BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
21 views

1857 के महान विद्रोह की असफलता और उसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. विद्रोहियों के पास एक सुसंगत राजनीतिक दृष्टिकोण, आधुनिक हथियारों की कमी और केंद्रीय नेतृत्व का अभाव था, जिसके कारण संपूर्ण भारत में इसे एक समन्वित दिशा नहीं मिल सकी।
  2. 2. अधिकांश भारतीय शासकों, बड़े जमींदारों और संभ्रांत वर्गों ने या तो अंग्रेजों का सक्रिय समर्थन किया या तटस्थ बने रहे, क्योंकि उन्हें भय था कि विद्रोह की सफलता से सामंती व्यवस्था समाप्त हो जाएगी।
  3. 3. विभिन्न क्षेत्रों के विद्रोहियों और उनके स्थानीय नेताओं ने आपसी सहयोग के स्थान पर अपनी क्षेत्रीय सीमाओं तक ही संघर्ष को सीमित रखा, जिससे अंग्रेजों को एक-एक कर विद्रोह को कुचलने का अवसर मिल गया।
  4. 4. विद्रोहियों के पास आधुनिक संचार साधनों, विशेषकर रेलवे और टेलीग्राम का पूरा नियंत्रण था, जिसका उपयोग उन्होंने ब्रिटिश सेना की गतिविधियों को बाधित करने के लिए किया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

1857 का विद्रोह ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ एक बहुत बड़ा जन-विद्रोह था, लेकिन यह कई आंतरिक और बाहरी कमजोरियों के कारण असफल हो गया। इस विद्रोह की असफलता के मुख्य कारणों में केंद्रीय नेतृत्व का अभाव, आधुनिक हथियारों और संसाधनों की कमी, तथा अखिल भारतीय दृष्टिकोण का न होना शामिल था। अधिकांश बड़े जमींदार, साहूकार और रियासतों के राजा (जैसे सिंधिया, होलकर और हैदराबाद के निजाम) या तो अंग्रेजों के प्रति वफादार रहे या तटस्थ बने रहे, क्योंकि उन्हें यह आशंका थी कि यदि विद्रोह सफल हुआ तो प्राचीन सामंती और कुलीन वर्ग का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। इसके अतिरिक्त, विद्रोहियों के पास कोई साझा राजनीतिक एजेंडा नहीं था, और विभिन्न क्षेत्रों के नेताओं ने संकीर्ण क्षेत्रीय हितों के तहत संघर्ष किया। इसके विपरीत, आधुनिक संचार के साधन जैसे टेलीग्राफ और रेलवे का पूर्ण नियंत्रण अंग्रेजों के पास था, जिससे उन्हें सैन्य रणनीतियों को त्वरित रूप से लागू करने में मदद मिली। इस ऐतिहासिक घटना के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Share:

Related Questions

→ वर्ष 1857 के महान विद्रोह के तात्कालिक कारण और बैरकपुर छावनी की घटना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जनवरी 1857 में बंगाल सेना में पुरानी 'ब्राउन बेस' बंदूक के स्थान पर नई 'एनफील्ड राइफल' को शामिल किया गया था, जिसके कारतूसों में गाय और सुअर की चर्बी होने की अफवाह ने भारतीय सैनिकों की धार्मिक भावनाओं को आहत किया। 2. 29 मार्च 1857 को बैरकपुर छावनी (34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री) के सिपाही मंगल पांडे ने चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन करते हुए अपने ब्रिटिश अधिकारियों लेफ्टिनेंट बॉग और सार्जेंट ह्यूसन पर आक्रमण कर दिया था। 3. मंगल पांडे को ब्रिटिश सरकार द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया और उन पर मुकदमा चलाकर उन्हें निर्धारित तिथि से पहले ही 8 अप्रैल 1857 को फाँसी दे दी गई, जिसके परिणामस्वरूप इस घटना ने संपूर्ण उत्तर भारत में विद्रोह की चिंगारी को भड़काने का कार्य किया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → छठी शताब्दी ईसा पूर्व के 'सोलह महाजनपदों' और मगध साम्राज्य के उत्कर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अंगुत्तर निकाय और जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में सोलह महाजनपदों की सूची मिलती है, जिनमें अंग, मगध, वज्जी और मल्ल जैसे महाजनपद शामिल थे, और इनमें से वज्जी तथा मल्ल संघों में राजतांत्रिक शासन प्रणाली के स्थान पर गणतंत्रात्मक (Sangha/Gana) व्यवस्था प्रचलित थी। 2. मगध महाजनपद के शुरुआती उत्कर्ष में उसकी आरंभिक राजधानी राजगृह (गिरिव्रज) की सामरिक और भौगोलिक स्थिति का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान था, क्योंकि यह पाँच पहाड़ियों—वैभवगिरि, गृध्रकूट, ऋतगिरि, वियुपुल और सोनागिरि—से घिरी हुई एक प्राकृतिक रूप से अत्यंत सुरक्षित राजधानी थी। 3. हर्यक वंश के संस्थापक बिम्बिसार (श्रेणिक) ने वैवाहिक संबंधों और साम्राज्यवादी विजयों की नीति अपनाई, जिसके तहत उसने कौशल, मल्ल और वज्जी राजवंशों में विवाह कर अपनी स्थिति मजबूत की तथा अंग महाजनपद को जीतकर अपने साम्राज्य में मिला लिया था। 4. शिशुनाग वंश के शासक कालाशोक (ककवर्ण) के शासनकाल में ही पाटलिपुत्र में बौद्ध धर्म की द्वितीय संगीति (Council) का आयोजन किया गया था, और इसी वंश के शासनकाल के दौरान मगध ने अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी अवंती महाजनपद को पूरी तरह पराजित कर अपने अधीन कर लिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वैदिक सभ्यता और वैदिक साहित्य के विभिन्न पक्षों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ऋग्वैदिक काल में 'दुहितृ' (Duhitri) शब्द का प्रयोग उस पुत्री के लिए किया जाता था जो गाय का दूध दूहती थी, और इस समाज में राजा को 'गोपा जनाशः' (जनता का रक्षक) कहा जाता था। 2. उत्तर वैदिक काल में सभा और समिति नामक राजनीतिक संस्थाओं का प्रभाव अत्यधिक बढ़ गया था, और राजा की निरंकुशता पर अंकुश लगाने में इन दोनों सभाओं की भूमिका ऋग्वैदिक काल की तुलना में और अधिक शक्तिशाली हो गई थी। 3. शतपथ ब्राह्मण में कृषि की चारों क्रियाओं — जुताई, बुवाई, कटाई और मड़ाई — का विस्तृत वर्णन मिलता है, तथा इसमें विदेह माधव की कथा का भी उल्लेख है जिसमें गंडक (सदानिरा) नदी तक आर्यों के पूर्व की ओर विस्तार का वर्णन है। 4. वैदिक साहित्य के अंतर्गत 'अरण्यक' उन दार्शनिक ग्रंथों को कहा जाता है जिन्हें जंगलों में पढ़ा जाता था और जो मुख्यतः यज्ञों के बाह्य कर्मकांडों के स्थान पर उनके रहस्यवादी व दार्शनिक पक्षों की व्याख्या करते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → फारसी राजदूत "अब्दुल रज्जाक" किसके शासनकाल में विजयनगर आया था? → मुगल प्रशासन में "सवानिह-निगार" किस प्रकार का अधिकारी होता था?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.