त्वरित लिंक्स
History of India
1 views
सत्रहवीं शताब्दी के मध्य में यूरोपीय शक्तियों (विशेषकर पुर्तगालियों, डच और ब्रिटिश) के मध्य भारत में व्यापारिक संघर्ष और बस्तियों की स्थापना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वर्ष 1612 में 'स्वाली के युद्ध' (Battle of Swally) में कैप्टन थॉमस बेस्ट के नेतृत्व में ब्रिटिश नौसेना ने पुर्तगाली बेड़े को पराजित किया, जिसके परिणामस्वरूप मुगल सम्राट जहांगीर ने अंग्रेजों को सूरत में स्थायी कारखाना स्थापित करने की अनुमति प्रदान की।
- 2. डच ईस्ट इंडिया कंपनी (VOC) ने भारत में अपनी पहली व्यापारिक कोठी वर्ष 1605 में मसूलीपट्टनम में स्थापित की थी, और उन्होंने मसालों के व्यापार पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए पुर्तगालियों को परास्त कर कोचीन और मलय प्रायद्वीप के कई क्षेत्रों पर अधिकार कर लिया था।
- 3. वर्ष 1661 में पुर्तगाल की राजकुमारी कैथराइन ऑफ ब्रैगांजा का विवाह ब्रिटेन के राजा चार्ल्स द्वितीय के साथ हुआ, जिसके दहेज के रूप में अंग्रेजों को 'बॉम्बे' (मुंबई) द्वीप उपहार स्वरूप प्राप्त हुआ, जिसे बाद में चार्ल्स द्वितीय ने मात्र 10 पाउंड वार्षिक किराए पर ईस्ट India कंपनी को सौंप दिया था।
- 4. फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना वर्ष 1664 में जीन-बैप्टिस्ट कोल्बर्ट के प्रयासों से लुई चौदहवें के शासनकाल में हुई थी, और उन्होंने भारत में अपनी पहली फैक्ट्री वर्ष 1668 में फ्रेंको कैरो के नेतृत्व में मसूलीपट्टनम में स्थापित की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 सही हैं। वर्ष 1612 के स्वाली के युद्ध में अंग्रेजों द्वारा पुर्तगालियों की नौसैनिक शक्ति को हराना जहांगीर के दरबार में ब्रिटिश प्रभाव को बढ़ाने वाला सिद्ध हुआ। 1661 के विवाह समझौते के तहत बॉम्बे अंग्रेजों को मिला था। कथन 4 आंशिक रूप से गलत या भ्रामक है क्योंकि फ्रांसीसियों ने अपनी पहली फैक्ट्री सूरत (1668) में स्थापित की थी, न कि मसूलीपट्टनम में (हालाँकि मसूलीपट्टनम में उनकी दूसरी फैक्ट्री 1669 में बनी थी)। यूरोपीय शक्तियों के व्यापारिक इतिहास के बारे में अधिक जानने के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
→
1857 के महान विद्रोह की असफलता और उसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस विद्रोह का संपूर्ण भारत में एक साथ और एक ही योजना के तहत प्रसार नहीं हो सका, जिसके कारण ब्रिटिश सेना को अलग-अलग क्षेत्रों में विद्रोहियों को क्रमिक रूप से कुचलने का अवसर मिल गया।
2. अधिकांश भारतीय रियासतों के शासकों, बड़े जमींदारों और साहूकारों ने विद्रोहियों का समर्थन करने के बजाय ब्रिटिश सत्ता का साथ दिया, जिससे यह आंदोलन देशव्यापी जन-क्रांति का रूप नहीं ले पाया।
3. विद्रोही नेताओं के पास आधुनिक सैन्य तकनीक, कुशल रणनीति और केंद्रीकृत संगठन का पूर्ण अभाव था, तथा विभिन्न क्षेत्रों के नेताओं में आपसी तालमेल व राष्ट्रीय दृष्टिकोण के बजाय संकीर्ण क्षेत्रीय हित हावी रहे।
4. विद्रोहियों के पास ब्रिटिश सेना की तुलना में धन, रसद और हथियारों की प्रचुरता थी, किंतु मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर के कमजोर और अनिच्छुक नेतृत्व के कारण वे अपनी इस सैन्य बढ़त का लाभ उठाने में पूरी तरह असफल रहे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
पानीपत के तीसरे युद्ध में किस मराठा सरदार ने अब्दाली के विरुद्ध वीरता दिखाई और मारा गया?
