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History of India
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां द्वारा किए गए नेतृत्व और रणनीतिक गतिविधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. कानपुर में विद्रोह की शुरुआत जून 1857 में हुई थी, जहाँ नाना साहब ने स्वयं को पेशवा घोषित किया और बिठूर को अपना मुख्य केंद्र बनाकर अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष का संचालन किया।
- 2. तात्या टोपे ने नाना साहब के सेनापति के रूप में कानपुर की सेना का प्रभावी नेतृत्व किया तथा बाद में कालपी और ग्वालियर के युद्धों में रानी लक्ष्मीबाई का सैन्य सहयोग भी किया।
- 3. अजीमुल्ला खां, जो नाना साहब के मुख्य सलाहकार और कूटनीतिक दूत थे, ने ब्रिटिश नीतियों के विरुद्ध जनमत तैयार करने तथा यूरोपीय स्तर पर संपर्क साधने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
- 4. कानपुर में ब्रिटिश सेना के समर्पण के उपरांत घटित 'सतीचौरा घाट नरसंहार' की घटना में नाना साहब की सीधी व्यक्तिगत संलिप्तता के अकाट्य प्रमाण तत्कालीन ब्रिटिश अदालतों में पूर्णतः सिद्ध हो चुके थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र होने के नाते अपनी पेंशन बंद किए जाने से अंग्रेजों के विरुद्ध थे। उन्होंने जून 1857 में कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व किया और स्वयं को पेशवा घोषित कर बिठूर से गतिविधियों का संचालन किया। उनके वफादार सैन्य कमांडर तात्या टोपे ने कानपुर तथा बाद में कालपी और ग्वालियर में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर अंग्रेजों को कड़ी टक्कर दी। अजीमुल्ला खां नाना साहब के मुख्य सलाहकार और कूटनीतिक दूत थे। हालांकि, 'सतीचौरा घाट नरसंहार' में नाना साहब की व्यक्तिगत संलिप्तता के कोई अकाट्य या स्पष्ट प्रमाण इतिहासकारों द्वारा समर्थित नहीं हैं, और इस घटना की पृष्ठभूमि को लेकर आज भी इतिहासकारों में मतभेद है। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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बौद्ध धर्म और जैन धर्म के दार्शनिक सिद्धांतों तथा उनके संघ के प्रबंधकीय स्वरूप के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बौद्ध धर्म के विपरीत जैन धर्म ने 'अनेकांतवाद' (स्यादवाद) के सिद्धांत को प्रतिपादित किया, जिसके अनुसार सत्य बहुआयामी है और किसी भी वस्तु का पूर्ण ज्ञान केवल 'केवली' को ही प्राप्त हो सकता है, जबकि साधारण मनुष्य का ज्ञान अपूर्ण और सापेक्ष होता है।
2. जहाँ बौद्ध संघ की सदस्यता के लिए न्यूनतम आयु सीमा 15 वर्ष निर्धारित की गई थी, वहीं जैन संघ में प्रवेश के लिए कोई आयु प्रतिबंध नहीं था और चातुर्यम धर्म (जो पार्श्वनाथ द्वारा प्रतिपादित था) में महावीर स्वामी ने 'ब्रह्मचर्य' को जोड़कर इसे 'पंचमहाव्रत' के रूप में स्थापित किया।
3. बौद्ध धर्म ने वेदों की प्रमाणिकता और वैदिक यज्ञों की पवित्रता को पूर्णतः स्वीकार किया, जबकि जैन धर्म ने वेदों को अपौरुषेय मानने से इनकार करते हुए उनके कर्मकांडी स्वरूप और पशु बलि की घोर निंदा की।
4. द्वितीय बौद्ध संगीति का आयोजन वैशाली में कालाशोक के शासनकाल में हुआ था, जबकि प्रथम जैन संगीति पाटलिपुत्र में स्थूलभद्र की अध्यक्षता में हुई थी, जिसमें जैन ग्रंथों का संकलन कर '12 अंगों' का निर्माण किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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1857 के महान विद्रोह के तात्कालिक कारण और चर्बी वाले कारतूस की घटना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रिटिश सेना में पुराने 'ब्राउन बेस' मस्कट के स्थान पर शामिल की गई नई 'एनफील्ड राइफल' के कारतूसों में गाय और सुअर की चर्बी के प्रयोग की अफवाह ने भारतीय सैनिकों में भारी आक्रोश उत्पन्न किया, क्योंकि इसे उनकी धार्मिक और जातीय आस्था पर सीधा प्रहार माना गया।
2. जनवरी 1857 में दमदम छावनी के एक लांस नायक ने ब्रिटिश अधिकारी के सामने यह खुलासा किया कि कारतूस के आवरण को दांतों से काटने से पहले उसे सूअर और गाय की चर्बी से चिकना किया जाता है, जिससे यह बात सेना में आग की तरह फैल गई।
3. बैरकपुर छावनी (34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के आदेश का विरोध करते हुए अपने वरिष्ठ अधिकारियों सार्जेंट ह्यूग बास और लेफ्टिनेंट बॉब पर हमला कर दिया और उन्हें मौत के घाट उतार दिया।
4. इस घटना के तुरंत बाद ब्रिटिश सैन्य अदालत द्वारा मंगल पांडे को 8 अप्रैल 1857 को फांसी दे दी गई, तथा उनकी रेजिमेंट 34वीं एनआई को इस विद्रोह में संलिप्तता के कारण मई 1857 में आधिकारिक रूप से भंग कर दिया गया था।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिस कादिर को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ में विद्रोह की बागडोर संभाली और ब्रिटिश रेजिडेंसी की घेराबंदी का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया था।
2. 'फैजाबाद के मौलवी' के रूप में विख्यात अहमदुल्लाह शाह ने चिनहट के युद्ध में ब्रिटिश सेनापति हेनरी लॉरेंस की सेना को पराजित करने में अहम सामरिक और रणनीतिक नेतृत्व प्रदान किया था।
3. अहमदुल्लाह शाह को पकड़वाने के लिए अंग्रेजों ने उन पर पचास हजार रुपये का भारी इनाम घोषित किया था, तथा अंततः पुवायां के एक स्थानीय राजा के विश्वासघात के कारण उनकी हत्या कर दी गई थी।
4. लखनऊ पर अंग्रेजों के पुनः अधिकार के बाद बेगम हजरत महल ने ब्रिटिश सेनाओं के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था, जिन्हें बाद में ब्रिटिश सरकार द्वारा आजीवन कारावास के लिए अंडमान निकोबार निर्वासित कर दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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