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General Science
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धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक गुणों तथा निष्कर्षण प्रक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 'भर्जन' (Roasting) प्रक्रम के दौरान अयस्क को वायु की नियमित या सीमित आपूर्ति में उसके गलनांक से कम तापमान पर गर्म किया जाता है, जिसका मुख्य उपयोग कार्बोनेट अयस्कों को ऑक्साइड में बदलने के लिए किया जाता है।
  2. 2. 'थर्माइट प्रक्रम' (Thermite Process) में एल्युमिनियम पाउडर का उपयोग एक शक्तिशाली अपचायक के रूप में किया जाता है, जो आयरन (III) ऑक्साइड जैसे भारी धातु ऑक्साइडों को अपचयित कर पिघली हुई अवस्था में धातु प्राप्त करने में सहायता करता है।
  3. 3. 'जोन परिष्करण' (Zone Refining) विधि का उपयोग मुख्य रूप से अर्धचालकों (जैसे सिलिकॉन और जर्मेनियम) के अत्यधिक उच्च शुद्धिकरण के लिए किया जाता है, जो इस सिद्धांत पर आधारित है कि अशुद्धियाँ ठोस अवस्था की तुलना में गलित अवस्था (Molten state) में अधिक विलेय होती हैं।
  4. 4. सोडियम कार्बोनेट के निर्माण की 'सॉल्वे प्रक्रम' (Solvay Process) विधि में अमोनिया का पुनर्चक्रण किया जाता है, और इस प्रक्रिया में उपोत्पाद के रूप में कैल्शियम क्लोराइड ($CaCl_2$) प्राप्त होता है, जिससे अमोनिया की कोई बड़ी हानि नहीं होती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि 'भर्जन' (Roasting) प्रक्रम में अयस्क को वायु की **अधिकता** (अनिवार्य उपस्थिति) में उसके गलनांक से नीचे गर्म किया जाता है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से सल्फाइड अयस्कों को ऑक्साइड में बदलने के लिए किया जाता है; जबकि कार्बोनेट अयस्कों के लिए 'निस्तापन' (Calcination) का उपयोग किया जाता है जहाँ वायु की अनुपस्थिति या सीमित आपूर्ति होती है। कथन 2, 3 और 4 बिल्कुल सही हैं। थर्माइट वेल्डिंग में एल्युमिनियम अपचायक का कार्य करता है। जोन परिष्करण विधि पिघली हुई अशुद्धियों के वितरण गुणांक पर आधारित है। सॉल्वे प्रक्रम में सोडियम कार्बोनेट ($Na_2CO_3$) बनाया जाता है और इसमें अमोनिया पुनर्प्राप्त की जाती है। धातुओं के निष्कर्षण और उनके गुणों की अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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→ फराडे नियम? → ओक? → आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी उदासीन गैसीय परमाणु की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का मान हमेशा ऋणात्मक होता है, क्योंकि प्रत्येक स्थिति में इलेक्ट्रॉन जोड़ने पर ऊर्जा का निष्कासन होता है। 2. आवर्त सारणी में किसी वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु आकार बढ़ने के कारण आयनन एन्थैल्पी के मान में सामान्यतः कमी आती है, किंतु 5d संक्रमण श्रेणी के तत्वों की आयनन एन्थैल्पी उनके ठीक ऊपर की 4d श्रेणी के तत्वों की तुलना में अधिक होती है, जिसका मुख्य कारण 'लैंथेनाइड संकुचन' है। 3. पॉलिंग पैमाने पर फ्लोरिन की विद्युत ऋणात्मकता (Electronegativity) संपूर्ण आवर्त सारणी में सर्वाधिक (4.0) होती है, लेकिन इसकी प्रथम इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान क्लोरीन की तुलना में कम होता है। 4. किसी तत्व की धात्विक प्रकृति आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर बढ़ती है क्योंकि प्रभावी नाभिकीय आवेश घट जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → इलेक्ट्रॉन त्यागने की क्रिया? → भौतिक राशियों, उनके विमीय सूत्रों और एसआई (SI) मात्रकों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. सार्वत्रिक गैस नियतांक (Universal Gas Constant): विमीय सूत्र $[ML^2T^{-2}K^{-1}mol^{-1}]$ और एसआई मात्रक $\text{J mol}^{-1} \text{K}^{-1}$ 2. श्यानता गुणांक (Coefficient of Viscosity): विमीय सूत्र $[ML^{-1}T^{-1}]$ और एसआई मात्रक $\text{kg m}^{-1} \text{s}^{-1}$ 3. प्लांक नियतांक (Planck's Constant): विमीय सूत्र $[ML^2T^{-1}]$ और एसआई मात्रक $\text{J s}$ 4. स्टीफन-बोल्ट्जमैन नियतांक (Stefan-Boltzmann Constant): विमीय सूत्र $[MT^{-3}K^{-4}]$ और एसआई मात्रक $\text{W m}^{-2} \text{K}^{-4}$ उपर्युक्त में से कौन सा/से युग्म सही सुमेलित है/हैं?
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