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History of India
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वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन और सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित आज़ाद हिंद फौज (INA) के ऐतिहासिक घटनाक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान देश के कई हिस्सों में समानांतर सरकारों की स्थापना की गई थी, जिनमें बलिया में चित्तू पांडेय के नेतृत्व में, तामलुक में 'जातीय सरकार' और सतारा में 'प्रति सरकार' (जो सबसे लंबे समय तक चली) प्रमुख थीं।
- 2. सुभाष चंद्र बोस ने वर्ष 1941 में ब्रिटिश खुफिया तंत्र को चकमा देकर देश से पलायन किया और जर्मनी पहुँचे, जहाँ उन्होंने 'फ्री इंडिया सेंटर' की स्थापना की और पहली बार जर्मनी में ही भारतीय युद्धबंदियों को संगठित करके 'आज़ाद हिंद फौज' की औपचारिक स्थापना की थी।
- 3. रास बिहारी बोस ने टोक्यो सम्मेलन में इंडियन इंडिपेंडेंस लीग की स्थापना की और सिंगापुर में आयोजित सम्मेलन में 'आज़ाद हिंद फौज' का औपचारिक पुनर्गठन कर इसकी कमान सुभाष चंद्र बोस को सौंपी, जिन्होंने अक्टूबर 1943 में सिंगापुर में 'अस्थाई आज़ाद सरकार' (आर्ध हुकूमत-ए-आज़ाद हिंद) की स्थापना की घोषणा की थी।
- 4. आज़ाद हिंद फौज की 'सुभाष ब्रिगेड', 'गांधी ब्रिगेड' और महिलाओं की एक रेजिमेंट 'रानी झांसी रेजिमेंट' (जिसका नेतृत्व लक्ष्मी सहगल ने किया था) ने बर्मा और इम्फाल अभियान के दौरान जापानी सेना के साथ मिलकर ब्रिटिश सेना के विरुद्ध कड़ा संघर्ष किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि भारत छोड़ो आंदोलन (1942) के दौरान देश के विभिन्न क्षेत्रों में समानांतर सरकारों का गठन किया गया था, जैसे बलिया में चित्तू पांडेय, मिदनापुर के तामलुक में 'जातीय सरकार' और सतारा में वाई. बी. चव्हाण व नाना पाटिल के नेतृत्व में सबसे लंबी चलने वाली 'प्रति सरकार'। कथन 2 गलत है क्योंकि सुभाष चंद्र बोस ने जर्मनी में 'फ्री इंडिया सेंटर' और 'इंडियन लीजन' की स्थापना जरूर की थी, किंतु 'आज़ाद हिंद फौज' (INA) की पहली बार औपचारिक स्थापना वर्ष 1942 में कैप्टन मोहन सिंह द्वारा बैंकॉक और सिंगापुर में जापानी सेना के सहयोग से की गई थी, न कि जर्मनी में। कथन 3 और 4 सही हैं; रास बिहारी बोस ने जापान के सहयोग से INA का नेतृत्व सुभाष चंद्र बोस को सौंपा और अक्टूबर 1943 में सिंगापुर में आज़ाद हिंद सरकार की स्थापना हुई, जिसकी सैन्य इकाइयों में 'रानी झांसी रेजिमेंट' भी शामिल थी। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे के सैन्य अभियानों और उनकी रणनीतिक गतिविधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मार्च 1858 में ब्रिटिश सेनापति सर ह्यूरोज द्वारा झाँसी की घेराबंदी किए जाने के बाद, रानी लक्ष्मीबाई ने अत्यंत साहस के साथ वीरतापूर्वक संघर्ष किया और कालपी पहुँचीं, जहाँ तात्या टोपे ने उनके साथ मिलकर ब्रिटिश सेना के विरुद्ध एक संयुक्त और प्रभावी सैन्य मोर्चा संभाला था।
2. कालपी के युद्ध में पराजित होने के पश्चात रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ने ग्वालियर की ओर प्रस्थान किया और सिंधिया राजवंश के शासक जयाजीराव सिंधिया को अपने पक्ष में करने में पूर्ण रूप से सफल रहे, जिनके सहयोग से उन्होंने ग्वालियर के किले पर स्थाई रूप से अपना स्वतंत्र राज्य स्थापित किया।
3. ग्वालियर के पतन के अंतिम चरण में ब्रिटिश सेना से भीषण युद्ध करते हुए रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुईं, जबकि तात्या टोपे वहाँ से सुरक्षित निकलने में सफल रहे और बाद में उन्होंने मध्य भारत के जंगलों में अंग्रेजों के विरुद्ध गोरिल्ला युद्ध का नेतृत्व किया, जहाँ एक स्थानीय जमींदार के विश्वासघात के कारण उन्हें बंदी बना लिया गया और फाँसी दे दी गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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अकबर का राज्यकाल कब से कब तक था?
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मुगल चित्रकला का स्वर्ण युग:
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों (पटना, दानापुर, मुजफ्फरपुर और छपरा) में हुए घटनाक्रमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व पीर अली खान नामक एक पुस्तक विक्रेता ने किया था, जिसके दौरान अफीम के एक एजेंट डॉ. लायेल की हत्या कर दी गई थी, और बाद में अंग्रेजों ने पीर अली को अन्य विद्रोहियों के साथ सार्वजनिक रूप से फांसी पर लटका दिया था।
2. दानापुर छावनी के 7वीं, 8वीं और 40वीं रेजिमेंट के भारतीय सैनिकों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार करके जगदीशपुर के जमींदार वीर कुंवर सिंह की सेना में शामिल हो गए थे।
3. मुजफ्फरपुर और छपरा (सारण) क्षेत्रों में विद्रोह का नेतृत्व करने वाले स्थानीय राजपूत और भूमिहार जमींदारों ने ब्रिटिश अधिकारियों का डटकर मुकाबला किया, किंतु छपरा के कमिश्नर विलियम टेलर की क्रूर सैन्य कार्रवाई के कारण यहाँ का विद्रोह शुरुआती हफ्तों में ही पूरी तरह से कुचल दिया गया था।
4. पटना के तत्कालीन आयुक्त (Commissioner) विलियम टेलर ने दमनकारी नीतियां अपनाते हुए पटना के तीन प्रमुख मुस्लिम उलेमाओं—مولवी अहमदुल्लाह, मौलवी वाएज उल हक और मौलवी मोहम्मद हुसैन—को गिरफ्तार कर लिया था, जिससे शहर में अंग्रेजों के विरुद्ध आक्रोश और अधिक भड़क गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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