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History of India
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गुप्त साम्राज्य और मौर्योत्तर काल के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. गुप्त काल में 'भूमि छिद्र न्याय' (Bhumichhidra Nyaya) की अवधारणा के अंतर्गत बंजर या बेकार पड़ी भूमि को कृषि योग्य बनाने वाले व्यक्ति को उस भूमि पर पूर्ण स्वामित्व का अधिकार मिल जाता था, जिस पर राज्य द्वारा कोई कर नहीं वसूला जाता था।
- 2. सातवाहन काल में प्रचलित 'अग्रहार' व्यवस्था के तहत ब्राह्मणों और बौद्ध भिक्षुओं को कर-मुक्त भूमि या गाँवों के दान की शुरुआत हुई, जिससे सामंती प्रवृत्तियों और प्रशासनिक विकेंद्रीकरण को बढ़ावा मिला।
- 3. गुप्त सम्राट कुमारगुप्त प्रथम के शासनकाल में नालंदा महाविहार की स्थापना की गई थी, जिसे बाद में बौद्ध शिक्षा के एक महान केंद्र के रूप में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हुई।
- 4. सुदर्शन झील का जीर्णोद्धार मौर्य काल से लेकर गुप्त काल तक कई शासकों द्वारा कराया गया, और गुप्त शासक स्कन्दगुप्त के जूनागढ़ अभिलेख के अनुसार उसके गवर्नर पर्णदत्त ने इस झील के टूटे हुए बाँध की मरम्मत करवाई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। गुप्त काल और मौर्योत्तर काल भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग और प्रशासनिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण काल माने जाते हैं। इस काल में आर्थिक, धार्मिक और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलाव आए, जैसे भूमि अनुदान प्रणाली, नालंदा विश्वविद्यालय का उत्थान और सिंचाई व्यवस्था का प्रबंधन। विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था और मनसबदारी प्रथा के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मनसबदारी प्रथा मूल रूप से मंगोलों की दशमलव प्रशासनिक प्रणाली पर आधारित थी, जिसे अकबर ने अपने शासनकाल के 11वें वर्ष में औपचारिक रूप से प्रशासनिक व्यवस्था के रूप में संस्थागत रूप प्रदान किया था।
2. मनसबदारों के वर्गीकरण में 'जात' (Zat) पद मनसबदार के व्यक्तिगत वेतन और उसकी पदानुक्रमित स्थिति को निर्धारित करता था, जबकि 'सवार' (Sawar) पद उसके द्वारा रखे जाने वाले घोड़ों और घुड़सवार सैनिकों की वास्तविक संख्या का बोध कराता था।
3. शाहजहां के शासनकाल में मनसबदारी प्रथा में 'दो-अस्पा सिह-अस्पा' (Do-aspa Sih-aspa) नामक नई व्यवस्था जोड़ी गई थी, जिसके अंतर्गत मनसबदारों को अपने मूल सवार पद से दोगुने घोड़े बिना किसी अतिरिक्त 'जात' पद बढ़ाए रखने होते थे।
4. जहांगीर ने मनसबदारी व्यवस्था में सुधार करते हुए 'स्पिरिट-ए-मशरुत' (Conditioned Rank) नियम लागू किया, जिसके तहत संकटकाल या विशेष अभियानों के समय मनसबदारों को बिना 'जात' बढ़ाए उनके 'सवार' पदों में अस्थायी रूप से वृद्धि करने की अनुमति दी जाती थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान विभिन्न ब्रिटिश सैन्य अधिकारियों और उनके द्वारा विद्रोह को कुचले गए क्षेत्रों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. जॉन निकलसन — दिल्ली में विद्रोह को दबाने के दौरान ब्रिटिश सेना का नेतृत्व किया और कश्मीरी गेट पर संघर्ष करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।
2. सर कॉलिन कैंपबेल — लखनऊ और कानपुर क्षेत्र में विद्रोहियों का दमन किया तथा अवध की घेराबंदी समाप्त करने में मुख्य भूमिका निभाई।
3. सर ह्यूरोज — झाँसी, ग्वालियर और सेंट्रल इंडिया के क्षेत्र में रानी लक्ष्मीबाई व तात्या टोपे की सेना के विरुद्ध सैन्य अभियान का संचालन किया।
4. कर्नल जेम्स नील — कलकत्ता से इलाहाबाद और कानपुर की ओर बढ़ते हुए विद्रोही सैनिकों के खिलाफ अत्यधिक क्रूरता का परिचय दिया।
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
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सत्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित मराठा साम्राज्य के प्रशासनिक ढांचे, सैन्य संगठन और राजनैतिक प्रणालियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिवाजी महाराज के केंद्रीय प्रशासन में 'अष्टप्रधान' मंडल का गठन किया गया था, जिसमें प्रत्येक मंत्री सीधे सम्राट के प्रति उत्तरदायी होता था और इनमें 'पेशवा' (मुख्य प्रधान) के पश्चात दूसरा सर्वाधिक महत्वपूर्ण पद 'मजूमदार' या 'अमात्य' का था जो राज्य की आय-व्यय (राजस्व विभाग) की देखरेख करता था।
2. मराठा सैन्य व्यवस्था में घुड़सवार सेना दो प्रमुख श्रेणियों में बंटी थी—'बरगीर' (जिन्हें राज्य की ओर से घोड़े और शस्त्र दिए जाते थे) और 'सिलहदार' (जो स्वयं अपने घोड़े और हथियार सुसज्जित करते थे), तथा सेना में अनुशासन अत्यंत कड़ा था जिसके तहत सैनिकों को लूट का माल व्यक्तिगत रूप से अपने पास रखने की पूर्ण स्वतंत्रता थी।
3. शिवाजी की राजस्व प्रणाली मुख्य रूप से मलिक अंबर की रयतवाड़ी व्यवस्था पर आधारित थी, जिसके अंतर्गत भूमि की पैमाइश कराकर राज्य का हिस्सा कुल उपज का पहले 33% निर्धारित किया गया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 40% कर दिया गया तथा किसानों को तकावी ऋण और नकद भुगतान की सुविधा दी गई।
4. मराठा साम्राज्य की वित्तीय सुदृढ़ता के लिए पड़ोसी क्षेत्रों से वसूले जाने वाले 'चौथ' (कुल राजस्व का 25%) और 'सरदेशमुखी' (अतिरिक्त 10% कर) में, चौथ इस बात का प्रतिफल था कि मराठा सेना उस क्षेत्र पर आक्रमण नहीं करेगी, जबकि सरदेशमुखी शिवाजी द्वारा अपने आपको पूरे क्षेत्र का प्रधान वंशागत देशमुख (सरपंच) माने जाने के अधिकार के रूप में वसूला जाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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