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General Science
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परमाणु संरचना और पदार्थ की अवस्थाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. बोर के परमाणु मॉडल के अनुसार, इलेक्ट्रॉन केवल उन्हीं विशिष्ट वृत्ताकार कक्षाओं में चक्कर लगा सकते हैं जिनमें उनका कोणीय संवेग (Angular momentum) $\frac{h}{2\pi}$ का पूर्ण गुणज (Integral multiple) होता है।
  2. 2. 'बोस-आइंस्टीन संघनन' (Bose-Einstein Condensate) पदार्थ की एक ऐसी अवस्था है जिसे अत्यंत कम घनत्व वाली गैस को परम शून्य (Absolute zero) के अत्यंत निकट के तापमान तक ठंडा करके प्राप्त किया जाता है।
  3. 3. हाइजेनबर्ग के अनिश्चितता सिद्धांत (Uncertainty principle) के अनुसार, किसी सूक्ष्म कण की स्थिति और उसके संवेग का एक साथ यथार्थ निर्धारण करना संभव है, यदि माप के उपकरण अत्यधिक उच्च विभेदन (High resolution) वाले हों।

उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: नील्स बोर के परमाणु मॉडल के अनुसार, इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर केवल उन्हीं निश्चित कक्षाओं में घूम सकते हैं जिन्हें स्थायी कक्षाएँ कहा जाता है, और इन कक्षाओं में इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग $L = \frac{nh}{2\pi}$ (जहाँ $n = 1, 2, 3...$) के बराबर होता है। कथन 2 सही है: 'बोस-आइंस्टीन संघनन' पदार्थ की पाँचवीं अवस्था है, जिसका पूर्वानुमान सत्येंद्रनाथ बोस और अल्बर्ट आइंस्टीन ने लगाया था। इसे अत्यंत कम घनत्व वाली गैसों को परम शून्य तापमान के निकट तक ठंडा करके प्राप्त किया जाता है, जहाँ कण एक ही क्वांटम अवस्था में संघनित हो जाते हैं। कथन 3 गलत है: हाइजेनबर्ग के अनिश्चितता सिद्धांत के अनुसार, किसी सूक्ष्म कण की स्थिति ($\Delta x$) और संवेग ($\Delta p$) दोनों का एक साथ पूर्ण यथार्थता के साथ निर्धारण करना सैद्धांतिक रूप से असंभव है, चाहे उपकरण कितने भी उन्नत क्यों न हों। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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