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भौतिक राशियों की विमाओं (Dimensions) और मात्रकों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी भी भौतिक राशि की विमाएँ यह दर्शाती हैं कि उस राशि को व्यक्त करने के लिए मूल इकाइयों पर कौन-कौन सी घातें (Exponents) चढ़ाई जाती हैं, और विमीय विश्लेषण का उपयोग केवल समीकरणों की सत्यता की जाँच करने के लिए किया जा सकता है, नए भौतिक संबंधों को व्युत्पन्न करने के लिए नहीं।
- 2. 'प्लांग स्थिरांक' (Planck's constant) और 'कोणीय संवेग' (Angular momentum) दोनों की विमीय सूत्र (Dimensional formula) सर्वथा समान होती है, जो कि $[ML^2T^{-1}]$ है।
- 3. पार्सेक (Parsec) और प्रकाश वर्ष (Light-year) दोनों खगोलीय दूरियाँ मापने के मात्रक हैं, जिनमें से 1 पार्सेक का मान लगभग 3.26 प्रकाश वर्ष के बराबर होता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि विमीय विश्लेषण (Dimensional Analysis) का उपयोग न केवल दिए गए समीकरण की सत्यता की जाँच करने के लिए किया जाता है, बल्कि विभिन्न भौतिक राशियों के बीच संबंध स्थापित करने (नए भौतिक संबंधों को व्युत्पन्न करने) के लिए भी इसका व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। कथन 2 सत्य है; प्लांक स्थिरांक ($h$) का मात्रक जूल-सेकंड होता है जिसकी विमा $[ML^2T^{-1}]$ है और कोणीय संवेग ($L = mvr$) की विमा भी $[ML^2T^{-1}]$ ही होती है। कथन 3 सत्य है; पार्सेक खगोलीय दूरी मापने की सबसे बड़ी इकाई है और 1 पार्सेक = $3.08 imes 10^{16}$ मीटर होता है जो कि लगभग 3.26 प्रकाश वर्ष के बराबर होता है। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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मानव शरीर में होने वाले विभिन्न संक्रामक और गैर-संक्रामक रोगों, उनके संचरण के माध्यम, रोगजनकों तथा उनके निदान के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'टिटनेस' (Tetanus) एक जीवाणु जनित संक्रामक रोग है जो क्लॉस्ट्रिडियम टिटेनी (Clostridium tetani) के बीजाणुओं द्वारा होता है, और इसके विषैले एक्सोटॉक्सिन (टिटेनोस्पासमिन) केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करके कंकाल पेशियों में दीर्घकालिक अनैच्छिक संकुचन (Spasms) उत्पन्न करते हैं।
2. 'एड्स' (AIDS) का कारक ह्यूमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस (HIV) एक रेट्रोवाइरस है जिसमें आनुवंशिक पदार्थ के रूप में एकल-रज्जुक डीएनए (Single-stranded DNA) पाया जाता है, जो मुख्य रूप से शरीर की $CD4^+$ सहायक टी-कोशिकाओं को संक्रमित करता है।
3. 'कुष्ठ रोग' (Leprosy) जिसे हैनसेन रोग भी कहा जाता है, माइकोबैक्टीरियम लेप्री के कारण होता है, जो एक अंतःकोशिकीय जीवाणु है और मुख्य रूप से परिधीय तंत्रिकाओं, त्वचा तथा ऊपरी श्वसन पथ के ऊतकों को प्रभावित करता है।
4. 'कालाजार' (Kala-azar) या विसरल लीशमैनियासिस एक प्रोटोजोआ जनित रोग है, जिसका संचरण 'सैंडफ्लाई' (बालू मक्खी - Phlebotomus) द्वारा होता है, और यह परजीवी मुख्य रूप से मानव शरीर की यकृत, प्लीहा और अस्थि मज्जा की रेटिकुलोएन्डोथेलियल कोशिकाओं में गुणन करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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हेक्सेन का सूत्र?
