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General Science
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ऊष्मागतिकी के प्रथम और द्वितीय नियमों (Laws of Thermodynamics) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम ऊर्जा संरक्षण के नियम का ही एक रूप है, जिसके अनुसार किसी निकाय को दी जाने वाली ऊष्मा उसकी आंतरिक ऊर्जा में वृद्धि और निकाय द्वारा किए गए कार्य के योग के बराबर होती है।
- 2. ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम यह स्पष्ट करता है कि ऊष्मा का स्वतः प्रवाह कम तापमान वाले निकाय से उच्च तापमान वाले निकाय की ओर संभव है, बशर्ते कि कोई बाहरी कार्य न किया जाए।
- 3. 'एन्ट्रॉपी' (Entropy) किसी विलगित निकाय (Isolated system) की यादृच्छिकता या अव्यवस्था की माप है, और प्रकृति में होने वाली सभी उत्क्रमणीय (Reversible) प्रक्रियाएं हमेशा कुल एन्ट्रॉपी में वृद्धि करती हैं।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम ऊर्जा संरक्षण का सिद्धांत है ($dQ = dU + dW$)। कथन 2 गलत है क्योंकि ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम (विशेषकर क्लासियस का कथन) यह बताता है कि ऊष्मा स्वतः ही ठंडी वस्तु से गर्म वस्तु की ओर प्रवाहित नहीं हो सकती, इसके लिए बाहरी कार्य की आवश्यकता होती है। कथन 3 गलत है क्योंकि प्रकृति में होने वाली सभी वास्तविक प्रक्रियाएं **अनुत्क्रमणीय (Irreversible)** होती हैं और विलगित निकाय की कुल एन्ट्रॉपी हमेशा बढ़ती है, न कि उत्क्रमणीय प्रक्रियाएं। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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भौतिक राशियों और उनके मापन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पारसेक (Parsec) खगोलीय दूरियों को मापने की सबसे बड़ी व्यावहारिक इकाई है, जो लगभग 3.26 प्रकाश वर्ष के बराबर होती है और यह उस चाप की लंबाई पर आधारित है जो पृथ्वी की कक्षा की औसत त्रिज्या के बराबर चाप बनाती है।
2. 'पाद-पाउंड-सेकंड' (FPS) पद्धति में बल की निरपेक्ष इकाई 'पाउंडल' (Poundal) होती है, जबकि गुरुत्वीय इकाई 'पाउंड-बल' (lbf) होती है।
3. पार्कोसेक या खगोलीय इकाई जैसी बड़ी दूरियों के मापन के लिए 'लंबन विधि' (Parallax method) का उपयोग किया जाता है, जिसमें प्रेक्षण बिंदु के दो अलग-अलग स्थानों से किसी दूरस्थ तारे की स्थिति में होने वाले आभासी विस्थापन का उपयोग किया जाता है।
4. किसी भौतिक राशि का विमीय सूत्र (Dimensional formula) उस राशि की प्रकृति को पूरी तरह स्पष्ट करता है और यह सुनिश्चित करता है कि विभिन्न प्रणालियों में उसके मात्रक का संख्यात्मक मान हमेशा नियत रहे, चाहे मात्रक की पद्धति कोई भी हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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