त्वरित लिंक्स
General Science
18 views
आवर्त सारणी के तत्वों के विभिन्न आवर्ती गुणों और रासायनिक प्रवृत्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी परमाणु की 'द्वितीय आयनन एन्थैल्पी' (Second Ionization Enthalpy) का मान हमेशा उसकी 'प्रथम आयनन एन्थैल्पी' से अधिक होता है, क्योंकि उदासीन परमाणु से एक इलेक्ट्रॉन निकल जाने के बाद बचे हुए इलेक्ट्रॉनों पर प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ जाता है और आकार छोटा हो जाता है।
- 2. 'इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी' (Electron Gain Enthalpy) का मान सभी हैलोजन तत्वों में क्लोरीन के लिए सर्वाधिक ऋणात्मक होता है, न कि फ्लोरीन के लिए, जिसका मुख्य कारण फ्लोरीन के छोटे आकार के कारण होने वाला अंतःइलेक्ट्रॉनी प्रतिकर्षक (Interelectronic repulsion) है।
- 3. आधुनिक आवर्त सारणी में 'लैंथेनाइड आकुंचन' (Lanthanoid Contraction) के प्रभावस्वरूप, छठी अवधि के संक्रमण तत्वों (जैसे Hafnium) की परमाणु त्रिज्या और रासायनिक गुण पाँचवीं अवधि के उनके ठीक ऊपर वाले तत्वों (जैसे Zirconium) की तुलना में लगभग समान हो जाते हैं।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए तीनों कथन आवर्त सारणी के तत्वों के आवर्ती गुणों के संबंध में पूर्णतः सत्य हैं। प्रथम कथन के अनुसार, एक इलेक्ट्रॉन निकलने के पश्चात धनायन पर नाभिकीय आकर्षण बढ़ जाता है, जिससे अगला इलेक्ट्रॉन निकालना अधिक कठिन होता है और द्वितीय आयनन ऊर्जा हमेशा अधिक होती है। दूसरे कथन में, फ्लोरीन का आकार बहुत छोटा होने के कारण आने वाले इलेक्ट्रॉन को बाहरी कक्ष के इलेक्ट्रॉनों से तीव्र प्रतिकर्षक बल का सामना करना पड़ता है, जिसके कारण आवर्त सारणी के अनुसार क्लोरीन की इलेक्ट्रॉन बंधुता फ्लोरीन से अधिक ऋणात्मक होती है। तीसरे कथन के अनुसार, 4f कक्षकों के दुर्बल परिरक्षण प्रभाव (Shielding effect) के कारण 'लैंथेनाइड आकुंचन' उत्पन्न होता है, जिससे Zr और Hf के आकार लगभग समान हो जाते हैं। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
Related Questions
→
यूकेरियोटिक कोशिकाओं में पाए जाने वाले 'अंतःप्रद्रव्य जालिका' (Endoplasmic Reticulum - ER) और 'गोल्जी काय' (Golgi Apparatus) के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. खुरदूरी अंतःप्रद्रव्य जालिका (RER) की सतह पर राइबोसोम जुड़े होते हैं, और यह मुख्य रूप से प्रोटीन संश्लेषण और उनके परिस्रवण (Secretion) में सक्रिय रूप से भाग लेती है।
2. चिकनी अंतःप्रद्रव्य जालिका (SER) पर राइबोसोम अनुपस्थित होते हैं, और यह लिपिड, स्टेरॉयड हार्मोन्स तथा ग्लाइकोजेन चयापचय के संश्लेषण का प्रमुख स्थल है।
3. गोल्जी काय का 'सिस' (Cis) या निर्माण चेहरा (Forming face) आमतौर पर अंतःप्रद्रव्य जालिका की ओर होता है, जबकि 'ट्रांस' (Trans) या परिपक्व चेहरा (Maturing face) प्लाज्मा झिल्ली की ओर उन्मुख होता है।
4. अंतःप्रद्रव्य जालिका और गोल्जी काय दोनों ही दोहरी झिल्ली (Double membrane) से घिरे कोशिकांग हैं, जो केंद्रक झिल्ली के साथ निरंतरता बनाए रखते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
