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General Science
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डॉपलर प्रभाव (Doppler Effect) और ध्वनि तरंगों के संचरण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. जब एक ध्वनि स्रोत और एक श्रोता के बीच अपेक्षित गति होती है, तो श्रोता को सुनाई देने वाली ध्वनि की आवृत्ति में परिवर्तन का आभास होता है, जिसे डॉपलर प्रभाव कहा जाता है। यदि स्रोत और श्रोता एक-दूसरे के पास आते हैं, तो वास्तविक आवृत्ति से अधिक आवृत्ति सुनाई देती है।
- 2. ध्वनि तरंगों में डॉपलर प्रभाव केवल प्रकाश तरंगों की तरह सममित (Symmetric) होता है, जिसका अर्थ है कि चाहे स्रोत स्थिर हो और श्रोता गतिमान हो, अथवा श्रोता स्थिर हो और स्रोत समान वेग से गतिमान हो, दोनों ही स्थितियों में श्रोता द्वारा अनुभव की जाने वाली आभासी आवृत्ति का मान सर्वथा समान होता है।
- 3. पराध्वनिक (Supersonic) चाल से चलने वाले जेट विमान जब आकाश में गति करते हैं, तो वे एक तीव्र प्रघाती तरंग (Shock wave) उत्पन्न करते हैं, जिससे अत्यंत तेज और विनाशकारी ध्वनि उत्पन्न होती है जिसे 'सोनीक बूम' (Sonic boom) कहा जाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि डॉपलर प्रभाव के अनुसार जब स्रोत और श्रोता एक-दूसरे के समीप आते हैं, तो आभासी आवृत्ति बढ़ जाती है और दूर जाने पर घट जाती है। कथन 2 गलत है क्योंकि ध्वनि में डॉपलर प्रभाव सममित (Symmetric) नहीं होता है; माध्यम (Air) के सापेक्ष स्रोत की गति और श्रोता की गति के परिणाम अलग-अलग होते हैं क्योंकि ध्वनि का संचरण एक भौतिक माध्यम पर निर्भर करता है, जबकि प्रकाश के मामले में आपेक्षिक गति का नियम लागू होता है। कथन 3 सही है जब कोई वस्तु ध्वनि की चाल से अधिक गति (पराध्वनिक) से चलती है, तो वह वायु में प्रघाती तरंगें छोड़ती है जिससे 'सोनीक बूम' उत्पन्न होता है। विकिपीडिया संदर्भ
Related Questions
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विलयन और उत्प्रेरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन (Relative lowering of vapour pressure) एक अणुसंख्यक गुणधर्म है, जो राउल्ट के नियम के अनुसार विलायक में घुले हुए अवाष्पशील विलेय के मोल प्रभाज के बराबर होता है तथा यह विलेय की रासायनिक प्रकृति पर निर्भर नहीं करता है।
2. समांग उत्प्रेरण (Homogeneous catalysis) में उत्प्रेरक और अभिकारक सभी एक ही भौतिक अवस्था में होते हैं, और इसकी क्रियाविधि को मुख्य रूप से 'मध्यवर्ती यौगिक निर्माण सिद्धांत' द्वारा समझाया जाता है।
3. जिग्लर-नट्टा उत्प्रेरक ($TiCl_4 + Al(C_2H_5)_3$) एक विषमांग उत्प्रेरक का प्रमुख उदाहरण है, जिसका उपयोग उच्च घनत्व वाले पॉलीइथिलीन (HDPE) के औद्योगिक उत्पादन में किया जाता है।
4. एंजाइम उत्प्रेरण (Enzyme catalysis) अपनी अत्यधिक विशिष्ट प्रकृति के लिए जाने जाते हैं, और 'ताला-कुंजी' (Lock and Key) मॉडल के अनुसार एंजाइम रासायनिक अभिक्रिया के सक्रियण ऊर्जा को कम करके अभिक्रिया की दर को बढ़ाते हैं, किंतु यह साम्यावस्था स्थिरांक ($K_{eq}$) को परिवर्तित नहीं करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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प्रकाशिकी (Optics) और लेंसों के अपवर्तन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जब किसी उत्तल लेंस को ऐसे पारदर्शी द्रव में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक होता है, तो लेंस की फोकस दूरी ऋणात्मक हो जाती है और वह अभिसारी (Converging) लेंस के बजाय अपसारी (Diverging) लेंस की तरह व्यवहार करने लगता है।
