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General Science
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मानव शरीर के परिसंचरण और श्वसन तंत्र की कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. मानव हृदय का 'पेसमेकर' कहे जाने वाला सिनोआट्रियल नोड (SAN) दाएं आलिंद की दीवार में स्थित होता है, जो स्वतः उत्तेजित होने की क्षमता रखता है और हृदय में विद्युत आवेग उत्पन्न करके संकुचन की दर को नियंत्रित करता है।
  2. 2. फुफ्फुसीय धमनी (Pulmonary artery) एकमात्र ऐसी धमनी है जो ऑक्सीजन-विहीन (विऑक्सीकृत) रक्त को हृदय के दाएं निलय से फेफड़ों तक ले जाती है, जबकि फुफ्फुसीय शिरा फेफड़ों से ऑक्सीजन युक्त रक्त को बाएं आलिंद में लाती है।
  3. 3. जब हम गहरी सांस लेते हैं, तो पसलियां ऊपर और बाहर की ओर गति करती हैं तथा डायाफ्राम चपटा हो जाता है, जिसके कारण वक्षीय गुहा का आयतन कम हो जाता है और फेफड़ों के भीतर का वायुदाब वायुमंडल की तुलना में अधिक हो जाता है।

उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: सिनोआट्रियल नोड (SAN) को हृदय का प्राकृतिक पेसमेकर कहा जाता है जो दाएं आलिंद के ऊपरी कोने पर स्थित होता है और स्वतः लयबद्ध उत्तेजनाएं उत्पन्न करता है। कथन 2 सही है: फुफ्फुसीय धमनी शरीर की एकमात्र ऐसी धमनी है जिसमें विऑक्सीकृत रक्त प्रवाहित होता है। कथन 3 गलत है क्योंकि गहरी सांस लेने (अंतःश्वसन) के दौरान डायाफ्राम के चपटे होने और पसलियों के ऊपर उठने से वक्षीय गुहा का आयतन **बढ़** जाता है, जिससे फेफड़ों के भीतर का वायुदाब वायुमंडल की तुलना में **कम** हो जाता है, और हवा फेफड़ों के अंदर आ जाती है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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