विद्युत धारा, प्रतिरोध और परिपथ से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अतिचालकता (Superconductivity) की स्थिति में किसी धातु या मिश्र धातु का विद्युत प्रतिरोध घटकर शून्य हो जाता है, और जब कोई पदार्थ अतिचालक अवस्था में प्रवेश करता है, तो वह अपने भीतर से बाह्य चुंबकीय क्षेत्र को पूर्ण रूप से बाहर धकेल देता है, जिसे 'माइस्नर प्रभाव' (Meissner effect) कहा जाता है।
2. व्हीटस्टोन सेतु (Wheatstone bridge) का उपयोग अज्ञात प्रतिरोध को अत्यंत यथार्थता के साथ मापने के लिए किया जाता है, और यह संतुलन की अवस्था में तब होता है जब गैल्वेनोमीटर में कोई विक्षेप नहीं होता है, जिससे भुजाओं के प्रतिरोधों का अनुपात $P/Q = S/R$ (मानक संकेतों के अनुसार) संतुष्ट होता है।
3. विभवमापी (Potentiometer) को वोल्टमीटर की तुलना में अधिक श्रेष्ठ माना जाता है क्योंकि विभवमापी संतुलन बिंदु प्राप्त करते समय परिपथ से शून्य धारा (Infinite resistance) आहरित करता है, जिससे यह सेल के आंतरिक प्रतिरोध और विद्युत वाहक बल (EMF) को बिना किसी त्रुटि के यथार्थ रूप से माप सकता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
→
कृत्रिम उपग्रहों की गति और गुरुत्वाकर्षण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी दीर्घवृत्ताकार कक्षा में चक्कर लगाते हुए उपग्रह की कुल यांत्रिक ऊर्जा (कुल ऊर्जा) ऋणात्मक होती है, जो इस बात को दर्शाती है कि उपग्रह पृथ्वी से गुरुत्वाकर्षण रूप से बंधा हुआ है।
2. भू-स्थिर उपग्रह (Geostationary satellite) की कक्षीय चाल पृथ्वी की अपनी अक्ष पर घूर्णन चाल से अधिक होती है, और यह विषुवत वृत्त के तल में पश्चिम से पूर्व की ओर परिक्रमण करता है।
3. जब कोई उपग्रह अपनी कक्षा में गति करते हुए थोड़ा सा नीचे आता है, तो उसकी स्थितिज ऊर्जा में कमी होती है किंतु उसकी गतिज ऊर्जा में इतनी वृद्धि हो जाती है कि उसकी कुल ऊर्जा बढ़ जाती है और वह पृथ्वी की ओर गिरने लगता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
→
मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों (Blood Groups) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. रक्त समूह 'AB' को सार्वभौमिक ग्राही (Universal Recipient) कहा जाता है क्योंकि इसकी लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) की सतह पर एंटीजन A और एंटीजन B दोनों उपस्थित होते हैं, किंतु इसके रुधिर प्लाज्मा में कोई भी प्राकृतिक एंटीबॉडी ('anti-A' या 'anti-B') उपस्थित नहीं होती है।
2. 'बॉम्बे रक्त समूह' (Bombay Blood Group या $O_h$) सबसे पहले 1952 में मुंबई में खोजा गया था, जिसके व्यक्तियों की RBC पर 'H' एंटीजन भी अनुपस्थित होता है क्योंकि इनमें H-जीन (FUT1) का उत्परिवर्तन होता है, और ऐसे व्यक्ति केवल 'बॉम्बे फेनोटाइप' वाले व्यक्ति से ही रक्त ले सकते हैं।
3. एरिथ्रोब्लास्टोसिस फेटलिस (Erythroblastosis fetalis) मुख्य रूप से तब उत्पन्न होती है जब एक Rh-धनात्मक (Rh+) माता और Rh-ऋणात्मक (Rh-) पिता का गर्भधारण होता है, जिससे पहले बच्चे के जन्म के समय भ्रूण का Rh+ रक्त माता के परिसंचरण में प्रवेश करके घातक एग्लूटीनेशन पैदा करता है।
4. रुधिर प्लाज्मा में उपस्थित प्राकृतिक एंटीबॉडी (एग्लुटीनिन) 'anti-A' और 'anti-B' मुख्य रूप से IgM प्रकार के इम्युनोग्लोबुलिन होते हैं, जो आकार में बड़े होने के कारण प्लेसेंटा की बाधा को पार नहीं कर पाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
थायराइड रोग?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.