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General Science
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धातुओं के निष्कर्षण, मिश्रधातुओं के संगठन और उनके विशिष्ट रासायनिक गुणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. कॉपर पाइराइट्स ($CuFeS_2$) से तांबे के निष्कर्षण के दौरान 'प्रतापन' (Bessemerisation) प्रक्रिया में पिघले हुए मैटे (Matte) को सिलिका की अस्तर वाली परिवर्तनीय भट्टी में हवा के साथ उड़ाया जाता है, जिससे अंततः 'फोफोलेदार तांबा' (Blister copper) प्राप्त होता है, जो सल्फर डाइऑक्साइड गैस के बुलबुले बाहर निकलने के कारण छालेदार हो जाता है।
  2. 2. 'पीतल' (Brass) तांबे और जस्ते की एक मिश्रधातु है, जबकि 'कांस्य' (Bronze) तांबे और टिन की मिश्रधातु है; इसके विपरीत, 'जर्मन सिल्वर' में चांदी की उपस्थिति अनिवार्य रूप से 5% से 10% तक होती है जो इसके संक्षारण प्रतिरोध को बढ़ाती है।
  3. 3. क्षार धातुएँ (जैसे सोडियम और पोटेशियम) और क्षारीय मृदा धातुएँ अत्यधिक प्रतिक्रियाशील होती हैं, और इनमें से कुछ को जल के साथ तीव्र अभिक्रिया के दौरान हाइड्रोजन गैस मुक्त करने के कारण मिट्टी के तेल (Kerosene) के भीतर संग्रहीत किया जाता है।

उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि कॉपर पाइराइट्स से तांबे के निष्कर्षण के दौरान बेसेमर परिवर्तक में कॉपर मैट को प्रवाहित वायु के साथ उपचयित किया जाता है, जिससे फेरस सल्फाइड दूर हो जाता है और $Cu_2S$ के अपचयन से प्राप्त तांबे में $SO_2$ गैस के बुलबुले फंसने के कारण फफोलेदार तांबा (Blister copper) बनता है। कथन 2 गलत है क्योंकि 'जर्मन सिल्वर' (German Silver) नाम के विपरीत इसमें चांदी (Silver) का एक प्रतिशत भी उपयोग नहीं किया जाता है; यह तांबे, जस्ते और निकेल की एक मिश्रधातु है। कथन 3 सही है क्योंकि सोडियम और पोटेशियम जैसी अत्यधिक प्रतिक्रियाशील क्षारक धातुएँ वायु की नमी और ऑक्सीजन के साथ खतरनाक रूप से अभिक्रिया करती हैं, इसलिए उन्हें सुरक्षित रखने के लिए किरोसिन (मिट्टी के तेल) में डुबोकर रखा जाता है। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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