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General Science
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नाभिकीय भौतिकी और रेडियोधर्मिता के संदर्भ में, 'बीटा-क्षय' (Beta decay) और 'इलेक्ट्रॉन कैप्चर' (Electron capture) प्रक्रियाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. बीटा-ऋणात्मक ($eta^-$) क्षय के दौरान, नाभिक के भीतर एक न्यूट्रॉन एक प्रोटॉन, एक इलेक्ट्रॉन और एक एंटीन्यूट्रिनो में परिवर्तित हो जाता है, जिससे परमाणु क्रमांक में एक की वृद्धि होती है।
  2. 2. इलेक्ट्रॉन कैप्चर की प्रक्रिया में, नाभिक के निकट की कक्षा (आमतौर पर K-शेल) का एक आंतरिक इलेक्ट्रॉन नाभिक द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है, जिससे एक प्रोटॉन न्यूट्रॉन में बदल जाता है और एक न्यूट्रिनो उत्सर्जित होता है।
  3. 3. बीटा-धनात्मक ($eta^+$) क्षय और इलेक्ट्रॉन कैप्चर दोनों ही प्रक्रियाओं में मूल परमाणु का द्रव्यमान संख्या (Mass number) परिवर्तित हो जाता है।

उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: बीटा-ऋणात्मक ($eta^-$) क्षय में, एक न्यूट्रॉन कमजोर अंतःक्रिया (Weak interaction) के माध्यम से एक प्रोटॉन, एक इलेक्ट्रॉन और एक इलेक्ट्रॉन एंटीन्यूट्रिनो में विघटित होता है, जिससे परमाणु संख्या (Atomic number) में 1 की वृद्धि होती है। कथन 2 सही है: इलेक्ट्रॉन कैप्चर (Electron capture) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें परमाणु का नाभिक अपनी आंतरिक कक्षा (सामान्यतः K-शेल) से एक इलेक्ट्रॉन को ग्रहण कर लेता है, जिससे नाभिकीय प्रोटॉन एक न्यूट्रॉन में बदल जाता है और एक न्यूट्रिनो उत्सर्जित होता है। कथन 3 गलत है: बीटा-धनात्मक क्षय और इलेक्ट्रॉन कैप्चर दोनों ही प्रक्रियाओं में नाभिक के भीतर प्रोटॉन और न्यूट्रॉन की कुल संख्या (न्यूक्लियॉन्सम) आपस में बदलती है, लेकिन परमाणु की **द्रव्यमान संख्या (Mass number)** अपरिवर्तित रहती है, क्योंकि कुल न्यूक्लिऑन संख्या समान बनी रहती है। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखा जा सकता है।
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