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General Science
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विलयन और उत्प्रेरण (Solutions and Catalysis) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. किसी तरल विलायक में गैस की विलेयता हेनरी के नियम (Henry's Law) द्वारा नियंत्रित होती है, जिसके अनुसार स्थिर तापमान पर किसी गैस का आंशिक दाब विलयन में गैस के मोल अंश (Mole fraction) के सीधे आनुपातिक होता है, और यह नियम उन गैसों पर भी पूरी तरह लागू होता है जो विलायक के साथ रासायनिक रूप से संगुणित या वियोजित होती हैं।
  2. 2. 'सजातीय उत्प्रेरण' (Homogeneous Catalysis) वह प्रक्रिया है जिसमें अभिकारक और उत्प्रेरक दोनों एक ही भौतिक अवस्था (जैसे सभी गैसीय या सभी द्रव अवस्था) में होते हैं, उदाहरण के लिए सीसा कक्ष विधि द्वारा सल्फ्यूरिक अम्ल के निर्माण में नाइट्रिक ऑक्साइड का गैस के रूप में उत्प्रेरक का कार्य करना।
  3. 3. उत्प्रेरक वर्धक (Catalytic Promoters वे पदार्थ होते हैं जो स्वयं रासायनिक अभिक्रिया में उत्प्रेरक के रूप में कार्य नहीं करते हैं, बल्कि उत्प्रेरक की सक्रियता (Catalytic activity) को बढ़ा देते हैं, जैसे Haber प्रक्रम द्वारा अमोनिया निर्माण में मोलिब्डेनम (Mo) का लोहे (Fe) के उत्प्रेरक के साथ कार्य करना।

उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि हेनरी का नियम केवल उन गैसों के लिए मान्य है जो आदर्श व्यवहार दर्शाती हैं और विलायक के साथ रासायनिक रूप से संगुणित (associate) या वियोजित (dissociate) नहीं होती हैं (जैसे अमोनिया या HCl जो पानी में घुलकर आयन बनाते हैं, इस नियम का पालन नहीं करते)। कथन 2 सही है, सजातीय उत्प्रेरण में अभिकारक और उत्प्रेरक समान प्रावस्था में होते हैं। कथन 3 सही है, उत्प्रेरक वर्धक (जैसे Haber विधि में Mo) मुख्य उत्प्रेरक की कार्यक्षमता या सक्रियता को बढ़ाते हैं। विकिपीडिया संदर्भ
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