिटिश सेना के विरुद्ध कड़ा संघर्ष किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारणों और बैरकपुर छावनी में मंगल पांडे की घटना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जनवरी 1857 के अंत में दमदम छावनी में यह अफवाह जोर पकड़ चुकी थी कि नई 'एनफील्ड' राइफल में प्रयोग होने वाले कारतूसों के आवरण में गाय और सूअर की चर्बी का मिश्रण है, जिसे सैनिकों को लोड करने से पहले अपने दाँतों से काटना पड़ता था।
2. बैरकपुर छावनी की 34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री (B.N.I.) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के आदेश के विरोध में क्रुद्ध होकर ब्रिटिश एडजुटेंट लेफ्टिनेंट बॉग और सहायक सार्जेंट मेजर ह्यूसन पर गोली चला दी थी।
3. मंगल पांडे को कोर्ट-मार्शल के पश्चात 8 अप्रैल 1857 को निर्धारित तिथि से पहले ही बैरकपुर में फाँसी पर लटका दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप ब्रिटिश सेना के विरुद्ध देशव्यापी असंतोष और विद्रोह की आग भड़क उठी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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जहाँगीर की आत्मकथा:
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के पूर्ववर्ती राजनीतिक संगठनों और उनके संस्थापकों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. लैंडहोल्डर्स सोसाइटी (Landholders Society) - द्वारकानाथ टैगोर
2. ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन (British Indian Association) - राधाकांत देव और देवेंद्रनाथ टैगोर
3. ईस्ट इंडिया एसोसिएशन (East India Association) - दादाभाई नौरोजी
4. इंडियन एसोसिएशन (Indian Association) - आनंद मोहन बोस और सुरेंद्रनाथ बनर्जी
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सुमेलित है/हैं?
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सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930-34) और गांधी-इरविन समझौते के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1930 में प्रारंभ हुए सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान दांडी मार्च के पश्चात देश के विभिन्न हिस्सों में नमक कानून तोड़ने के अलावा वन कानूनों की अवहेलना, चौकीदारी कर अदायगी का बहिष्कार और विदेशी कपड़ों का पूर्ण बहिष्कार जैसे कार्यक्रम व्यापक स्तर पर चलाए गए।
2. 5 मार्च 1931 को महात्मा गांधी और वायसराय लॉर्ड इरविन के बीच हुए समझौते के तहत सरकार ने उन सभी राजनीतिक कैदियों को तुरंत रिहा करने पर सहमति दी जिन पर हिंसा के आरोप थे, तथा जब्त की गई सभी संपत्तियों को बिना शर्त वापस कर दिया।
3. गांधी-इरविन समझौते के उपरांत कांग्रेस ने कराची अधिवेशन (1931) में इस समझौते का अनुमोदन किया और महात्मा गांधी को आगामी द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (1931) में कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में लंदन जाने के लिए अधिकृत किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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