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों—विशेषकर पटना, दानापुर, आरा और मुजफ्फरपुर—में हुई गतिविधियों और नेतृत्व के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जुलाई 1857 में दानापुर छावनियों के विद्रोही सिपाहियों ने ब्रिटिश सेना के विरुद्ध बगावत कर दी और सोन नदी पार कर आरा पहुँच गए, जहाँ उन्होंने स्थानीय जमींदार बाबू वीर कुंवर सिंह के नेतृत्व को स्वीकार करते हुए एक संयुक्त सैन्य मोर्चा बनाया।
2. पटना शहर में जुलाई 1857 में हुए विद्रोह का नेतृत्व एक प्रसिद्ध पुस्तक विक्रेता पीर अली खान द्वारा किया गया था, जिसमें अफीम एजेंट विलियम टेलर के दमनकारी रवैये के विरुद्ध स्थानीय नागरिकों और कारीगरों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था।
3. मुजफ्फरपुर और छपरा (सारण) क्षेत्रों में विद्रोहियों के दमन के लिए ब्रिटिश अधिकारी विलियम टेलर और विंसेंट आयर को विशेष रूप से तैनात किया गया था, जिन्होंने दानापुर और आरा के विद्रोहियों को कुचलने के लिए क्रूर सैन्य कार्रवाइयों का संचालन किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
→
मध्यकालीन भारत के भक्ति और सूफी आंदोलनों तथा उनके प्रमुख विचारकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दक्षिण भारत के अलवार (विष्णु भक्त) और नयनार (शिव भक्त) संतों ने भक्ति आंदोलन की नींव रखी थी, तथा उन्होंने जाति व्यवस्था का कड़ा विरोध करते हुए तमिल भाषा को अपने उपदेशों और भजनों का माध्यम बनाया।
2. सूफी संत मइनुद्दीन चिश्ती द्वारा स्थापित चिश्ती सिलसिले ने शाही संरक्षण (पैट्रोनटेज) को अनिवार्य रूप से स्वीकार किया और सुल्तानों के दरबार में उच्च पदों को प्राप्त कर राज्य की नीतियों को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित किया।
3. महाराष्ट्र के वारकरी संप्रदाय के प्रमुख संत ज्ञानेश्वर (ज्ञानेश्वरी के रचयिता) और तुकाराम ने पंढरपुर के विठोबा (विट्ठल) की उपासना पर बल दिया तथा कर्मकांडों और संस्कृत भाषा के एकाधिकार को चुनौती दी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
→
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना से लेकर वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन तक के कालखंड, नरम दल और गरम दल की नीतियों तथा महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कांग्रेस के प्रारंभिक उदारवादी (नरम दल) नेताओं ने ब्रिटिश न्यायप्रियता में अटूट विश्वास रखते हुए 'संवैधानिक सुधारों' और 'औपनिवेशिक स्वराज' को क्रमिक तरीकों से प्राप्त करने का मार्ग अपनाया, तथा दादाभाई नौरोजी और आर.सी. दत्त जैसे नेताओं ने 'धन की निकासी' (Drain of Wealth) के सिद्धांत के माध्यम से ब्रिटिश आर्थिक शोषण को खुलकर उजागर किया।
2. वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन के पश्चात उग्रवादी (गरम दल) नेताओं—बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, बिपिन चंद्र पाल और अरविंद घोष—ने इस आंदोलन को केवल बंगाल की भौगोलिक सीमाओं तक सीमित रखने के बजाय पूरे देश में 'स्वदेशी', 'बॉयकॉट' (बहिष्कार) और 'राष्ट्रीय शिक्षा' के रूप में व्यापक जन-आंदोलन के रूप में फैलाने पर बल दिया।
3. वर्ष 1907 के ऐतिहासिक सूरत अधिवेशन में गरम दल के नेता रास बिहारी घोष को कांग्रेस अध्यक्ष बनाने के प्रस्ताव को लेकर नरम दल और गरम दल के बीच तीव्र मतभेद उत्पन्न हो गए, जिसके परिणामस्वरूप कांग्रेस का पहला औपचारिक विभाजन हुआ और संगठन पर गरमपंथियों का पूर्ण नियंत्रण स्थापित हो गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.