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History of India
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1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिस कादिर को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ में विद्रोह की कमान संभाली और ब्रिटिश सेनानायक हेनरी लॉरेंस को रेजिडेंसी में घेर लिया था, जो बाद में नेपाल की ओर प्रस्थान कर गईं जहाँ उनकी मृत्यु हो गई।
- 2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'फैजाबाद का डंका शाह' भी कहा जाता है, ने अंग्रेजों के विरुद्ध जिहाद का आह्वान किया और चिनहट के युद्ध में ब्रिटिश सेना को परास्त करने में मुख्य रणनीतिकार की भूमिका निभाई थी।
- 3. लखनऊ पर पुनः अधिकार करने के लिए ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने अभियान चलाया, जिसमें मौलवी अहमदुल्लाह शाह को गिरफ्तार कर लिया गया और युद्ध अपराध के आरोप में लखनऊ के चौराहे पर सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई थी।
- 4. बेगम हजरत महल ने ब्रिटिश महारानी विक्टोरिया की 1858 की उद्घोषणा का स्वागत करते हुए बिना किसी शर्त के ब्रिटिश सेना के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्णय लिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
1857 के विद्रोह के दौरान अवध और लखनऊ में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने अंग्रेजों के खिलाफ अत्यंत दृढ़ता से संघर्ष किया था। बेगम हजरत महल ने अपने पुत्र बिरजिस कादिर को नवाब घोषित कर लखनऊ की बागडोर संभाली और हेनरी लॉरेंस को रेजिडेंसी में घेर लिया। पराजय के बाद वह नेपाल चली गईं जहाँ उनकी मृत्यु हुई। मौलवी अहमदुल्लाह शाह ('फैजाबाद का डंका शाह') ने चिनहट के युद्ध (30 जून 1857) में विद्रोहियों का नेतृत्व कर ब्रिटिश सेना को हराया था। हालांकि, कथन 3 गलत है क्योंकि मौलवी अहमदुल्लाह शाह को अंग्रेजों द्वारा गिरफ्तार नहीं किया गया था, बल्कि रुहेलखंड के पववाई के राजा के विश्वासघात के कारण ब्रिटिश सैनिकों द्वारा उनकी हत्या कर दी गई थी। कथन 4 भी गलत है क्योंकि बेगम हजरत महल ने महारानी विक्टोरिया की घोषणा का अस्वीकार करते हुए आत्मसमर्पण करने से स्पष्ट इनकार कर दिया था। इस विषय के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और खेड़ा सत्याग्रह (1918) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चंपारण सत्याग्रह के दौरान राजकुमार शुक्ल के आमंत्रण पर महात्मा गांधी जब बिहार पहुँचे, तब यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर लागू की जाने वाली 'तीनकथा प्रणाली' (जहाँ कुल भूमि के 3/20 भाग पर नील की खेती करना अनिवार्य था) के विरुद्ध एक तीव्र कानूनी और जन आंदोलन चलाया गया, जिसके दबाव में सरकार को 'चंपारण कृषि अधिनियम' (Champaran Agrarian Act) पारित करना पड़ा।
2. खेड़ा सत्याग्रह (गुजरात) के दौरान फसल खराब होने के बावजूद ब्रिटिश प्रशासन द्वारा लगान वसूली माफ न किए जाने पर महात्मा गांधी और सरदार वल्लभभाई पटेल ने किसानों को लगान न देने का 'no-rent campaign' (कर नहीं आंदोलन) चलाने का सफल नेतृत्व किया, जिसके परिणामस्वरूप सरकार ने केवल उन्हीं किसानों से लगान वसूलने का आदेश दिया जो भुगतान करने में सक्षम थे।
3. वर्ष 1918 में ही अहमदाबाद मिल हड़ताल के दौरान महात्मा गांधी ने पहली बार भारत में सुनियोजित रूप से भूख हड़ताल (Hunger Strike) का अस्त्र प्रयोग किया, जिसका कारण मिल मालिकों द्वारा 'प्लेग बोनस' (Plague Bonus) को समाप्त करना और मजदूरों की माँगों को ठुकरा देना था।
4. चंपारण सत्याग्रह के तुरंत बाद ब्रिटिश सरकार द्वारा गठित 'चंपारण जाँच समिति' (Champaran Agrarian Committee) में महात्मा गांधी को भी एक सदस्य के रूप में शामिल किया गया था, और इस समिति की सर्वसम्मत रिपोर्ट के आधार पर अवैध रूप से वसूले गए धन का 50 प्रतिशत हिस्सा किसानों को वापस लौटाने का प्रावधान किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना और नरम दल-गरम दल काल (1885-1919) के वैचारिक परिप्रेक्ष्य, कार्यप्रणाली तथा प्रमुख घटनाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कांग्रेस के प्रारंभिक चरण (1885-1905) के नरमपंथी नेताओं का मुख्य विश्वास 'ब्रिटिश न्यायप्रियता' में था, और उन्होंने ब्रिटिश संसद में भारतीय प्रतिनिधित्व की मांग को लेकर वर्ष 1889 में विलियम वेडरबर्न और दाभाई नौरोजी के प्रयासों से लंदन में 'ब्रिटिश कमेटी ऑफ इंडियन नेशनल कांग्रेस' की स्थापना की थी।
2. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस के विभाजन के पीछे मुख्य वैचारिक मतभेद यह था कि गरम दल के नेता पूरे देश में स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन का विस्तार करना चाहते थे, जबकि नरमपंथियों का मानना था कि यह आंदोलन केवल बंगाल तक ही सीमित रहना चाहिए और इसे अंग्रेजों के विरुद्ध एक व्यापक प्रत्यक्ष कार्रवाई के रूप में नहीं चलाया जाना चाहिए।
3. वर्ष 1916 के लखनऊ अधिवेशन में कांग्रेस के दोनों दलों के पुनर्मिलन और कांग्रेस-लीग समझौते (लखनऊ पैक्ट) में लोकमान्य तिलक और मुहम्मद अली जिन्ना की महत्वपूर्ण भूमिका थी, किंतु इस समझौते की एक बड़ी भूल यह थी कि इसने मुसलमानों के लिए 'पृथक निर्वाचक मंडल' (Separate Electorates) की मांग को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार कर लिया, जिसे भविष्य के सांप्रदायिक विभाजन का मार्गप्रशस्त करने वाला माना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह की असफलता के पीछे निहित कारणों और नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विद्रोहियों के पास किसी केंद्रीय नेतृत्व, सर्वमान्य राजनीतिक दृष्टिकोण या सुनियोजित सैन्य रणनीति का पूर्ण अभाव था; यद्यपि मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को प्रतीकात्मक नेता घोषित किया गया था, किंतु उनके पास न तो वास्तविक सैन्य नियंत्रण था और न ही विभिन्न क्षेत्रों के विद्रोही नेताओं के बीच कोई प्रभावी समन्वय था।
2. भारतीय समाज का एक बड़ा और प्रभावशाली वर्ग — जिसमें अधिकांश बड़े जमींदार, साहूकार, और आधुनिक शिक्षा प्राप्त मध्यम वर्ग शामिल था — इस विद्रोह से या तो तटस्थ रहा या उसने ब्रिटिश शासन का सक्रिय समर्थन किया, क्योंकि उन्हें यह भय था कि विद्रोह की सफलता से देश में पुनः सामंती अराजकता और पूर्व-आधुनिक व्यवस्था लौट आएगी।
3. ब्रिटिश सेना के पास आधुनिक संचार साधनों (जैसे टेलीग्राफ), रेलवे, अत्यधिक उन्नत तोपखाने और प्रशिक्षित सैन्य नेतृत्व की भारी बढ़त थी, जबकि विद्रोहियों के पास संसाधनों की भारी कमी थी और वे मुख्य रूप से पारंपरिक हथियारों पर निर्भर थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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ज्वालामुखी मंदिर से लूटे गए संस्कृत ग्रंथों का फारसी में अनुवाद "दलायल-ए-फिरोजशाही" के नाम से किसने किया था?
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1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में विद्रोह के नेतृत्व, प्रशासनिक संरचना और उससे जुड़े प्रमुख व्यक्तित्वों—नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां—के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नाना साहब ने कानपुर में ब्रिटिश सेनापति सर ह्यूग व्हीलर को पराजित करने के पश्चात स्वयं को पेशवा घोषित किया और खुद को पेशवा बाजीराव द्वितीय का उत्तराधिकारी मानते हुए औपचारिक रूप से ब्रिटिश सत्ता को चुनौती दी।
2. अजीमुल्ला खां, जो नाना साहब के मुख्य सलाहकार और रणनीतिकार थे, ने विद्रोही ताकतों के बीच समन्वय स्थापित करने के साथ-साथ यूरोपीय कूटनीति के तहत विद्रोही पक्ष का संदेश तुर्की और अन्य बाहरी शक्तियों तक पहुँचाने का प्रयास किया था।
3. कानपुर के पतन के बाद तात्या टोपे ने ग्वालियर की सिंधिया सेना को अपने पक्ष में मिला लिया और रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर कालपी के युद्ध में अंग्रेजों के विरुद्ध भीषण संघर्ष का संचालन किया था।
4. कानपुर में अंतिम रूप से पराजय के पश्चात नाना साहब ने अंग्रेजों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था, जिसके बाद ब्रिटिश अदालत द्वारा मुकदमा चलाकर उन्हें अंडमान और निकोबार (सेल्यूलर जेल) निर्वासित कर दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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