2. लेंस निर्माता सूत्र (Lens Maker's Formula) के अनुसार, किसी लेंस की फोकस दूरी केवल लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक और उसकी वक्रता त्रिज्या पर निर्भर करती है, और लेंस के दोनों ओर के माध्यम का अपवर्तनांक बदलने पर भी फोकस दूरी अपरिवर्तित रहती है।
3. वायु के बुलबुले का पानी के अंदर व्यवहार एक अवतल लेंस (Diverging lens) की तरह होता है, क्योंकि पानी का अपवर्तनांक वायु की तुलना में अधिक होता है और प्रकाश किरणें सघन माध्यम (पानी) से विरल माध्यम (वायु) में प्रवेश करते समय अभिलंब से दूर हटती हैं।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों (Blood Groups) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. रक्त समूह 'AB' वाले व्यक्तियों की लाल रक्त कणिकाओं (RBC) की सतह पर A और B दोनों प्रतिजन (Antigens) होते हैं, लेकिन उनके प्लाज्मा में एंटी-A और एंटी-B दोनों प्रकार के एंटीबॉडी का पूर्ण अभाव होता है, जिसके कारण उन्हें 'सार्वभौमिक प्राप्तकर्ता' (Universal Recipient) कहा जाता है।
2. 'बॉम्बे रक्त समूह' (Bombay Blood Group) सबसे दुर्लभ रक्त समूहों में से एक है, जिसमें व्यक्ति के लाल रक्त कणिकाओं पर 'H प्रतिजन' की अनुपस्थिति होती है, क्योंकि इनमें FUT1 जीन का उत्परिवर्तन होता है, और ऐसा व्यक्ति केवल बॉम्बे फेनोटाइप वाले व्यक्ति से ही रक्त प्राप्त कर सकता है।
3. एरिथ्रोब्लास्टोसिस फिटलिस (Erythroblastosis fetalis) एक ऐसी स्थिति है जो Rh-धनात्मक पिता और Rh-ऋणात्मक माता के प्रथम गर्भधारण के दौरान ही गंभीर रूप से उत्पन्न हो जाती है, जिससे नवजात शिशु में गंभीर पीलिया और एनीमिया हो जाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों (Blood Groups) के जैव-रासायनिक एवं immunotoxicolgical संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एंटीबॉडी 'एग्लूटीनिन' (Agglutinin) प्लाज्मा में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले प्रोटीन हैं, और एंटी-A तथा एंटी-B एंटीबॉडी मुख्य रूप से IgM प्रकार के होते हैं, जो आकार में बड़े होने के कारण प्लेसेंटा को पार करके गर्भ में पल रहे शिशु तक नहीं पहुँच पाते हैं।
2. 'बॉम्बे रक्त समूह' (Bombay Blood group या $O_h$) से ग्रसित व्यक्तियों की लाल रक्त कोशिकाओं पर H-एंटीजन का पूर्णतः अभाव होता है क्योंकि उनमें FUT1 (Fucosyltransferase 1) जीन का म्यूटेशन होता है, जिससे वे किसी भी सामान्य ABO रक्त समूह (A, B, AB, O) के व्यक्ति से रक्त ले सकते हैं।
3. एरिथ्रोब्लास्टोसिस फिटलिस (Erythroblastosis fetalis) की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब एक Rh-धनात्मक (Rh⁺) पिता और एक Rh-ऋणात्मक (Rh⁻) माता से उत्पन्न होने वाला पहला Rh-धनात्मक शिशु प्रसव के दौरान माँ के संपर्क में आता है, जिससे माँ के शरीर में एंटी-Rh एंटीबॉडी का निर्माण होता है जो अगले गर्भस्थ शिशु को प्रभावित करता है।
4. रक्त का थक्का जमने (Blood Coagulation) की प्रक्रिया में 'प्रोथ्रोम्बिन एक्टीवेटर' (Prothrombin activator) का निर्माण आंतरिक और बाह्य दोनों मार्गों का अंतिम साक्षात् बिंदु है, जो कैल्शियम आयनों ($Ca^{2+}$) की उपस्थिति में निष्क्रिय प्रोथ्रोम्बिन को सक्रिय थ्रॉम्बिन में रूपांतरित करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव मस्तिष्क का भार?
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