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General Science
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आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के रासायनिक गुणों में आवर्तिता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी उदासीन गैसीय परमाणु से एक इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा 'आयनन एन्थैल्पी' कहलाती है, और एक ही आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्या घटने तथा नाभिकीय आवेश बढ़ने के कारण आयनन एन्थैल्पी का मान सामान्यतः बढ़ता है, फिर भी ऑक्सीजन की प्रथम आयनन एन्थैल्पी नाइट्रोजन से कम होती है क्योंकि नाइट्रोजन के $2p$ कक्षकों में अर्ध-पूरित (half-filled) व्यवस्था का अतिरिक्त स्थायित्व होता है।
- 2. 'इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी' (Electron Gain Enthalpy) का मान फ्लोरिन (-328 kJ/mol) की तुलना में क्लोरीन (-349 kJ/mol) के लिए अधिक ऋणात्मक होता है, जिसका मुख्य कारण फ्लोरिन का अत्यंत छोटा आकार होना है, जिससे आने वाले इलेक्ट्रॉन पर तीव्र अंतःइलेक्ट्रॉनी प्रतिकर्षण (interelectronic repulsion) उत्पन्न होता है।
- 3. आवर्त सारणी में नीचे की ओर जाने पर धात्विक गुण (Metallic character) घटता है क्योंकि आयनन ऊर्जा में वृद्धि होती है और परमाणु आसानी से इलेक्ट्रॉन त्याग नहीं पाते हैं, जबकि अधात्विक गुण (Non-metallic character) में क्रमिक वृद्धि होती है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर सामान्यतः आयनन एन्थैल्पी बढ़ती है, लेकिन समूह 15 के नाइट्रोजन का विन्यास $2p^3$ (अर्ध-पूरित) होने के कारण अधिक स्थायी होता है, जिससे ऑक्सीजन ($2p^4$) की तुलना में इसकी प्रथम आयनन एन्थैल्पी अधिक होती है। कथन 2 भी सही है; छोटे आकार के कारण फ्लोरिन में आने वाले इलेक्ट्रॉन पर प्रतिकर्षण बल अधिक होता है जिससे क्लोरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी अधिक ऋणात्मक होती है (देखें विकिपीडिया संदर्भ)। कथन 3 गलत है क्योंकि आवर्त सारणी में नीचे जाने पर परमाणु का आकार बढ़ने और आयनन ऊर्जा घटने के कारण 'धात्विक गुण' बढ़ता है, न कि घटता।
Related Questions
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प्रकाशिकी और लेंस के अपवर्तन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जब किसी उत्तल लेंस को ऐसे पारदर्शी माध्यम में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक होता है, तो लेंस की प्रकृति बदल जाती है और वह अभिसारी (Converging) लेंस के बजाय अपसारी (Diverging) लेंस की तरह व्यवहार करने लगता है।
2. लेंस निर्माता का सूत्र (Lens Maker's Formula) केवल तभी मान्य होता है जब लेंस के दोनों ओर के माध्यम का अपवर्तनांक समान हो तथा लेंस पतला हो।
3. पानी में डुबोए जाने पर किसी उत्तल लेंस की फोकस दूरी बढ़ जाती है, जिसके कारण उसकी शक्ति (Power) में वृद्धि हो जाती है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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प्रतिध्वनि (Echo) सुनने के लिए न्यूनतम दूरी?
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कार्बनिक रसायन में हाइड्रोकार्बन और ईंधन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एल्काइन्स (Alkynes) में कार्बन-कार्बन त्रिक बंध उपस्थित होने के कारण ये उच्च असंतृप्त यौगिक होते हैं, किंतु जलीय माध्यम में इनके सीमांत (Terminal) हाइड्रोजन परमाणु अम्लीय प्रकृति के होते हैं जिन्हें सोडियम धातु या अमोनियामय क्यूप्रस क्लोराइड विलयन द्वारा प्रतिस्थापित किया जा सकता है।
2. पेट्रोलियम के प्रभाजी आसवन (Fractional Distillation) के दौरान प्राप्त 'डीजल ईंधन' की गुणवत्ता का निर्धारण उसकी 'ऑक्टेन संख्या' (Octane Number) के आधार पर किया जाता है, जिसमें जितनी अधिक ऑक्टेन संख्या होगी, डीजल की स्फोटक-विरोधी (Anti-knock) क्षमता उतनी ही बेहतर होगी।
3. कोल गैस (Coal gas) मुख्य रूप से हाइड्रोजन, मीथेन और कार्बन मोनोऑक्साइड का एक ज्वलनशील गैसीय मिश्रण है, जिसका उपयोग औद्योगिक ईंधन और प्रकाश उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।
4. बेन्जीन चक्र में उपस्थित सभी कार्बन-कार्बन बंधों की लंबाई एकल बंध और द्वि बंध के मध्य की होती है, जो इसकी अनुनादी संरचना (Resonance structure) और उच्च स्थायित्व को प्रदर्शित करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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विलयन के अणुसंख्यक गुणधर्मों और उत्प्रेरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर उसके वाष्प दाब में होने वाला आपेक्षिक अवनमन (Relative Lowering of Vapour Pressure) विलेय के मोल अंश के बराबर होता है, और यह राउल्ट के नियम का सीधा परिणाम है।
2. वेंट-हॉफ कारक ($i$) का मान उन विलेय पदार्थों के लिए एक से अधिक होता है जो जलीय विलयन में पूर्ण रूप से संघनित (Association) हो जाते हैं, क्योंकि अणुओं के जुड़ने से कणों की कुल संख्या बढ़ जाती है।
3. उत्प्रेरक अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा (Activation Energy) को परिवर्तित करके अभिक्रिया के वेग को प्रभावित करते हैं, किंतु वे अग्र और पश्च अभिक्रियाओं के वेग को समान रूप से प्रभावित करते हैं जिससे साम्य स्थिरांक (Equilibrium Constant) का मान अपरिवर्तित रहता है।
4. जिओलाइट्स (Zeolites) त्रि-विमीय सिलिकेट नेटवर्क संरचना वाले सूक्ष्मछिद्रित उत्प्रेरक हैं जो 'आकार-वरण उत्प्रेरण' (Shape-selective Catalysis) प्रदर्शित करते हैं, क्योंकि इनकी उत्प्रेरकीय सक्रियता अभिकारकों और उत्पादों के अणुओं के आकार तथा छिद्रों के आकार पर निर्भर करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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लुईस अम्ल (Lewis Acid) किसे कहते हैं?
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