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पादप जगत के वर्गीकरण, पुष्पी पादपों की विशेषताओं और प्रकाश संश्लेषण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' (Amphibians of the plant kingdom) कहा जाता है क्योंकि ये पौधे यद्यपि मृदा में उगते हैं, लेकिन निषेचन की प्रक्रिया के लिए इन्हें जल की अनिवार्य रूप से आवश्यकता होती है और इनमें वास्तविक संवहन ऊतक (ज़ाइलम और फ्लोएम) पूर्णतः अनुपस्थित होते हैं।
2. आवृतबीजी (Angiosperms) पौधों में दोहरा निषेचन (Double Fertilization) एक अद्वितीय विशेषता है, जिसमें एक नर युग्मक अंडे की कोशिका से संलयन करके युग्मकोद्भिद बनाता है और दूसरा नर युग्मक द्वितीयक केंद्रक से संलयन करके त्रिगुणित ($3n$) प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक (PEN) का निर्माण करता है।
3. 'क्रैज़ एनाटॉमी' (Kranz Anatomy) C3 पौधों की एक प्रमुख विशेषता है, जिसमें बंडल शीथ कोशिकाओं के चारों ओर क्लोरोप्लास्ट युक्त मेसोफिल कोशिकाएँ एक वलय के रूप में व्यवस्थित होती हैं, जो उच्च तापमान पर प्रकाश श्वसन को रोकने में सहायक होती हैं।
4. प्रकाश संश्लेषण की 'प्रकाश-स्वतंत्र अभिक्रिया' (Dark Reaction या केल्विन चक्र) हरित लवक के स्ट्रोमा (Stroma) में संपन्न होती है, जहाँ एटीपी (ATP) और एनएडीपीएच (NADPH) का उपयोग करके कार्बन डाइऑक्साइड का अपचयन शर्करा में किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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नाभिकीय भौतिकी और रेडियोएक्टिव क्षय के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी रेडियोएक्टिव नाभिक के क्षय स्थिरांक (Decay constant, $\lambda$) और उसकी अर्ध-आयु ($T_{1/2}$) के बीच सीधा संबंध होता है, और अर्ध-आयु का मान नाभिक के प्रारंभिक द्रव्यमान तथा बाह्य ताप व दाब की परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
2. 'अल्फा क्षय' के दौरान जनक नाभिक से एक हीलियम नाभिक उत्सर्जित होता है, जिससे द्रव्यमान संख्या में 4 की और परमाणु क्रमांक में 2 की कमी आ जाती है, तथा यह प्रक्रिया मुख्य रूप से उन भारी नाभिकों में होती है जिनका न्यूट्रॉन-प्रोटॉन अनुपात अत्यधिक असंतुलित होता है।
3. नाभिकीय विखंडन (Nuclear fission) की श्रृंखला अभिक्रिया में यूरेनियम-235 पर मंद गति से चलने वाले न्यूट्रॉनों (Thermal neutrons) की बमबारी की जाती है, जो नाभिक को अस्थिर करके बेरियम और क्रिप्टन जैसे हल्के टुकड़ों में तोड़ देते हैं तथा अपार ऊर्जा के साथ औसतन 2 से 3 नए न्यूट्रॉन मुक्त करते हैं।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) और चुम्बकत्व के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के द्वितीय नियम के अनुसार, किसी परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) का परिमाण उस परिपथ से गुजरने वाले चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की दर के अनुक्रमानुपाती होता है।
2. लेंज का नियम (Lenz's Law) ऊर्जा संरक्षण के नियम का एक प्रत्यक्ष परिणाम है, जिसके अनुसार प्रेरित धारा की दिशा सदैव उस कारण का विरोध करती है जिससे वह स्वयं उत्पन्न होती है।
3. जब किसी लंबी परिनालिका (Solenoid) के भीतर उच्च चुंबकीय पारगम्यता वाला नरम लोहे का क्रोड रखा जाता है, तो परिनालिका के भीतर का चुंबकीय क्षेत्र कमजोर हो जाता है क्योंकि नरम लोहा बाह्य चुंबकीय क्षेत्र को प्रतिकर्षित करता है।
4. भँवर धाराएँ (Eddy Currents) किसी चालक में तब उत्पन्न होती हैं जब उसे परिवर्तित चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, और इनका उपयोग विद्युत ब्रेक, प्रेरण भट्टी (Induction Furnace) और स्पीडोमीटर में किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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