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General Science
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आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों (Periodic Properties) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. किसी वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु त्रिज्या में लगातार वृद्धि होती है, लेकिन 'लैंथेनाइड संकुचन' (Lanthanide contraction) के प्रभाव के कारण 6वें आवर्त के संक्रमण तत्वों (जैसे Hafnium) की परमाणु त्रिज्या लगभग 5वें आवर्त के उनके समरूपी तत्वों (जैसे Zirconium) के लगभग समान हो जाती है।
  2. 2. 'इलेक्ट्रॉन बंधुता' या इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron gain enthalpy) का मान हैलोजन परिवार में फ्लोरीन से क्लोरीन की ओर जाने पर कम ऋणात्मक (यानी कम ऊर्जा मुक्त होना) हो जाता है, क्योंकि फ्लोरीन का आकार बहुत छोटा होने के कारण आने वाले इलेक्ट्रॉन को अंतःइलेक्ट्रॉनिक प्रतिकर्षण का सामना करना पड़ता है।
  3. 3. आयनन ऊर्जा (Ionisation Enthalpy) का मान किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर सामान्यतः बढ़ता है, किंतु नाइट्रोजन ($N$) की प्रथम आयनन ऊर्जा अपने से ठीक आगे आने वाले ऑक्सीजन ($O$) की तुलना में अधिक होती है, जिसका कारण नाइट्रोजन के बाह्यतम 'p' कक्षकों का आधा भरा होना (Half-filled configuration) है।

उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि लैंथेनाइड संकुचन (4f कक्षकों के दुर्बल परिरक्षण प्रभाव के कारण) के कारण ज़िरकोनियम और हाफ्नियम की त्रि-विमीय आमाप लगभग समान हो जाती है। कथन 2 गलत है; फ्लोरीन का आकार अत्यधिक छोटा होने के कारण इलेक्ट्रॉन घनत्व अधिक होता है, जिससे आने वाले इलेक्ट्रॉन पर प्रतिकर्षण बल लगता है और इसीलिए क्लोरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी फ्लोरीन से अधिक ऋणात्मक होती है। कथन 3 बिल्कुल सही है क्योंकि नाइट्रोजन का अर्ध-पूरित (half-filled) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास इसे अत्यधिक स्थायित्व प्रदान करता है, जिससे इलेक्ट्रॉन निकालना कठिन होता है। आवर्त सारणी के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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