त्वरित लिंक्स
History of India
12 views
1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार में वीर कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह के नेतृत्व, सैन्य रणनीतियों और संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. बाबू कुंवर सिंह ने जगदीशपुर छोड़ने के बाद अपने सैन्य अभियानों के दौरान मिर्जापुर, बांदा और रीवा के राजाओं से सहायता प्राप्त करते हुए कानपुर और लखनऊ में नाना साहब की सेना के साथ मिलकर अंग्रेजों के विरुद्ध प्रभावी सैन्य कार्रवाई की थी।
- 2. ब्रिटिश सेनापति मेजर विन्सेंट आयर और कैप्टन ली ग्रैंड के विरुद्ध लड़े गए संघर्षों में कुंवर सिंह ने अपनी अद्भुत छापामार युद्ध (Guerrilla Warfare) शैली का परिचय दिया, और बीबीगंज के निकट हुए निर्णायक संघर्ष में कैप्टन ली ग्रैंड की सेना को पूरी तरह पराजित कर दिया था।
- 3. अप्रैल 1858 में अपनी अंतिम लड़ाई में ब्रिटिश जनरल डगलस की सेना को परास्त करते हुए जगदीशपुर वापस लौटते समय कुंवर सिंह ने गंगा नदी पार करते वक्त दाहिने हाथ में गोली लगने पर स्वयं अपनी तलवार से अपना हाथ काटकर गंगा में अर्पित कर दिया था।
- 4. कुंवर सिंह की मृत्यु (26 अप्रैल 1858) के पश्चात उनके छोटे भाई अमर सिंह ने कैमूर की पहाड़ियों (कैमूर रेंज) से अंग्रेजों के विरुद्ध समानांतर सरकार और सफल छापामार प्रतिरोध जारी रखा, तथा जंगल युद्ध की नीति अपनाकर ब्रिटिश सत्ता की नींद उड़ा दी थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के जगदीशपुर में बाबू कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह का नेतृत्व भारतीय इतिहास में अद्वितीय सामरिक और रणनीतिक कौशल का प्रतीक है। कुंवर सिंह ने न केवल जगदीशपुर और आरा क्षेत्र में ब्रिटिश सेना के दांत खट्टे किए, बल्कि मध्य भारत और उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में नाना साहब के साथ मिलकर अंग्रेजों को चुनौती दी। मेजर विन्सेंट आयर और कैप्टन ली ग्रैंड के खिलाफ उनकी सैन्य रणनीतियाँ और बीबीगंज का संघर्ष उनकी श्रेष्ठ छापामार युद्ध शैली को दर्शाता है। अप्रैल 1858 में गंगा नदी पार करते समय हाथ में गोली लगने पर स्वयं हाथ काटकर अर्पित करने की घटना उनकी अदम्य साहस को दर्शाती है। उनकी मृत्यु के बाद उनके भाई अमर सिंह ने कैमूर की पहाड़ियों से ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ सशस्त्र प्रतिरोध और समानांतर सरकार का संचालन जारी रखा। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
→
वर्धन राजवंश तथा दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) की राजनीतिक, प्रशासनिक और सांस्कृतिक प्रणालियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हर्षवर्धन के शासनकाल के दौरान कन्नौज सभा का मुख्य उद्देश्य महायान बौद्ध धर्म का प्रचार करना और चीनी यात्री ह्वेनसांग के सम्मान में एक विशाल उत्सव का आयोजन करना था, जिसमें बीस राजाओं और विभिन्न संप्रदायों के विद्वानों ने भाग लिया था।
2. बादामी के चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था, और इस ऐतिहासिक विजय का विस्तृत विवरण हमें कांचीपुरम के मुक्ताश्वर मंदिर से प्राप्त महाकूट स्तंभ शिलालेख में मिलता है।
3. पल्लव राजा महेंद्रवर्मन प्रथम ने अपने प्रारंभिक जीवन में जैन धर्म का अनुयायी होने के बावजूद शैव संत अप्पर के प्रभाव में आकर शैव धर्म स्वीकार किया था, तथा उन्होंने 'मत्तविलासन प्रहसन' जैसे प्रसिद्ध संस्कृत नाटक की रचना की थी।
4. चोल प्रशासन की 'उर' और 'सभा' जैसी स्वायत्त शासी ग्रामीण संस्थाओं का विस्तृत विवरण हमें परंतक प्रथम के प्रसिद्ध 'उत्तरामेरूर शिलालेख' से प्राप्त होता है, जो स्थानीय स्वशासन की उत्कृष्ट प्रणाली को दर्शाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
→
फारसी राजदूत "अब्दुल रज्जाक" किसके शासनकाल में विजयनगर आया था?
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान झांसी और ग्वालियर क्षेत्र में रानी लक्ष्मीबाई तथा तात्या टोपे के सैन्य अभियानों, रणनीतिक चालों और अंतिम संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मार्च 1858 में ब्रिटिश सेनापति सर ह्यूरोज द्वारा झांसी की दुर्भेद्य किलेबंदी की घेराबंदी किए जाने पर, रानी लक्ष्मीबाई ने कड़ा प्रतिरोध किया और तात्या टोपे की सेना द्वारा बेतवा नदी के तट पर सहायता के लिए पहुँचने पर अंग्रेजों को भारी क्षति पहुँचाई, किंतु अंततः तात्या टोपे की पराजय के बाद उन्हें झांसी छोड़नी पड़ी।
2. झांसी के पतन के उपरांत रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ने कालपी में मिलकर एक संयुक्त मोर्चा बनाया, और कालपी के युद्ध में पराजित होने के बाद वे ग्वालियर की ओर बढ़े, जहाँ ग्वालियर के सिंधिया शासक जयाजीराव सिंधिया अंग्रेजों का पक्ष छोड़कर विद्रोहियों से आ मिले।
3. ग्वालियर पर अधिकार करने के पश्चात विद्रोहियों ने नाना साहब को पेशवा घोषित कर दिया और ग्वालियर के किले को अपना सैन्य केंद्र बनाया, जहाँ 18 जून 1858 को ब्रिटिश सेना के साथ हुए निर्णायक युद्ध में रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुईं।
4. ग्वालियर के पतन के बाद तात्या टोपे ने रानी के बलिदान से प्रेरणा लेते हुए मध्य भारत और राजस्थान के जंगलों में प्रवेश किया, जहाँ उन्होंने छापामार युद्ध (Guerrilla Warfare) की नीति अपनाई और अंततः नरवर के एक स्थानीय जागीरदार मानसिंह के विश्वासघात के कारण अंग्रेजों द्वारा पकड़े जाने पर शिवपुरी में उन्हें फांसी दे दी गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
जहाँगीर की रानी कौन थी?
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व करते हुए बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिस कादिर को अवध का नवाब घोषित किया और ब्रिटिश सेना के विरुद्ध युद्ध का संचालन किया।
2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'फैजाबाद का डंका शाह' (या फैजाबाद का लाइटहाउस) भी कहा जाता है, ने अंग्रेजों के विरुद्ध जिहाद का आह्वान किया और चिनहट के युद्ध में ब्रिटिश सेना को पराजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
3. बेगम हजरत महल ने ब्रिटिश सेना की दमनकारी नीतियों के आगे कभी आत्मसमर्पण नहीं किया और अंततः नेपाल जाकर शरण ली, जहाँ उनकी मृत्यु हुई।
4. मौलवी अहमदुल्लाह शाह को ब्रिटिश सरकार द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया था और उन पर मुकदमा चलाकर उन्हें फांसी दे दी गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.