त्वरित लिंक्स
History of India
18 views
ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों (स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लागू 'स्थाई बंदोबस्त' (Permanent Settlement) के तहत भू-राजस्व की दर को हमेशा के लिए निश्चित कर दिया गया था, जिसके कारण सरकार को भविष्य में कृषि उत्पादन में वृद्धि से होने वाले वित्तीय लाभ का हिस्सा नहीं मिल पाया, जबकि जमींदारों की स्थिति अत्यधिक मजबूत हो गई।
- 2. थॉमस मुनरो और कैप्टन रीड द्वारा मुख्य रूप से मद्रास और बंबई प्रेसीडेंसी में विकसित 'रयतवारी व्यवस्था' (Ryotwari System) में ब्रिटिश सरकार और व्यक्तिगत किसान (रयत) के बीच सीधा समझौता होता था, जिसमें लगान सीधे किसानों से वसूला जाता था और भूमि का स्वामित्व किसानों के पास होता था, किंतु राजस्व की दरें अत्यधिक उच्च और अनम्य थीं।
- 3. हॉल्ट मैकेंज़ी और रॉबर्ट मार्टिन बर्ड द्वारा उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब में लागू 'महालवारी व्यवस्था' (Mahalwari System) के अंतर्गत भू-राजस्व का निर्धारण व्यक्तिगत किसान या जमींदार के स्तर पर न करके संपूर्ण ग्राम समुदाय या महाल के स्तर पर किया जाता था, और राजस्व भुगतान के लिए पूरा ग्राम समुदाय सामूहिक रूप से उत्तरदायी होता था।
- 4. इन तीनों भू-राजस्व प्रणालियों का दीर्घकालिक परिणाम यह हुआ कि भारतीय कृषि का बड़े पैमाने पर व्यवसायीकरण (Commercialization of Agriculture) हुआ, जिससे गरीब किसानों को उनकी फसलों के अंतरराष्ट्रीय बाजार मूल्य का भारी लाभ मिला और ग्रामीण ऋणग्रस्तता पूरी तरह समाप्त हो गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
ब्रिटिश शासन काल में भारत में तीन प्रमुख भू-राजस्व प्रणालियाँ लागू की गईं—स्थाई बंदोबस्त (Permanent Settlement), रयतवारी व्यवस्था (Ryotwari System) और महालवारी व्यवस्था (Mahalwari System)। ये तीनों प्रणालियाँ भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था के शोषण और औपनिवेशिक दोहन का मुख्य आधार थीं। कथन 1 सही है क्योंकि लॉर्ड कार्नवालिस द्वारा 1793 में बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लागू स्थाई बंदोबस्त के तहत जमींदारों को भूमि का मालिक बना दिया गया और राजस्व हमेशा के लिए तय कर दिया गया, जिससे सरकार को भविष्य के लाभ में हिस्सा नहीं मिला। कथन 2 सही है क्योंकि रयतवारी व्यवस्था में सरकार और रयत (किसान) के बीच सीधा संबंध था और किसानों को स्वामित्व तो मिला, किंतु भारी लगान के कारण वे साहूकारों के चंगुल में फंस गए। कथन 3 सही है क्योंकि महालवारी प्रणाली में पूरे ग्राम समुदाय (महाल) को राजस्व भुगतान के लिए उत्तरदायी बनाया गया था। कथन 4 गलत है क्योंकि कृषि के व्यवसायीकरण से किसानों को कोई लाभ नहीं मिला, बल्कि वे नील, कपास और अफीम जैसी नकद फसलें उगाने के लिए बाध्य हुए जिससे खाद्यान्न संकट और गंभीर ऋणग्रस्तता उत्पन्न हुई। इस विषय के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
→
तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध के बाद अंग्रेजों ने "पेशवा" के पद को क्या किया?
→
मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था और राजस्व सुधारों के संदर्भ में, 'दहसाला' (या बन्दोबस्त) प्रणाली के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस राजस्व प्रणाली को अकबर के शासनकाल में उनके योग्य वित्त मंत्री राजा टोडरमल द्वारा वर्ष 1580 में पूर्ण रूप से लागू किया गया था, जिसे 'आइन-ए-दहसाला' भी कहा जाता है।
2. इस व्यवस्था के तहत पिछले दस वर्षों (1570 से 1579 तक) के दौरान विभिन्न फसलों के औसत उत्पादन और औसत बाजार मूल्यों का सावधानीपूर्वक अध्ययन कर राजस्व का निर्धारण किया गया था।
3. इस बंदोबस्त प्रणाली के अंतर्गत भूमि को चार श्रेणियों—पलाज, परती, चाचर और बंजर—में वर्गीकृत किया गया था, जिसमें से 'चाचर' भूमि पर खेती करना सबसे आसान था क्योंकि वह प्रतिवर्ष उपजाऊ बनी रहती थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
→
सिंधु घाटी सभ्यता की परिपक्व अवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित पुराश स्थलों और उनकी विशिष्ट विशेषताओं पर विचार कीजिए:
1. धौलाविरा (गुजरात): यह शहर तीन भागों (दुर्ग, मध्यम नगर और निचला नगर) में विभाजित था तथा यहाँ से एक अत्यंत विशिष्ट 'जल प्रबंधन प्रणाली' (जैसे बड़े जलाशय और पत्थर से बने जलकुंड) और एक बड़ा शिलालेख मिला है जिसमें हड़प्पा लिपि के बड़े आकार के चिन्ह उकेरे गए हैं।
2. चान्हूदोड़ो (सिंध, पाकिस्तान): यह एकमात्र ऐसा हड़प्पा स्थल है जहाँ कोई दुर्ग (Citadel) नहीं था, और यह स्थल मनके बनाने के कारखाने (Bead-making factory), ताँबे की मुद्राएँ और वक्राकार ईंटों के साक्ष्य के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
3. लोथल (गुजरात): यहाँ से कृत्रिम गोदीबाड़ा (Dockyard) के साक्ष्य मिले हैं जो यह प्रमाणित करते हैं कि यह सिंधु सभ्यता का एक प्रमुख बंदरगाह और व्यापारिक केंद्र था, जहाँ से चावल और बाजरा के अवशेष तथा फारसी मोहरें भी प्राप्त हुई हैं।
4. कालीबंगा (राजस्थान): यहाँ से जूते हुए खेत (Ploughed field) के साक्ष्य, प्राक्-हड़प्पा और परिपक्व हड़प्पा दोनों स्तरों के अवशेष तथा अग्नि वेदियों (Fire altars) की पंक्तियाँ मिली हैं, जो धार्मिक अनुष्ठानों या यज्ञीय परंपराओं की ओर संकेत करती हैं।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
→
1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों—विशेषकर पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा—में हुई गतिविधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पटना सिटी में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व पीर अली खान नामक एक पुस्तक विक्रेता ने किया था, जिनके घर पर क्रांतिकारी परचे और झंडे मिले थे, तथा कमिश्नर विलियम टेलर के आदेश पर उन्हें सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई थी।
2. दानापुर छावनी के 7वीं, 8वीं और 40वीं रेजिमेंट के सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार कर जगदीशपुर के बाबू कुंवर सिंह से जा मिले, जिससे इस क्षेत्रीय संघर्ष को एक राष्ट्रीय आयाम मिला।
3. मुजफ्फरपुर और छपरा (सारण) क्षेत्रों में विद्रोह का प्रसार करने में स्थानीय जमींदारों के साथ-साथ दानापुर से आए विद्रोही सैनिकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, तथा छपरा में विद्रोहियों ने सरकारी खजाने पर अधिकार कर जेल तोड़कर बंदियों को रिहा कर दिया था।
4. दानापुर के सैनिकों के विद्रोह के बाद ब्रिटिश कमिश्नर विलियम टेलर ने पटना के तीन प्रमुख वहाबी नेताओं—मौलाना अहमदुल्लाह, शाह मुहम्मद हुसैन और वाइज उल हक—को बातचीत के बहाने पटना में गिरफ्तार कर नजरबंद कर लिया था, जिससे शहर में तीव्र आक्रोश फैल गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
सत्रहवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में भारत में यूरोपीय कंपनियों के व्यापारिक विस्तार और पुर्तगाली-ब्रिटिश संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1612 में 'स्वाली की लड़ाई' (Battle of Swally) में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के कैप्टन थॉमस बेस्ट ने पुर्तगाली नौसेना को पराजित किया था, जिससे मुगल दरबार में अंग्रेजों की साख बढ़ी और जहांगीर ने उन्हें सूरत में स्थायी कारखाना स्थापित करने की शाही अनुमति प्रदान की।
2. पुर्तगालियों द्वारा भारतीय समुद्रों में व्यापारिक जहाजों पर कर वसूलने के लिए लागू की जाने वाली 'कार्टाज' (Cartaz) व्यवस्था का विरोध करते हुए ब्रिटिश कंपनी ने एशियाई व्यापारियों को बिना कर के स्वतंत्र आवाजाही का पूर्ण अधिकार देने की घोषणा की थी।
3. वर्ष 1615 में ब्रिटिश सम्राट जेम्स प्रथम के राजदूत के रूप में सर थॉमस रो जहांगीर के दरबार में उपस्थित हुए, जिनका मुख्य उद्देश्य संपूर्ण भारत में बिना किसी शुल्क के व्यापार करने और अपने कारखाने खोलने का व्यापक अधिकार प्राप्त करना था, जिसमें उन्हें आंशिक सफलता मिली।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.